अमेरिका और ईरान के बीच हालात एक बार फिर तनावपूर्ण नजर आ रहे हैं। जहां एक तरफ तेहरान ने शांति की पहल करते हुए प्रस्ताव भेजा है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है।
ट्रम्प ने कहा कि वे प्रस्ताव की समीक्षा तो करेंगे, लेकिन इसके सफल होने की उम्मीद कम है। उनके मुताबिक, पिछले कई दशकों में ईरान ने जो कदम उठाए हैं, उनकी कीमत अभी तक नहीं चुकाई गई है। बताया जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से 14 बिंदुओं वाला प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया है। इसमें क्षेत्रीय तनाव खत्म करने के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नई व्यवस्था बनाने का सुझाव शामिल है।
ईरान की ओर से उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि अब फैसला अमेरिका को करना है, बातचीत करनी है या टकराव का रास्ता अपनाना है। उन्होंने कहा कि ईरान दोनों स्थितियों के लिए तैयार है। इस बीच ईरानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा कि हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी नीतियां अक्सर दिखावे के लिए होती हैं और उनका मकसद वैश्विक तेल बाजार और अपनी रणनीतिक स्थिति को संभालना होता है।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में भी अमेरिका पर आरोप लगाए हैं कि वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहा। ईरान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय निगरानी में यूरेनियम संवर्धन करना अवैध नहीं है, फिर भी उसके साथ अलग व्यवहार किया गया। इसी बीच, ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी में है। संसद के उपाध्यक्ष हमीदरेजा हाजी-बाबाई ने संकेत दिए हैं कि इस कानून के तहत कुछ देशों के जहाजों की आवाजाही पर सख्ती बढ़ाई जा सकती है। यहां तक कि कुछ जहाजों को मुआवजा देने के बाद ही गुजरने की अनुमति मिल सकती है।
कुल मिलाकर, शांति की कोशिशों के बीच दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है, जिससे आने वाले समय में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह अनिश्चित बना हुआ है।




