राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में आयोजित जिला अध्यक्ष सम्मेलन के दौरान पार्टी नेताओं को साफ संदेश दिया कि वे वीआईपी संस्कृति से दूरी बनाएं और आम जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पदाधिकारी छोटे-छोटे स्थानीय मुद्दों को उठाकर लोगों की आवाज बनें और जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं।
यह सम्मेलन कांगड़ा में आयोजित किया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के जिला अध्यक्ष शामिल हुए। यह कार्यक्रम 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन के अवसर पर हुआ।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को उठाने के लिए प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों का इंतजार न करें, बल्कि खुद पहल करें। उन्होंने यह भी जोर दिया कि जिला स्तर के नेता ब्लॉक इकाइयों को सक्रिय रखें और संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दें।
सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी ने एक प्रतीकात्मक गतिविधि भी करवाई, जिसमें एक व्यक्ति को कुर्सी पर खड़ा कर अन्य लोगों से झुककर अभिवादन करवाया गया। इसके जरिए उन्होंने पार्टी में व्याप्त वीआईपी मानसिकता को खत्म करने का संदेश दिया।
इसके अलावा, उन्होंने संगठनात्मक जवाबदेही पर जोर देते हुए कहा कि पदाधिकारियों के कार्यों की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा प्रणाली में ग्रीन, येलो और रेड जोन बनाए गए हैं, जिनके आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो पदाधिकारी संगठन के काम में अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि संगठन में रहने का मतलब है जिम्मेदारी निभाना, और हर नेता को पार्टी हित में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।



