Donald Trump की अगुवाई में चल रहे ईरान संघर्ष के बीच अमेरिका को अब अपने सहयोगियों का सीमित समर्थन मिल रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तेल आपूर्ति रुकने के बाद अमेरिका ने NATO देशों से मदद मांगी, लेकिन यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया कि वे इस सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनेंगे।
करीब 17 दिन पहले शुरू हुए इस संघर्ष में शुरुआत में अमेरिका को बढ़त मिलती दिखी थी, खासकर तब जब Ali Khamenei से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबर आई। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और युद्ध लंबा खिंचता नजर आ रहा है। तेल सप्लाई का बड़ा रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ गया है। इसके बावजूद NATO देशों ने अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है।
जर्मनी ने सबसे स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस दोनों ने सैन्य भागीदारी से दूरी बनाई, हालांकि उन्होंने ईरान की नीतियों की आलोचना जरूर की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी साफ किया कि उनका देश सीधे इस संघर्ष में नहीं कूदेगा। उन्होंने माना कि होर्मुज का रास्ता खुलना जरूरी है, लेकिन इसके लिए सामूहिक और संतुलित कदम उठाने होंगे।
इटली ने भी बातचीत को ही समाधान बताया। विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी के अनुसार, मौजूदा यूरोपीय मिशन को युद्ध में बदलना सही नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी इसी तरह का रुख अपनाया है। European Union ने भी अमेरिका की मांग को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल रेड सी मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। यूरोपीय देश पहले अमेरिका और इजराइल की रणनीति को समझना चाहते हैं।
दूसरी तरफ Israel ने ईरान के कई शहरों—तेहरान, शिराज और तबरीज—में हमले तेज कर दिए हैं। इजराइली सेना ने अगले तीन हफ्तों तक अभियान जारी रखने की तैयारी कर ली है और उसका कहना है कि लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने जमीनी दखल दिया, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे “वियतनाम जैसा अंजाम” बताया।
इस युद्ध में अब तक भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में 1,800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अमेरिकी सेना के 13 सैनिक मारे गए हैं और करीब 200 घायल हुए हैं। उधर, लेबनान में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं, जहां इजराइल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस संघर्ष में 850 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। जर्मनी ने इस कदम को खतरनाक बताते हुए इजराइल को चेतावनी दी है।
कुल मिलाकर, यह टकराव अब केवल सैन्य नहीं बल्कि कूटनीतिक परीक्षा भी बन चुका है, जहां अमेरिका अपने सहयोगियों को साथ लाने में संघर्ष करता दिख रहा है।




