प्रियदर्शन के बयान पर क्यों नाराज़ हुए राजपाल यादव? बोले- “मेरी पढ़ाई पर सवाल उठाना गलत है”

प्रियदर्शन के बयान पर क्यों नाराज़ हुए राजपाल यादव? बोले- “मेरी पढ़ाई पर सवाल उठाना गलत है”

बॉलीवुड के चर्चित कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में कानूनी परेशानियों से उबरकर जेल से बाहर आए राजपाल अब दोबारा अपने काम पर लौट चुके हैं। इसी बीच उनके पुराने सहयोगी और मशहूर फिल्ममेकर प्रियदर्शन का एक बयान सामने आया, जिस पर अभिनेता ने खुलकर नाराज़गी जाहिर की।

क्या कहा था प्रियदर्शन ने?

एक मीडिया इंटरव्यू में प्रियदर्शन ने राजपाल यादव की मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने अपनी अगली फिल्म के निर्माताओं से अभिनेता की फीस बढ़ाने की सिफारिश की थी, ताकि उनकी मदद हो सके। इसी बातचीत में उन्होंने यह भी टिप्पणी कर दी कि राजपाल से गलती उनकी कम पढ़ाई की वजह से हुई, हालांकि उन्होंने उन्हें दिल का साफ इंसान बताया।

राजपाल यादव की तीखी प्रतिक्रिया

प्रियदर्शन के इस बयान से राजपाल बिल्कुल सहमत नहीं दिखे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पढ़ाई को लेकर की गई टिप्पणी पूरी तरह गलत है। राजपाल के मुताबिक, “प्रियदर्शन जी मुझे पूरी तरह नहीं जानते। मैं पढ़ा-लिखा इंसान हूं और बहुत छोटी उम्र से काम कर रहा हूं। अगर मेरी शिक्षा कम होती, तो मैं इस इंडस्ट्री में 25–30 साल तक टिक ही नहीं पाता।” अभिनेता ने यह भी जोड़ा कि बड़े से बड़े लोग जीवन में मुश्किलों में फंस सकते हैं और इसका सीधा संबंध किसी की शिक्षा से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

असहमति के बावजूद सम्मान बरकरार

हालांकि नाराज़गी जताने के बाद भी राजपाल यादव ने प्रियदर्शन के प्रति अपना आदर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वे प्रियदर्शन को अपने आदर्श मानते हैं, ठीक वैसे ही जैसे राम गोपाल वर्मा और डेविड धवन को। राजपाल का कहना है कि उन्होंने इन निर्देशकों के साथ 50 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है और वे प्रियदर्शन को पिता समान मानते हैं। राजपाल ने यह भी स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में कई बार लोग पूरी सच्चाई जाने बिना राय बना लेते हैं, लेकिन इससे उनके रिश्तों में सम्मान कम नहीं होता।

प्रियदर्शन-राजपाल की हिट जोड़ी

गौरतलब है कि प्रियदर्शन ने राजपाल यादव को कई यादगार फिल्मों में अहम किरदार दिए हैं। खासकर हेरा फेरी में उनका अभिनय आज भी दर्शकों को खूब याद है। मतभेद के बावजूद, दोनों के बीच पेशेवर और भावनात्मक सम्मान अब भी कायम है।