पंजाब निकाय चुनाव में छंटनी के बाद 10096 प्रत्याशी योग्य, 700 से ज्यादा नामांकन खारिज; हजारों प्रत्याशी मैदान में कायम

पंजाब निकाय चुनाव में छंटनी के बाद 10096 प्रत्याशी योग्य, 700 से ज्यादा नामांकन खारिज; हजारों प्रत्याशी मैदान में कायम

पंजाब में होने जा रहे निकाय चुनावों को लेकर चुनावी प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा नामांकन पत्रों की जांच पूरी करने के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को चुनाव मैदान के लिए योग्य घोषित किया गया है, जबकि सैकड़ों आवेदन विभिन्न कारणों से खारिज कर दिए गए। अब नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी, जिसके बाद चुनावी मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

राज्य चुनाव आयोग के अनुसार नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायतों की कुल 105 सीटों के लिए 10,809 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। स्क्रूटनी के बाद 10,096 उम्मीदवारों को वैध पाया गया, जबकि 713 आवेदन रद्द कर दिए गए। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि जिन नामांकन पत्रों में दस्तावेजी कमी, नियमों का उल्लंघन या अन्य तकनीकी त्रुटियां पाई गईं, उन्हें नियमानुसार खारिज किया गया।

आठ नगर निगमों के चुनाव के लिए सबसे अधिक राजनीतिक सक्रियता देखने को मिली। इन सीटों के लिए कुल 2,154 आवेदन दाखिल किए गए थे, जिनमें से 151 नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए। इसके बाद 2,003 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बने हुए हैं। वहीं नगर कौंसिल चुनावों के लिए 7,334 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 447 रद्द कर दिए गए। अब इस श्रेणी में 6,887 प्रत्याशी मुकाबले में हैं।

नगर पंचायतों की बात करें तो कुल 1,321 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। जांच के दौरान 115 आवेदन खारिज होने के बाद अब 1,206 उम्मीदवार चुनाव लड़ने के योग्य पाए गए हैं। हालांकि अंतिम संख्या नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

नामांकन रद्द होने को लेकर कई जिलों में राजनीतिक विवाद भी देखने को मिल रहे हैं। विपक्षी दलों ने कुछ स्थानों पर प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किए हैं। कई नेताओं का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों के नामांकन तकनीकी आधार पर अनुचित तरीके से खारिज किए गए। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया चुनाव नियमों के तहत पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है।

पंजाब में निकाय चुनावों के लिए मतदान 26 मई को होगा, जबकि 29 मई को मतगणना और परिणाम घोषित किए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए लगभग 35 हजार कर्मचारियों और करीब इतने ही सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जा रही है।

इस बार चुनाव आयोग ने मतदान बैलेट पेपर के जरिए कराने का निर्णय लिया है, जिस पर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने से प्रक्रिया धीमी और विवादित हो सकती है, जबकि आयोग का दावा है कि सभी आवश्यक सुरक्षा और पारदर्शिता उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे।

चुनावी माहौल के बीच अब सभी राजनीतिक दल अंतिम उम्मीदवारों की सूची का इंतजार कर रहे हैं। नामांकन वापसी के बाद कई सीटों पर मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है और कई स्थानों पर सीधा राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल सकता है।