हरियाणा सरकार राज्य की कृषि व्यवस्था को पारंपरिक मॉडल से निकालकर तकनीक आधारित आधुनिक खेती की ओर ले जाने की तैयारी में है। इसके तहत प्रदेश में 1000 एकड़ क्षेत्र में स्मार्ट बागवानी विकसित करने की व्यापक योजना तैयार की गई है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में खेती को अधिक लाभकारी, कम खर्चीला और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाना है।
नई नीति के तहत एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, वर्टिकल फार्मिंग और सेंसर आधारित ग्रीनहाउस तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल हरियाणा के कृषि ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां भूजल तेजी से नीचे जा रहा है और पारंपरिक खेती किसानों के लिए महंगी साबित हो रही है।
2030 तक बागवानी उत्पादन कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में बागवानी क्षेत्र का दायरा दोगुना और उत्पादन को तीन गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए जिलेवार क्लस्टर मॉडल तैयार किया गया है, जिसमें हर क्षेत्र को उसकी विशेष कृषि क्षमता और बाजार की मांग के अनुसार विकसित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में केवल वही खेती टिकाऊ होगी जो कम पानी, कम जमीन और आधुनिक तकनीक के साथ अधिक उत्पादन दे सके। इसी सोच के साथ राज्य में “स्मार्ट हॉर्टिकल्चर मिशन” को आगे बढ़ाया जा रहा है।
गुरुग्राम-फरीदाबाद बनेंगे हाई वैल्यू खेती के केंद्र
दिल्ली-एनसीआर से सटे गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर जिलों को प्रीमियम हाइड्रोपोनिक और इनडोर वर्टिकल फार्मिंग के लिए चुना गया है। यहां पांच सितारा होटल, बड़े रेस्टोरेंट और प्रीमियम सुपरमार्केट की मांग को ध्यान में रखते हुए उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियों और फलों का उत्पादन किया जाएगा।
लेट्यूस, चेरी टमाटर, रंगीन शिमला मिर्च, विदेशी हर्ब्स और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलें नियंत्रित वातावरण में उगाई जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को सीधे बड़े बाजारों से जोड़कर अधिक मुनाफा दिलाया जा सकेगा।
मशरूम और ऑफ-सीजन सब्जियों पर भी बड़ा फोकस
सोनीपत, करनाल, पानीपत, अंबाला और कुरुक्षेत्र जैसे जिलों को मशरूम और उन्नत सब्जी उत्पादन के लिए विशेष क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां नियंत्रित तापमान वाले यूनिट और मल्टी-लेयर वर्टिकल रैक सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे कम जगह में कई गुना अधिक उत्पादन संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इन तकनीकों के जरिए पूरे साल बेमौसम सब्जियों की खेती की जा सकती है, जिससे किसानों की आमदनी स्थिर बनी रहेगी।
हरियाणा बनेगा आलू बीज उत्पादन का बड़ा केंद्र
कुरुक्षेत्र और करनाल क्षेत्र में एरोपोनिक्स आधारित आलू बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। यहां बिना मिट्टी के हवा में लटकती जड़ों के जरिए वायरस-मुक्त मिनी ट्यूबर तैयार किए जाएंगे, जिन्हें उच्च गुणवत्ता वाले बीज आलू के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार की योजना है कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय और आलू प्रौद्योगिकी केंद्रों को इस मिशन से जोड़कर किसानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाए।
90 प्रतिशत तक कम होगा पानी का उपयोग
स्मार्ट बागवानी तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत को माना जा रहा है। हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स में पारंपरिक खेती की तुलना में 85 से 95 प्रतिशत तक कम पानी की जरूरत होती है।
इन प्रणालियों में पौधों की जड़ों तक सीधे पोषक तत्व पहुंचाए जाते हैं, जिससे पानी की बर्बादी नहीं होती। गिरते भूजल स्तर से जूझ रहे हरियाणा के कई जिलों के लिए यह तकनीक भविष्य की बड़ी जरूरत मानी जा रही है।
सेंसर और कंप्यूटर से नियंत्रित होगी खेती
नई व्यवस्था में तापमान, नमी, रोशनी और पोषक तत्वों की मात्रा को सेंसर और कंप्यूटर सिस्टम के जरिए नियंत्रित किया जाएगा। इससे मौसम में अचानक बदलाव होने पर भी फसलों को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में पारंपरिक खेती लगातार जोखिम भरी होती जा रही है। ऐसे में नियंत्रित वातावरण वाली स्मार्ट खेती भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
युवाओं के लिए रोजगार और स्टार्टअप के अवसर
सरकार इस परियोजना को केवल कृषि सुधार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे ग्रामीण रोजगार और एग्री-स्टार्टअप से भी जोड़ने की योजना है। हाईटेक खेती के लिए प्रशिक्षित तकनीकी युवाओं, कृषि इंजीनियरों और उद्यमियों की मांग बढ़ेगी।
इसके अलावा सरकार किसानों को प्रशिक्षण, सब्सिडी और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने पर भी काम कर रही है, ताकि छोटे किसान भी नई तकनीकों को आसानी से अपना सकें।



