पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से इसे प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। पंजाब लोक भवन, चंडीगढ़ में आयोजित वाइस-चांसलर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ युवा ही देश के मजबूत भविष्य की नींव बन सकते हैं।
“उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु एक समान नीति” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में पंजाब और चंडीगढ़ के कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षा विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री और प्लेसमेंट ही सफलता का पैमाना नहीं हो सकते, बल्कि विद्यार्थियों का मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल कटारिया ने कहा कि वर्तमान समय में युवा कई प्रकार के मानसिक दबावों से गुजर रहे हैं। लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा, शैक्षणिक तनाव, करियर को लेकर असुरक्षा, सोशल मीडिया और डिजिटल लत जैसी समस्याएं विद्यार्थियों को भीतर से प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कई छात्र अकेलेपन और अवसाद जैसी स्थितियों से जूझते हैं, लेकिन समय पर उन्हें सही मार्गदर्शन और सहयोग नहीं मिल पाता।
उन्होंने शिक्षण संस्थानों से अपील की कि वे अपने परिसरों में मजबूत काउंसलिंग सिस्टम विकसित करें। इसके तहत हैप्पीनेस एवं वेलनेस सेल, छात्र-से-छात्र सहयोग तंत्र, पीयर-मेंटॉरिंग कार्यक्रम और नियमित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान शुरू किए जाने चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां हर छात्र खुद को सुरक्षित, सम्मानित और सुना हुआ महसूस करे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी विद्यार्थी मानसिक दबाव के कारण स्वयं को अकेला या उपेक्षित महसूस न करे।
सम्मेलन में उन्होंने कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा को भी मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण बताया। कटारिया ने कहा कि जब युवाओं के पास रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ते हैं तो उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन देने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा को और अधिक बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने नशा मुक्ति अभियान में शिक्षण संस्थानों की भूमिका को भी बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे राज्य में शैक्षणिक परिसरों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें जागरूकता और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि छात्र समुदाय को नशे, तनाव और मानसिक समस्याओं से बचाने के लिए नियमित संवाद, कार्यशालाएं और प्रेरक गतिविधियां आयोजित की जाएं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इस तरह की नीति-आधारित पहल काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति तैयार की जा सकती है, जिससे छात्रों को व्यवस्थित सहायता और बेहतर परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।




