भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दो सप्ताह तक आई गिरावट के बाद राहत देखने को मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 29 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश के फॉरेक्स रिजर्व में 938 मिलियन डॉलर का इजाफा दर्ज किया गया। इसके साथ कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 682.321 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।
इससे पहले वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 7.511 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई द्वारा किए गए लगभग 5 अरब डॉलर के करेंसी स्वैप के बावजूद रिजर्व में यह बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है।
विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा योगदान फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) का रहा। समीक्षा सप्ताह के दौरान एफसीए में 3.116 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिससे इसका कुल स्तर 546.148 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले सप्ताह में इसमें 2.872 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई थी। विदेशी मुद्रा आस्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राओं के मूल्य परिवर्तन का असर भी शामिल होता है।
दूसरी ओर, सोने के भंडार के मूल्य में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में नरमी के कारण आरबीआई के गोल्ड रिजर्व का मूल्य 2.186 अरब डॉलर घटकर 112.600 अरब डॉलर रह गया। मार्च 2026 के अंत तक केंद्रीय बैंक के पास 880.52 टन सोना मौजूद था, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7 प्रतिशत हिस्सा है।
स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) के स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 18.747 अरब डॉलर पर स्थिर बना रहा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व की वैल्यू में 8 मिलियन डॉलर की मामूली कमी आई, जिसके बाद यह घटकर 4.826 अरब डॉलर रह गया।
गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी 2026 में 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। मौजूदा बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि हालिया दबाव के बावजूद देश का बाहरी वित्तीय मोर्चा अभी भी मजबूत बना हुआ है।




