पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक सुखपाल सिंह खैरा को ग्राम पंचायत की सार्वजनिक जमीन से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए उन पर ₹6 लाख का जुर्माना लगाया। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस विधायक पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
आप पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हाईकोर्ट के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि “कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सुखपाल सिंह खैरा लंबे समय से खुद को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बताते रहे, लेकिन अदालत के फैसले ने उनके दावों की सच्चाई सामने ला दी।
बलतेज पन्नू ने कहा कि मामला ग्राम पंचायत रामगढ़ की सार्वजनिक गली और रास्ते पर कथित अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार अदालत के रिकॉर्ड में यह उल्लेख है कि स्थानीय ग्रामीणों ने शिकायत दी थी कि सार्वजनिक रास्ते पर गेट लगाकर लोगों की आवाजाही बाधित की गई। उन्होंने कहा कि इससे गांववासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और इमरजेंसी सेवाओं के लिए भी रास्ता प्रभावित हो सकता था।
आप नेता ने दावा किया कि अदालत के समक्ष पंचायत रिकॉर्ड, मेज़रमेंट बुक, राजस्व दस्तावेज, जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट और सैटेलाइट तस्वीरें पेश की गईं, जिनसे यह साबित हुआ कि विवादित जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित रास्ते का हिस्सा थी। उन्होंने कहा कि अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक रास्ते पर अवरोध को गैर-कानूनी माना।
बलतेज पन्नू ने यह भी आरोप लगाया कि जब प्रशासनिक टीम कब्जा हटाने पहुंची तो कार्रवाई में बाधाएं खड़ी की गईं और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया जारी रखी और अब हाईकोर्ट के फैसले ने पूरे मामले पर स्पष्ट रुख सामने रख दिया है।
आप नेता के मुताबिक, सुखपाल सिंह खैरा ने अदालत में याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने न केवल याचिका खारिज कर दी बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर भी सख्त टिप्पणी की। पन्नू ने कहा कि अदालत ने माना कि याचिका को इस तरह पेश किया गया मानो यह किसी बड़े संवैधानिक विवाद से जुड़ी हो, जबकि असल मुद्दा सार्वजनिक संपत्ति पर कथित कब्जे का था।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालतों का इस्तेमाल राजनीतिक या प्रशासनिक विवादों को हथियार की तरह इस्तेमाल करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने जुर्माने की राशि संबंधित पक्षों में बराबर बांटने का आदेश दिया और कहा कि राशि जमा न करने की स्थिति में इसे भूमि राजस्व बकाया की तरह वसूला जाएगा।
बलतेज पन्नू ने कांग्रेस विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता लगातार दूसरों पर आरोप लगाते रहे, अब वही अदालत के फैसले के बाद कठघरे में खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने राजनीतिक बयानबाज़ी और वास्तविक तथ्यों के बीच का अंतर जनता के सामने उजागर कर दिया है।




