किन देशों को आर्थिक मदद देता है भारत, और किस पर सबसे ज्यादा बकाया है उधार?

किन देशों को आर्थिक मदद देता है भारत, और किस पर सबसे ज्यादा बकाया है उधार?

भारत सिर्फ अपने पड़ोसी देशों के साथ राजनीतिक रिश्ते ही मजबूत नहीं करता, बल्कि आर्थिक सहयोग के जरिए भी कई देशों की मदद करता है। सड़क, रेलवे, बिजली, अस्पताल और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी परियोजनाओं के लिए भारत समय-समय पर कई देशों को वित्तीय सहायता और कर्ज उपलब्ध कराता रहा है। एशिया से लेकर अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक भारत की यह नीति उसकी विदेश कूटनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।

हाल ही में मालदीव ने भारत से लिए गए कर्ज की दूसरी किश्त चुका दी है। जानकारी के मुताबिक 11 मई 2026 को मालदीव ने 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ट्रेजरी बिल भुगतान किया। यह कर्ज भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के जरिए 2019 में दिया गया था। भारत ने मालदीव को राहत देने के लिए इस कर्ज की अवधि कई बार बढ़ाई भी थी ताकि उस पर अचानक आर्थिक दबाव न बने।

बताया जा रहा है कि कुल 150 मिलियन डॉलर की सहायता राशि में से मालदीव अब तक 100 मिलियन डॉलर लौटा चुका है। पहली किश्त जनवरी 2024 में दी गई थी, जबकि दूसरी किश्त मई 2026 में चुकाई गई। अब अंतिम 50 मिलियन डॉलर सितंबर 2026 तक लौटाए जाने की संभावना है। इस पूरे घटनाक्रम को भारत और मालदीव के मजबूत आर्थिक संबंधों के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत किन देशों को देता है मदद?
भारत की आर्थिक सहायता सूची में सबसे ज्यादा नाम पड़ोसी और विकासशील देशों के हैं। इनमें भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, अफगानिस्तान और कई अफ्रीकी देश शामिल हैं। इसके अलावा सेशेल्स और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों को भी भारत आर्थिक सहयोग देता है।

केंद्रीय बजट 2024-25 में विदेश मंत्रालय के लिए 22,155 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं विदेशी सहायता कार्यक्रमों के लिए लगभग 5,667 करोड़ रुपये से अधिक की राशि तय की गई है। यह पैसा विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

अगर सबसे ज्यादा सहायता पाने वाले देश की बात करें तो भूटान इस सूची में शीर्ष पर है। अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भूटान को करीब 2,068 करोड़ रुपये की मदद दी जा सकती है। इसके बाद नेपाल को लगभग 700 करोड़ रुपये, मालदीव को करीब 400 करोड़ रुपये और मॉरीशस को 370 करोड़ रुपये की सहायता मिलने का अनुमान है।

वहीं श्रीलंका को लगभग 245 करोड़ रुपये, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों को करीब 200-200 करोड़ रुपये की सहायता दी जाती है। इसके अलावा बांग्लादेश, सेशेल्स और लैटिन अमेरिकी देशों को भी अलग-अलग परियोजनाओं के तहत आर्थिक मदद दी जाती है।

भारत खुद भी लेता है विदेशी कर्ज
एक तरफ भारत कई देशों को आर्थिक सहयोग देता है, तो दूसरी तरफ वह खुद भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विदेशी स्रोतों से कर्ज लेता है। मार्च 2020 तक भारत पर कुल विदेशी कर्ज लगभग 558.5 अरब डॉलर था। कोरोना महामारी के दौरान भारत ने स्वास्थ्य, शिक्षा और MSME सेक्टर को संभालने के लिए वर्ल्ड बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसी संस्थाओं से भी उधार लिया था।

आज भारत 65 से ज्यादा देशों के साथ आर्थिक सहयोग कार्यक्रम चला रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक पहचान बनाने में जुटा है।