क्या इस्तेमाल के हिसाब से चुकाना होगा AI का बिल? कंपनियां बदल रहीं हैं पूरा गेम

क्या इस्तेमाल के हिसाब से चुकाना होगा AI का बिल? कंपनियां बदल रहीं हैं पूरा गेम

AI इंडस्ट्री अब तेजी से उस मॉडल की ओर बढ़ती दिख रही है, जहां यूजर्स को सेवा का भुगतान उसी तरह करना पड़ सकता है जैसे बिजली के लिए किया जाता है यानी जितना इस्तेमाल, उतना बिल। इस सोच को पहले ही OpenAI के CEO Sam Altman सामने रख चुके हैं, और अब कंपनियां इसे व्यवहार में लाने लगी हैं।

इसी दिशा में AI कंपनी Anthropic ने अपने Claude प्लेटफॉर्म की एंटरप्राइज प्राइसिंग में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां कंपनियां तय सब्सक्रिप्शन फीस पर निर्भर थीं, अब उन्हें इस्तेमाल के आधार पर भी भुगतान करना होगा। कंपनी ने प्रति सीट फीस को पहले के 40 से 200 डॉलर प्रति माह के मुकाबले घटाकर करीब 20 डॉलर कर दिया है, जिससे शुरुआत में प्लान सस्ता लगता है, लेकिन इसके साथ एक नया खर्च जुड़ गया है।

अब एंटरप्राइज यूजर्स को हर महीने अनुमानित टोकन यूसेज का भुगतान पहले से करना होगा, भले ही वे उस मात्रा का पूरा इस्तेमाल करें या नहीं। इसका मतलब है कि कंपनियों को अपने इस्तेमाल का अंदाजा लगाकर पहले ही कमिटमेंट करना पड़ेगा, जिससे वास्तविक उपयोग कम होने पर भी खर्च तय रहेगा। इसके अलावा, पहले दिए जाने वाले 10 से 15 प्रतिशत API डिस्काउंट को भी खत्म कर दिया गया है, जिससे कुल लागत और बढ़ सकती है।

इस बदलाव का असर खासतौर पर उन संगठनों पर पड़ेगा जो बड़े स्तर पर AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। भले ही बेस प्लान सस्ता हो गया हो, लेकिन कुल स्वामित्व लागत (Total Cost of Ownership) बढ़ने की आशंका है क्योंकि अब खर्च का बड़ा हिस्सा उपयोग और टोकन खपत पर निर्भर करेगा।

दरअसल, AI कंपनियां पिछले कुछ सालों से टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट में भारी निवेश कर रही हैं, लेकिन उस अनुपात में कमाई नहीं हो पा रही थी। ऐसे में अब कंपनियां ऐसे मॉडल की तलाश में हैं, जहां रेवेन्यू सीधे इस्तेमाल से जुड़ा हो। यही वजह है कि “पे-एज़-यू-यूज़” यानी उपयोग आधारित बिलिंग को प्राथमिकता दी जा रही है, जो आगे चलकर एक स्टैंडर्ड मॉडल बन सकता है।

हाल के समय में कई यूजर्स ने यह शिकायत भी की थी कि Claude इस्तेमाल करते हुए टोकन बहुत तेजी से खत्म हो जाते हैं, जिससे काम अधूरा रह जाता है या लागत बढ़ जाती है। जांच में यह सामने आया कि कुछ खास तरह के उपयोग, जैसे बड़े डेटा प्रोसेसिंग या लंबी क्वेरी, टोकन को तेजी से खपत करते हैं। इसके बाद कंपनी ने एफिशिएंसी सुधारने और सिस्टम को बेहतर बनाने की बात कही है।

इसी बीच Anthropic की कमाई में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। कंपनी का रन-रेट रेवेन्यू अब 30 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, जबकि 2025 के अंत तक यह करीब 9 बिलियन डॉलर था। यह दिखाता है कि AI टूल्स की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां इन्हें अपनाने के लिए तैयार हैं।

बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में Anthropic ने Google और Broadcom के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के TPU इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए समझौता किया है, जो 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है। यह कदम साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में AI का उपयोग और बढ़ेगा, और उसके साथ ही उपयोग आधारित बिलिंग मॉडल भी आम होता जाएगा।