पंजाब के रियल एस्टेट प्रोजेक्टों में बड़ा घोटाला उजागर होने के संकेत, CLU मंजूरियों पर ED की गहन जांच; पूर्व अफसर जांच के घेरे में

पंजाब के रियल एस्टेट प्रोजेक्टों में बड़ा घोटाला उजागर होने के संकेत, CLU मंजूरियों पर ED की गहन जांच; पूर्व अफसर जांच के घेरे में

एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने पंजाब में रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी गई चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) मंजूरियों की जांच को और तेज कर दिया है। अब यह मामला केवल बिल्डरों और प्रोजेक्ट कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच एजेंसियों की नजर राज्य के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक एक पूर्व मुख्य सचिव और पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) के पूर्व चेयरमैन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

जांच एजेंसियों को ऐसे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे संकेत मिलते हैं कि कई विवादित रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप किया गया था। इसी आधार पर संबंधित पूर्व अधिकारियों को किसी भी समय पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।

गौरतलब है कि ईडी ने 8 और 9 मई को मोहाली, न्यू चंडीगढ़ और खरड़ सहित कई स्थानों पर छापेमारी की थी। इन छापों के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जब्त किए गए थे। अब उनकी जांच के बाद कई नए तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है।

सूत्रों के अनुसार एजेंसियों को संदेह है कि कुछ परियोजनाओं को उस समय रेरा पंजीकरण और विपणन की अनुमति दी गई, जब भूमि स्वामित्व, लाइसेंस और सीएलयू रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां मौजूद थीं। आरोप है कि तकनीकी और कानूनी आपत्तियों के बावजूद कुछ बिल्डरों को विशेष लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को नजरअंदाज किया गया।

जांच के केंद्र में द इंडियन कोआपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी लिमिटेड भी है। इस सोसाइटी ने वर्ष 2014 में पलहेड़ी और रहमांपुर गांवों में करीब 123 एकड़ जमीन पर कॉलोनी विकसित करने के लिए आवेदन किया था। बाद में राजस्व रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि प्रस्तावित भूमि के बड़े हिस्से पर सोसाइटी का प्रत्यक्ष मालिकाना हक ही नहीं था।

सूत्रों का दावा है कि शेष जमीन के लिए कथित तौर पर अपरिवर्तनीय सहमति पत्र लगाए गए थे। कई जमीन मालिकों ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के आधार पर मंजूरियां हासिल की गईं।

ईडी अब पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व रेरा चेयरमैन के कार्यकाल की फाइलों, नोटशीटों और मंजूरी आदेशों की बारीकी से जांच कर रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि कुछ परियोजनाओं को तकनीकी समितियों द्वारा रोके जाने के बावजूद बाद में “बैकडोर” तरीके से मंजूरी दिलाई गई।

इस मामले में निवेशकों और सोसाइटी सदस्यों से लगभग 150 करोड़ रुपए जुटाए जाने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों को न तो प्लॉट की रजिस्ट्री मिली और न ही कब्जा सौंपा गया।

जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि जुटाई गई राशि का उपयोग अन्य परियोजनाओं में किया गया। इनमें सनटेक सिटी, ला कैनेला और डिस्ट्रिक्ट-7 जैसे प्रोजेक्टों के नाम सामने आ रहे हैं। ईडी अब इन परियोजनाओं में कथित ब्लैक मनी के इस्तेमाल और चंडीगढ़ से दिल्ली तक जुड़े वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार एजेंसियां अब केवल बिल्डरों की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उन वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करने की तैयारी में हैं जिन्होंने भूमि स्वामित्व से जुड़ी आपत्तियों के बावजूद CLU और अन्य मंजूरियां दीं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष राज्य सरकार ने विवादित परियोजनाओं में से एक हिस्से की लगभग 30 एकड़ भूमि का CLU रद्द कर दिया था। हालांकि बाद में नियमों में बदलाव होने के बाद शेष हिस्से में निर्माण कार्य जारी रहने दिया गया।

अब यह पूरा मामला पंजाब के रियल एस्टेट सेक्टर में प्रशासनिक मिलीभगत, फर्जी दस्तावेजों और बड़े वित्तीय लेन-देन की आशंकाओं को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे कई बड़े नामों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।