हिमाचल प्रदेश में राज्य और केंद्र कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के बीच अंतर को लेकर मामला अब अदालत पहुंच गया है। इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की अदालत में हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित हुआ। याचिकाकर्ता, जो शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, ने अपनी सेवा से जुड़ा विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि वे 1998 में लिपिक के रूप में नियुक्त हुए थे और समय-समय पर पदोन्नति पाते हुए अब सुपरिटेंडेंट ग्रेड-2 के पद तक पहुंचे हैं।
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार वर्तमान में कर्मचारियों को 45 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दे रही है, जो जुलाई 2023 से लागू है। वहीं केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए प्रदान कर रही है, जिससे दोनों के बीच 15 प्रतिशत का अंतर बन गया है।
इस अंतर के कारण कर्मचारियों को हर महीने लगभग 10 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि राज्य कर्मचारियों को भी केंद्र के समान महंगाई भत्ता दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई चार जून को निर्धारित की गई है।


