चंडीगढ़ के दक्षिणी सेक्टरों में सफाई संकट गहराया, हाउस मीटिंग में निगम करेगा नई व्यवस्था पर फैसला

चंडीगढ़ के दक्षिणी सेक्टरों में सफाई संकट गहराया, हाउस मीटिंग में निगम करेगा नई व्यवस्था पर फैसला

चंडीगढ़ नगर निगम के दक्षिणी सेक्टरों में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सेक्टर 31 से 56, साथ ही सेक्टर 61 और 63 में कूड़ा उठाने और सफाई कार्य का जिम्मा संभाल रही निजी कंपनी की अवधि समाप्त होने के बाद अब आगे की रणनीति तय नहीं हो पाई है। ऐसे में शहर के हजारों लोगों पर सफाई सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है।

जानकारी के मुताबिक संबंधित कंपनी को पहले एक महीने का अस्थायी विस्तार दिया गया था, लेकिन अब निगम प्रशासन आगे और एक्सटेंशन देने के पक्ष में नजर नहीं आ रहा। इसी वजह से आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

हाउस बैठक में होगा बड़ा फैसला

नगर निगम की इसी सप्ताह प्रस्तावित हाउस बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है। माना जा रहा है कि पार्षद इस मामले पर अधिकारियों से जवाब मांगेंगे कि यदि मौजूदा कंपनी को हटाया जाता है तो वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी।

सूत्रों के अनुसार निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया लंबी और तकनीकी औपचारिकताओं से भरी होती है। दूसरी तरफ यदि निगम खुद सफाई व्यवस्था संभालने का निर्णय लेता है तो पर्याप्त कर्मचारियों, वाहनों और मशीनरी की उपलब्धता बड़ा सवाल बन सकती है।

कई सालों से चल रहा था काम

यह कंपनी लंबे समय से दक्षिणी सेक्टरों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सफाई सेवाएं संभाल रही थी। हालांकि इसे बार-बार दिए गए एक्सटेंशन को लेकर विपक्षी पार्षद और कई सामाजिक संगठन पहले भी सवाल उठाते रहे हैं। आरोप लगते रहे हैं कि स्थायी समाधान निकालने के बजाय निगम हर बार अस्थायी विस्तार देकर काम चलाता रहा।

टेंडर प्रक्रिया भी विवादों में

सफाई व्यवस्था के लिए हाल ही में जारी टेंडर प्रक्रिया भी विवादों में रही। छह कंपनियों ने आवेदन किया था, लेकिन तकनीकी जांच के बाद केवल दो कंपनियां ही योग्य पाई गईं। इनमें सबसे कम बोली करीब 5.93 करोड़ रुपये प्रतिमाह की लगाई गई, जो निगम के अनुमानित खर्च से काफी अधिक थी।

बताया जा रहा है कि निगम ने इस कार्य के लिए लगभग 4.39 करोड़ रुपये मासिक का अनुमान तय किया था, लेकिन प्राप्त न्यूनतम बोली उससे करीब 35 प्रतिशत ज्यादा रही। इसी कारण प्रशासन नई निविदा को लेकर भी असमंजस में है।

लोगों को सताने लगी चिंता

दक्षिणी सेक्टरों के निवासी अब सफाई सेवाओं में बाधा आने की आशंका से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नई व्यवस्था लागू नहीं की गई तो बरसात के मौसम में कूड़े के ढेर, बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

अब सबकी नजर नगर निगम की हाउस बैठक पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि शहर के इन बड़े रिहायशी इलाकों में सफाई व्यवस्था किस तरह जारी रखी जाएगी।