भारतीय विरासत से जुड़ी कई बहुमूल्य वस्तुएं आज भी ब्रिटेन के संग्रहालयों और शाही खजानों में मौजूद हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा कोहिनूर हीरे को भारत लौटाने की मांग ने इस पुराने विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है। उनके बयान के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेज हो गया कि आखिर भारत की और कितनी ऐतिहासिक धरोहरें अब भी विदेशों में हैं।
औपनिवेशिक दौर की विरासत आज भी विदेश में
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से कई महत्वपूर्ण कलाकृतियां, आभूषण, मूर्तियां और पांडुलिपियां बाहर ले जाई गईं। इनमें से अधिकांश वस्तुएं आज ब्रिटेन के प्रमुख संग्रहालयों में सुरक्षित रखी गई हैं। इनका संबंध केवल इतिहास से ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से भी है।
कोहिनूर की कहानी: सत्ता के साथ बदलता मालिक
कोहिनूर हीरा भारतीय इतिहास का सबसे चर्चित रत्न है। यह मुगलों से लेकर अफगान और सिख शासकों के हाथों से गुजरता हुआ अंततः अंग्रेजों के कब्जे में चला गया। महाराजा रणजीत सिंह के निधन के बाद, उनके नाबालिग उत्तराधिकारी दिलीप सिंह के समय अंग्रेजों ने पंजाब पर नियंत्रण स्थापित किया और इस हीरे को अपने साथ ब्रिटेन ले गए। आज यह लंदन के टॉवर में रखा हुआ है।
टीपू सुल्तान से जुड़ी विरासत भी ब्रिटेन में
मैसूर के शासक टीपू सुल्तान से संबंधित कई वस्तुएं भी ब्रिटेन में हैं। उनकी तलवार, अंगूठी और प्रसिद्ध ‘टाइगर मॉडल’ आज भी वहां संरक्षित हैं। यह मॉडल एक बाघ को अंग्रेज सैनिक पर हमला करते हुए दिखाता है और औपनिवेशिक विरोध का प्रतीक माना जाता है।
बौद्ध और प्राचीन कला के नमूने
आंध्र प्रदेश के अमरावती स्तूप की मूर्तियां और बिहार से मिली विशाल कांस्य बुद्ध प्रतिमा भी ब्रिटेन में रखी गई हैं। ये भारतीय कला और बौद्ध विरासत के उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं। इनकी वापसी को लेकर भारत समय-समय पर मांग उठाता रहा है।
धार्मिक मूर्तियां और सांस्कृतिक भावनाएं
भारत की देवी-देवताओं से जुड़ी कई मूर्तियां भी ब्रिटेन में मौजूद हैं। ये केवल कलाकृतियां नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का हिस्सा हैं। इनके विदेश में होने से कई लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील बन जाता है।
दुर्लभ ग्रंथ और शाही वस्तुएं
ब्रिटेन के संग्रहालयों में संस्कृत और फारसी की दुर्लभ पांडुलिपियां भी संरक्षित हैं। इसके अलावा मुगल सम्राट शाहजहां से जुड़ा एक कीमती वाइन कप भी वहां मौजूद है, जो उस दौर की शाही जीवनशैली को दर्शाता है।
वापसी की मांग और ब्रिटेन का पक्ष
भारत लंबे समय से इन धरोहरों को वापस लाने की मांग करता रहा है। सरकार और इतिहासकार इसे न्याय और सांस्कृतिक अधिकार का मामला मानते हैं। वहीं, ब्रिटेन का कहना है कि वे इन वस्तुओं का बेहतर संरक्षण कर रहे हैं और इन्हें वैश्विक धरोहर के रूप में देखा जाना चाहिए।
क्या निकल सकता है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का हल बातचीत और समझौते से निकाला जा सकता है। कुछ वस्तुएं स्थायी रूप से लौटाई जा सकती हैं, जबकि कुछ को लंबी अवधि के लिए भारत को सौंपा जा सकता है। दुनिया के कई देश अपनी सांस्कृतिक संपत्ति वापस पाने में सफल रहे हैं, जिससे भारत की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं।
सिर्फ वस्तुएं नहीं, पहचान का सवाल
यह विवाद केवल कीमती चीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास, सम्मान और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। कोहिनूर इस बहस का प्रतीक जरूर है, लेकिन असली मुद्दा उससे कहीं बड़ा है, क्या किसी देश की विरासत उसी देश में होनी चाहिए जहां से वह उत्पन्न हुई?
आने वाले समय में इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और गंभीर चर्चा होने की संभावना है।
(Photo : AI Generated)




