4 मई से एक ऐसा समय शुरू हो गया है जिसे पारंपरिक मान्यताओं में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इस अवधि को ‘अग्नि नक्षत्र’ कहा जाता है, जब सूर्य का प्रभाव अत्यधिक तेज हो जाता है और तापमान अपने चरम की ओर बढ़ता है। यह चरण 28 मई तक जारी रहेगा और इन दिनों में मौसम के साथ-साथ जीवनशैली पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब यह अग्नि नक्षत्र की अवधि मानी जाती है। कृतिका का संबंध अग्नि तत्व से होने के कारण इस दौरान धरती पर गर्मी का असर ज्यादा महसूस होता है। दक्षिण भारत में इस समय को भगवान मुरुगन की भक्ति के लिए खास महत्व दिया जाता है और भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
इस दौरान सेहत को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी होता है। तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए बाहर निकलने से बचने, अधिक पानी और तरल पदार्थ लेने तथा हल्का और सुपाच्य भोजन करने की सलाह दी जाती है। सूती कपड़े पहनना और शरीर को ठंडा बनाए रखना भी फायदेमंद माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत टालनी चाहिए। शादी-विवाह, मुंडन और उपनयन जैसे शुभ संस्कार भी इस समय नहीं किए जाते। अनावश्यक यात्रा से दूरी बनाना भी बेहतर माना गया है।
वहीं, इस समय को आध्यात्मिक रूप से उपयोगी बनाने के लिए भगवान मुरुगन की उपासना, मंत्र जाप, ध्यान और जलदान जैसे कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
नोट: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित है।
(Photo : AI Generated)




