सुखना लेक, जिसे चंडीगढ़ की जीवनरेखा माना जाता है, अब जलीय जीवन को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठा रही है। झील में 10,000 से अधिक मछलियों के पालन-पोषण की पहल शुरू की गई है, जिसकी शुरुआत विश्व मछली प्रवास दिवस (21 अप्रैल) के अवसर पर की गई।
पशुपालन एवं मत्स्य विभाग द्वारा झील में मृगल, रोहू और कतला जैसी स्वदेशी प्रजातियों के हजारों मछली बीज डाले गए। इस कदम का उद्देश्य जलीय पारिस्थितिकी को संतुलित बनाए रखना और जैव विविधता को संरक्षित करना है।
सुखना झील न केवल जलीय जीवों का महत्वपूर्ण निवास स्थल है, बल्कि सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण है। ये पक्षी बड़ी मात्रा में मछलियों के शिशुओं पर निर्भर रहते हैं, जिससे इस पहल का महत्व और बढ़ जाता है।
झील के संरक्षण के लिए अधिकारियों द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। झील के नीचे स्थित सरकारी मत्स्य बीज फार्म में उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार किए जाते हैं, जिससे प्राकृतिक प्रजनन को भी प्रोत्साहन मिलता है।


