भारत और न्यूजीलैंड ने आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब भारत के लगभग सभी उत्पादों को वहां बिना टैरिफ के प्रवेश मिलेगा।
इस डील से खासतौर पर टेक्सटाइल, फुटवियर, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे सेक्टर को मजबूती मिलेगी। इन क्षेत्रों में काम करने वाले एमएसएमई को भी नए अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार के मौके बढ़ने की उम्मीद है।
पहले न्यूजीलैंड भारत से आने वाले कुछ उत्पादों जैसे सिरेमिक, कालीन और ऑटो पार्ट्स पर 10% तक शुल्क लगाता था, लेकिन अब यह बाधा हट जाएगी। इससे भारतीय कंपनियां अन्य देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। वहीं, भारत को भी इस समझौते के तहत लकड़ी, कोकिंग कोयला और धातु स्क्रैप जैसे कच्चे माल सस्ते में मिलेंगे, जिससे मैन्युफैक्चरिंग की लागत घटेगी।
हालांकि, भारत ने अपने कुछ अहम और संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है। इनमें डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, पनीर, क्रीम), कुछ कृषि उत्पाद (प्याज, चना, मक्का, मटर), चीनी, खाद्य तेल, कृत्रिम शहद और रक्षा से जुड़े सामान शामिल हैं। इन पर किसी तरह की छूट नहीं दी गई है ताकि घरेलू उद्योग सुरक्षित रह सकें।
दूसरी तरफ, भारत न्यूजीलैंड के करीब 70% उत्पादों पर टैरिफ में छूट देगा, जो कुल व्यापार का लगभग 95% हिस्सा कवर करता है। कुछ उत्पादों पर शुल्क तुरंत खत्म किया जाएगा, जबकि बाकी पर 3 से 10 साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से कटौती होगी। न्यूजीलैंड से आने वाले जिन उत्पादों को भारत में राहत मिलेगी, उनमें वाइन, दवाएं, पॉलिमर, एल्यूमिनियम और स्टील शामिल हैं। वहीं, मनुका हनी, सेब और कीवी जैसे खास उत्पादों को कोटा प्रणाली के तहत सीमित छूट दी जाएगी।
इस समझौते में निवेश को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर तक निवेश को आसान बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही, अगर तय निवेश लक्ष्य पूरे नहीं होते, तो संतुलन बनाए रखने के लिए एक विशेष प्रावधान भी रखा गया है।
गौरतलब है कि 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल व्यापार करीब 2.4 अरब डॉलर रहा था, जिसे अब इस समझौते से और बढ़ने की उम्मीद है।




