पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय में साफ कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी उसी क्षण मानी जाएगी, जब उसकी आवाजाही पर रोक लगा दी जाती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की संवैधानिक समय-सीमा इसी क्षण से लागू होगी, न कि बाद में पूरी की गई औपचारिक प्रक्रिया से।
अदालत ने कहा कि केवल कागजी कार्रवाई के आधार पर गिरफ्तारी का समय तय नहीं किया जा सकता। अगर किसी व्यक्ति को जांच एजेंसी या पुलिस ने उसकी इच्छा के विरुद्ध रोक लिया है, तो उसे उसी समय से हिरासत में माना जाएगा।
यह मामला अमृतसर में ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से जुड़ी जांच के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता को 31 अक्टूबर 2025 की रात करीब 11 बजे देहरादून से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अपने साथ रखा था। हालांकि, उसकी औपचारिक गिरफ्तारी अगले दिन रात 9 बजे दर्ज की गई और फिर 2 नवंबर की दोपहर करीब 2 बजे उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
हाई कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के समय को लेकर पारदर्शिता और व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है।



