हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए सरकार का नया फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। लंबे समय से सेवा सुरक्षा और समान अधिकारों की मांग कर रहे एनएचएम कर्मियों को अब ‘सर्विस बाय-लॉज’ के दायरे में लाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद कर्मचारियों को न केवल प्रशासनिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनकी नौकरी से जुड़े कई नियम और सुविधाएं भी स्पष्ट रूप से लागू हो सकेंगी।
National Health Mission के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों के बीच पिछले कई वर्षों से यह मुद्दा चर्चा में था कि वे स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ होने के बावजूद स्थायी सेवा नियमों से वंचित हैं। अब मिशन निदेशक कार्यालय द्वारा जारी ताजा आदेश ने कर्मचारियों के बीच चल रही अनिश्चितता को काफी हद तक खत्म कर दिया है।
इस पूरे मामले की नींव Punjab and Haryana High Court के उस अहम फैसले से जुड़ी है, जो 17 नवंबर 2025 को डॉ. नेहा बंसल बनाम हरियाणा राज्य मामले में आया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान माना था कि कर्मचारियों को सेवा उपनियमों के लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता। शुरुआत में यह माना जा रहा था कि अदालत का लाभ केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित रहेगा, लेकिन बाद में वित्त विभाग की मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने इसे पूरे प्रदेश के एनएचएम कर्मचारियों पर लागू करने का फैसला लिया।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों में सभी सिविल सर्जनों और संबंधित अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि पात्र कर्मचारियों को लाभ देने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
एनएचएम कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे संघर्ष की जीत बताया है। कर्मचारियों का कहना था कि जब उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह ही काम लिया जाता है, तो सेवा नियमों और सुविधाओं में भेदभाव नहीं होना चाहिए। कई संगठनों ने आरोप लगाया था कि केवल अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले कर्मचारियों को लाभ देना बाकी कर्मचारियों के साथ अन्याय होता।
सरकार के इस फैसले से अब हजारों कर्मचारियों को नौकरी में स्थिरता और भविष्य को लेकर भरोसा मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार अहम भूमिका निभाने वाले एनएचएम कर्मियों का मानना है कि इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक बेहतर तरीके से सेवाएं दे सकेंगे।
हालांकि आदेश में यह भी साफ किया गया है कि यह व्यवस्था फिलहाल लंबित जनहित याचिका (PIL) के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। यानी भविष्य में अदालत के अंतिम निर्णय के अनुसार नियमों में बदलाव संभव है। इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियों में इसे कर्मचारियों के लिए बड़ी प्रशासनिक और मानसिक राहत माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था स्थायी रूप से लागू रहती है, तो आने वाले समय में हरियाणा में संविदा और मिशन मोड पर काम करने वाले अन्य कर्मचारियों की ओर से भी समान मांगें उठ सकती हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम भविष्य की सेवा नीतियों पर भी असर डाल सकता है।

