चीन-अमेरिका टकराव की आहट: होर्मुज में ईरानी तेल को लेकर बढ़ी तनातनी

चीन-अमेरिका टकराव की आहट: होर्मुज में ईरानी तेल को लेकर बढ़ी तनातनी

मध्य-पूर्व का रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य इन दिनों वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। ईरान से तेल सप्लाई और उस पर अमेरिका की सख्ती के चलते चीन और अमेरिका के बीच तनाव खुलकर सामने आ रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि अगर दोनों देशों के बीच समझदारी नहीं बनी, तो यह विवाद बड़े टकराव में बदल सकता है।

दरअसल, अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि वह ईरान से तेल लेकर जा रहे चीनी टैंकरों पर रोक लगाने के लिए तैयार है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अपने बयान में कहा कि चीन को ईरानी तेल लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी नेवी होर्मुज स्ट्रेट में निगरानी बढ़ाकर ऐसे जहाजों को रोक सकती है जो ईरान से तेल लेकर जा रहे हैं।

हालांकि, नाकेबंदी की शुरुआत के शुरुआती दिनों में किसी भी चीनी टैंकर को नहीं रोका गया, लेकिन अमेरिका के इस रुख ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वास्तव में चीनी जहाजों को रोका गया, तो यह सीधे तौर पर चीन-अमेरिका के बीच टकराव को जन्म दे सकता है।

दूसरी ओर, चीन ने इस मुद्दे पर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। बीजिंग का कहना है कि ईरान के साथ उसके व्यापारिक और ऊर्जा संबंध पूरी तरह वैध हैं और इसमें किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। चीन ने साफ कर दिया है कि उसके जहाज पहले की तरह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते रहेंगे।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की संभावित कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यापार के नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका के कदम को ‘जंगलराज’ जैसा बताते हुए चेतावनी दी कि दुनिया को अराजकता की ओर नहीं धकेला जाना चाहिए।

वहीं, चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने भी कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि चीन के ईरान के साथ ऊर्जा और व्यापार समझौते हैं, और इन समझौतों के तहत जहाजों का आवागमन जारी रहेगा। उन्होंने अमेरिका से अपील की कि वह चीन के आंतरिक और द्विपक्षीय मामलों में दखल न दे।

इस पूरे घटनाक्रम में ईरान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान अपने तेल का बड़ा हिस्सा चीन को निर्यात करता है, जिससे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध बने हुए हैं। ऐसे में अमेरिका के लिए इस सप्लाई चेन को रोकना आसान नहीं होगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत को समझना भी जरूरी है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। चीन की ऊर्जा जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत तेल और 30 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से आता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वास्तव में चीनी टैंकरों को रोकता है, तो यह सिर्फ व्यापारिक विवाद नहीं रहेगा, बल्कि सैन्य तनाव में भी बदल सकता है। दोनों देशों की नौसेनाओं की मौजूदगी इस क्षेत्र में पहले से ही है, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो जाती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। चीन, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या दुनिया एक नए टकराव की ओर बढ़ती है।