दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से देशभर के संगठनों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक दलों के लिए विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। शनिवार को भी कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले यहां एक प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समर्थक जुट रहे हैं और शिक्षा मंत्री के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई भी व्यक्ति या संगठन जंतर-मंतर पर जाकर आंदोलन कर सकता है?
दरअसल, भारत का संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर कुछ कानूनी प्रक्रियाएं और नियम तय किए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है।
किसी भी रैली, धरने या प्रदर्शन के आयोजन से पहले संबंधित आयोजकों को दिल्ली पुलिस से अनुमति लेनी पड़ती है। इसके लिए एक औपचारिक आवेदन जमा किया जाता है, जिसमें कार्यक्रम की तारीख, समय, उद्देश्य और अनुमानित भीड़ की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा जिस स्थान पर प्रदर्शन होना है, वहां के संबंधित प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त करना आवश्यक होता है।
पुलिस प्रशासन आयोजकों से एक अधिकृत संपर्क व्यक्ति का विवरण भी मांगता है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था या किसी आपात स्थिति में सीधे समन्वय किया जा सके। साथ ही प्रदर्शन के दौरान भीड़ को व्यवस्थित रखने वाले स्वयंसेवकों की सूची और उनके संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराने होते हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी जाती है। सामान्य तौर पर धरना या विरोध कार्यक्रम सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक ही आयोजित किया जा सकता है। निर्धारित समय समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों को स्थल खाली करना होता है।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों की संख्या पर भी नियंत्रण रखा जाता है। आमतौर पर एक निश्चित सीमा से अधिक लोगों को अनुमति नहीं दी जाती ताकि क्षेत्र में अव्यवस्था या सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।
इसके अलावा प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए। किसी भी प्रकार के हथियार, लाठी-डंडे या हिंसा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं साथ लाना प्रतिबंधित है। आयोजकों की यह भी जिम्मेदारी होती है कि सड़कें अवरुद्ध न हों और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।
यही वजह है कि जंतर-मंतर पर आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार तो है, लेकिन इसके लिए प्रशासनिक मंजूरी और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है।
(Photo : AI Generated)




