हिमाचल के शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव तय, जिला स्तर पर बनेगा नया ढांचा; अतिरिक्त निदेशक संभालेंगे कमान

हिमाचल के शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव तय, जिला स्तर पर बनेगा नया ढांचा; अतिरिक्त निदेशक संभालेंगे कमान

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और केंद्रीकृत बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित किया गया है। राज्य सरकार अब जिला स्तर पर शिक्षा उपनिदेशक कार्यालयों के पुनर्गठन की तैयारी कर रही है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जिले में एक अतिरिक्त निदेशक का पद सृजित किया जाएगा, जिसके अधीन अब तक अलग-अलग काम कर रहे उच्च, प्रारंभिक और गुणवत्ता एवं निरीक्षण (इंस्पेक्शन) शाखाओं के उपनिदेशक कार्य करेंगे।

शिक्षा निदेशालय के हालिया पुनर्गठन के बाद इसे दूसरा बड़ा सुधार माना जा रहा है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेज दिया है। सरकार की स्वीकृति मिलते ही जिला स्तर पर शिक्षा प्रशासन का पूरा ढांचा बदल जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत अतिरिक्त निदेशक जिले में शिक्षा विभाग के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। कौन-सा उपनिदेशक किस कार्य को देखेगा और किस शाखा की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास होगी, इसका अंतिम निर्णय अतिरिक्त निदेशक ही करेंगे। इससे विभागीय कामकाज में समन्वय बढ़ाने और निर्णय प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास किया जा रहा है।

दरअसल, शिक्षा विभाग के पुनर्गठन के बाद अब स्कूल शिक्षा निदेशालय के अधीन प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की सभी कक्षाएं आ चुकी हैं, लेकिन जिला स्तर पर अभी भी पुरानी व्यवस्था लागू है। अलग-अलग शाखाओं के कारण डाटा प्रबंधन, विभागीय पत्राचार और प्रशासनिक समन्वय में दिक्कतें सामने आ रही थीं। इसी वजह से सरकार और विभाग लंबे समय से नई प्रशासनिक प्रणाली लागू करने पर विचार कर रहे थे।

सूत्रों के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिलों में शिक्षा से जुड़े निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे। साथ ही स्कूलों से संबंधित रिपोर्टिंग और निरीक्षण प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो पाएगी। विभाग का मानना है कि इससे जवाबदेही तय करने में भी आसानी होगी और प्रशासनिक भ्रम की स्थिति कम होगी।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक जिले में तीन अलग-अलग उपनिदेशक कार्यरत हैं। उपनिदेशक प्रारंभिक के जिम्मे पहली से आठवीं तक की कक्षाओं का काम होता है, जबकि उपनिदेशक उच्चतर नौवीं से बारहवीं तक की शिक्षा व्यवस्था संभालते हैं। इसके अलावा गुणवत्ता एवं निरीक्षण से जुड़े कार्यों के लिए अलग व्यवस्था है।

हाल ही में विभाग ने एक अंतरिम व्यवस्था भी लागू की थी, जिसके तहत यदि किसी जिले में उपनिदेशक प्रारंभिक का पद रिक्त हो जाए तो उसका अतिरिक्त कार्यभार उपनिदेशक उच्चतर को सौंप दिया जाएगा। इसके लिए अलग से आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी। अब प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद इस व्यवस्था को और अधिक स्थायी तथा केंद्रीकृत स्वरूप दिया जाएगा।

शिक्षा विभाग में अधिकारियों की कमी भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। विभाग में उपनिदेशक स्तर के कुल 41 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 15 पद वर्तमान में खाली पड़े हैं। इन पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है। माना जा रहा है कि नई प्रशासनिक संरचना लागू होने से पहले रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।

हालांकि, इस पूरी योजना पर अंतिम निर्णय सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। सरकार यह भी आकलन कर रही है कि अतिरिक्त निदेशक पदों के सृजन और प्रशासनिक पुनर्गठन से राज्य पर कितना अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

शिक्षा विभाग के इस संभावित बदलाव को राज्य की स्कूल शिक्षा प्रणाली में लंबे समय बाद होने वाले बड़े प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो स्कूलों के संचालन, मॉनिटरिंग और शिक्षा गुणवत्ता सुधार में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल सकते हैं।