पंजाब की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। मजीठा विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों और कस्बों में पूर्व मंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लेकर लगाए गए पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और प्रमुख चौकों पर लगाए गए पोस्टरों में मजीठिया को पुलिस द्वारा तलाशे जाने का दावा किया गया है। पोस्टरों में उन्हें कथित तौर पर एक मामले में मुख्य आरोपी बताते हुए आम लोगों से उनकी जानकारी पुलिस को देने की अपील की गई है। पोस्टरों की भाषा और प्रस्तुति को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
यह पूरा घटनाक्रम उस FIR के बाद सामने आया है, जो हाल ही में मजीठा पुलिस स्टेशन में हुए कथित विवाद और पुलिस हिरासत में लिए गए एक युवक को छुड़ाने के आरोपों के संबंध में दर्ज की गई थी। पुलिस द्वारा दर्ज मामले के बाद से ही यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के पोस्टर पहले कभी क्षेत्र में देखने को नहीं मिले, जिसके कारण लोगों के बीच जिज्ञासा और राजनीतिक चर्चा दोनों बढ़ गई हैं। वहीं, अकाली दल के समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इस मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी समय में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि पंजाब की राजनीति में पहले से ही विभिन्न मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में मजीठिया से जुड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की सियासत का प्रमुख विषय बन सकता है।
फिलहाल पोस्टर लगाने वालों की पहचान को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, पुलिस भी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी हुई है। इस घटनाक्रम ने मजीठा क्षेत्र के साथ-साथ पूरे पंजाब के राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।




