तेज गर्मी के चलते अस्पतालों में उल्टी-दस्त और कमजोरी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। तापमान लगातार ऊपर जा रहा है, जिससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन और लू लगने का खतरा भी बढ़ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर इन समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मी में बाहर निकलना मजबूरी हो सकता है, लेकिन ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। घर से बाहर जाते समय हमेशा पानी साथ रखें और हर 10-15 मिनट में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। कोशिश करें कि पूरे शरीर को ढकने वाले हल्के कपड़े पहनें, ताकि सीधी धूप से बचाव हो सके।
डॉक्टरों की मानें तो एक बड़ी गलती लोग अक्सर करते हैं, लंबे समय तक प्यास रोकना और फिर एक साथ बहुत ज्यादा पानी पी लेना। ऐसा करना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए दिनभर में बार-बार कम मात्रा में पानी पीना ज्यादा फायदेमंद होता है। साथ ही बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से भी बचना चाहिए।
डिहाइड्रेशन की पहचान भी घर बैठे की जा सकती है। अगर पेशाब का रंग गहरा पीला दिखाई दे, तो यह शरीर में पानी की कमी का संकेत है। ऐसे में तुरंत पानी और तरल पदार्थ लेना जरूरी हो जाता है।
गर्मी में शरीर से पसीने के जरिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं, जिससे कमजोरी और चक्कर जैसी समस्या हो सकती है। इस कमी को पूरा करने के लिए फलों और प्राकृतिक पेयों का सेवन बढ़ाना चाहिए। जैसे गन्ने का रस, जिसमें नींबू और पुदीना मिलाकर पीना शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ विटामिन सी की पूर्ति भी करता है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि दही, छाछ, लस्सी, तरबूज, खरबूजा और अंगूर जैसे फलों का सेवन भी करते रहें। हर आधे घंटे में किसी न किसी रूप में लिक्विड लेते रहने से शरीर हाइड्रेट रहता है और गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाव होता है।
थोड़ी सी जागरूकता और सही आदतें अपनाकर लू, बुखार और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।




