मई में करें लिवर की सफाई, आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में शरीर से तेजी से निकलते हैं टॉक्सिन्स

मई में करें लिवर की सफाई, आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में शरीर से तेजी से निकलते हैं टॉक्सिन्स

गलत खानपान, लगातार तनाव और बिगड़ी दिनचर्या का सबसे ज्यादा असर लिवर पर पड़ता है। जब लिवर ठीक तरह से काम नहीं करता तो गैस, एसिडिटी, पेट भारी रहना और शरीर में सुस्ती जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक, इन समस्याओं से राहत पाने के लिए मई का महीना बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इस समय शरीर को अंदर से साफ करने की प्रक्रिया तेजी से काम करती है।

आयुर्वेद में मई को ऋतु परिवर्तन का समय बताया गया है। इस दौरान सर्दियों और वसंत में जमा कफ धीरे-धीरे कम होने लगता है और शरीर में पित्त बढ़ने लगता है। चूंकि लिवर को पित्त का मुख्य केंद्र माना जाता है, इसलिए इस मौसम में लिवर की सफाई करने से शरीर में जमा गंदगी और विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है। इससे गर्मियों में होने वाली पेट संबंधी परेशानियां, त्वचा की समस्याएं और थकान भी कम हो सकती है।

लिवर को हेल्दी रखने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

भूमि आंवला
आयुर्वेद में इसे लिवर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह लिवर की कमजोर कोशिकाओं को ठीक करने में मदद करता है और फैटी लिवर व पीलिया जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है।

कालमेघ
यह जड़ी-बूटी खून की अशुद्धियों को साफ करने और लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। इससे पाचन अग्नि मजबूत होती है।

पुनर्नवा
अगर लिवर में सूजन या शरीर में पानी रुकने की समस्या हो तो पुनर्नवा उपयोगी मानी जाती है। यह शरीर से अतिरिक्त पानी और गंदगी बाहर निकालने में मदद करती है।

कुटकी
लिवर डिटॉक्स के लिए कुटकी को आयुर्वेद की असरदार औषधियों में गिना जाता है। माना जाता है कि यह लिवर में जमा पुराने टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करती है।

पंचकर्म थेरेपी
आयुर्वेदिक पंचकर्म प्रक्रिया शरीर और रक्त को प्राकृतिक तरीके से शुद्ध करने का काम करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे लिवर को बेहतर तरीके से काम करने में सहायता मिल सकती है।

(सेहत से जुड़ा कोई भी घरेलू उपाय अपनाने, डाइट बदलने या आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

(Photo : AI Generated)