शिरोमणि अकाली दल से जुड़े नेता और हल्का दाखा इंचार्ज जसकरणजीत सिंह देओल के खिलाफ दर्ज हाई-प्रोफाइल पॉक्सो मामले में नया कानूनी मोड़ सामने आया है। अदालत के विस्तृत आदेश सामने आने के बाद साफ हो गया है कि मामले को न तो समाप्त किया गया है और न ही आरोपी को किसी प्रकार की कानूनी राहत या क्लीन चिट मिली है। अदालत ने केवल गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों पर टिप्पणी की है और पुलिस को नियमों के अनुरूप कार्रवाई दोबारा करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था, जिसके कारण उस समय की कार्रवाई को तकनीकी आधार पर अवैध माना गया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे मामले के आरोप कमजोर नहीं होते। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि गिरफ्तारी से जुड़ी कमियों को दूर कर आरोपी को दोबारा हिरासत में लेकर मामले की गहन जांच सुनिश्चित की जाए।
इस घटनाक्रम के बाद अब पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इतने संवेदनशील मामले में कानूनी प्रक्रिया में हुई चूक केवल लापरवाही थी या इसके पीछे किसी प्रकार का दबाव अथवा प्रभाव काम कर रहा था। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो सकती है।
राजनीतिक विवाद तब और बढ़ गया जब हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि अदालत ने जसकरणजीत सिंह देओल को राहत देते हुए मामला लगभग खत्म कर दिया है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए राज्य सरकार और पुलिस पर आरोप लगाए थे। लेकिन अदालत के आदेशों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने अकाली दल को ही घेरना शुरू कर दिया है।
यह मामला मोहाली के मटौर थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। शिकायत में करीब साढ़े 14 वर्ष की नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन शोषण, मारपीट, धमकी और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और जांच एजेंसियों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
अदालती टिप्पणियों के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है। कई संगठनों ने मांग की है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय निष्पक्ष और तेज जांच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि गंभीर मामलों में राजनीतिक संरक्षण की कोशिशें न्याय व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि मामले की जांच अब और अधिक सतर्कता और कानूनी मजबूती के साथ आगे बढ़ाई जाएगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी खामी का लाभ न मिल सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने Punjab की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।




