बढ़ते कर्ज के दबाव में हिमाचल सरकार, खर्च चलाने के लिए फिर लेगी 500 करोड़ का कर्ज

बढ़ते कर्ज के दबाव में हिमाचल सरकार, खर्च चलाने के लिए फिर लेगी 500 करोड़ का कर्ज

आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही Himachal Pradesh की सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व वाली सरकार ने वित्तीय दबाव को संभालने के लिए 500 करोड़ रुपये का नया ऋण जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। वित्त विभाग ने इसके लिए जरूरी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली हैं।

राज्य की आर्थिक स्थिति पिछले कुछ समय से लगातार दबाव में बनी हुई है। खास तौर पर केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद सरकार की वित्तीय चुनौतियां और बढ़ गई हैं। इसी कारण सरकार को नियमित खर्च और देनदारियां पूरी करने के लिए बार-बार ऋण का सहारा लेना पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार इससे पहले भी 900 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के लिए आवेदन कर चुकी है। अब नए 500 करोड़ रुपये के ऋण के साथ राज्य पर कुल देनदारी और बढ़ने की संभावना है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश पर करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बताया जा रहा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का विषय बन चुका है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश सरकार को हर महीने लगभग 2,800 करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध वित्तीय देनदारियों का भुगतान करना पड़ता है। इसमें कर्मचारियों के वेतन पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि पेंशन भुगतान के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये और मूलधन की अदायगी के लिए करीब 300 करोड़ रुपये हर महीने चाहिए होते हैं।

वित्तीय दबाव इतना बढ़ गया है कि सरकार पहले ही कई सख्त कदम उठा चुकी है। राज्य सरकार ने मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया है। जानकारी के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में 20 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक वेतन छह महीने के लिए स्थगित किया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला केवल अस्थायी वित्तीय प्रबंधन के तहत लिया गया है।

सरकार को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और राजस्व संग्रह बढ़ने के बाद रोकी गई वेतन राशि को दोबारा जारी किया जा सकेगा। हालांकि विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहा है और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जता रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संसाधनों और बढ़ती देनदारियों के बीच हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य के लिए वित्तीय संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पर्यटन, जलविद्युत और कर संग्रह बढ़ाने जैसे विकल्पों पर सरकार का फोकस बढ़ सकता है, ताकि भविष्य में ऋण पर निर्भरता कम की जा सके।