हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की नई व्यापक पोषण नीति 31 मई तक तैयार कर ली जाए। इस पहल के साथ हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है, जहां राज्य स्तर पर विस्तृत और समग्र पोषण नीति लागू की जाएगी।
शिमला में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि “फिट हिमाचल” अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों को संतुलित और पोषणयुक्त भोजन के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। सरकार का उद्देश्य केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पोषण नीति में बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। कुपोषण, एनीमिया और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में भी लोगों तक पोषण संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल बदलाव को लेकर भी सरकार ने बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने Indira Gandhi Medical College and Hospital (आईजीएमसी) शिमला में मरीजों के पूरे डेटा को डिजिटल करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआती चरण में पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइकोलॉजी, बायो-कैमिस्ट्री और फार्मेसी विभागों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद मरीजों को अपनी टेस्ट रिपोर्ट, पर्चियां और मेडिकल दस्तावेज साथ लेकर अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डॉक्टर ऑनलाइन ही मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और रिपोर्ट देख सकेंगे, जिससे इलाज प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी बनेगी।
सरकार का लक्ष्य आईजीएमसी मॉडल को सफल बनाने के बाद प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में लागू करना है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी सुधार होगा और मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़े निवेश की भी तैयारी की है। अत्याधुनिक मशीनों और मेडिकल उपकरणों की खरीद पर करीब 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा तीन मेडिकल कॉलेजों में ऑटोमेटेड लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की सीटें दोगुनी करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य परियोजनाओं को सफल बनाने के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध करवाने का आश्वासन भी दिया गया है।
बैठक में राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष एस.पी. कटियाल और स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार की इन योजनाओं को हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।



