जालंधर में बढ़ा सियासी तापमान, विधायक रमन अरोड़ा ने पुलिस सुरक्षा लौटाने का किया ऐलान

जालंधर में बढ़ा सियासी तापमान, विधायक रमन अरोड़ा ने पुलिस सुरक्षा लौटाने का किया ऐलान

विधायक रमन अरोड़ा द्वारा अपनी सरकारी सुरक्षा वापस करने के ऐलान के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। जालंधर सेंट्रल से आम आदमी पार्टी के विधायक रमन अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर कहा कि वह ऐसी पुलिस सुरक्षा अपने साथ नहीं रखना चाहते, जो धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति देने में बाधाएं पैदा करे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

रमन अरोड़ा ने फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि जालंधर में हर साल आयोजित होने वाली बालाजी चौकी को इस बार प्रशासनिक स्तर पर अनुमति नहीं दी जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब निजी रंजिश और राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है। विधायक ने कहा कि वह वर्षों से श्रद्धा और सामाजिक सहयोग के साथ यह धार्मिक कार्यक्रम करवाते आ रहे हैं, लेकिन इस बार जानबूझकर रुकावटें खड़ी की जा रही हैं।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब धार्मिक आयोजनों को ही समर्थन नहीं मिल रहा, तब ऐसी सुरक्षा का कोई मतलब नहीं रह जाता। इसी वजह से उन्होंने अपने गनमैन और पुलिस सुरक्षा लौटाने का निर्णय लिया है। उनके इस फैसले को लेकर समर्थकों और विरोधियों दोनों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

सूत्रों के अनुसार विधायक के इस कदम को केवल धार्मिक कार्यक्रम से जोड़कर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे प्रशासन और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान से भी जोड़ा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक तौर पर सुरक्षा लौटाने की घोषणा करना एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में Punjab Vigilance Bureau ने भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोपों में रमन अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। उस समय उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई थी। बाद में कानूनी प्रक्रिया और परिस्थितियों में बदलाव के बाद करीब डेढ़ वर्ष पश्चात उन्हें दोबारा सुरक्षा उपलब्ध करवाई गई थी।

अब एक बार फिर सुरक्षा लौटाने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

जालंधर में बालाजी चौकी को लेकर विवाद के बीच स्थानीय धार्मिक संगठनों और समर्थकों ने भी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। कई लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, जबकि कुछ लोग इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं।

फिलहाल विधायक रमन अरोड़ा की फेसबुक पोस्ट के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।