आपका पूजा वाला घी जानवरों की चर्बी से बना:यूपी के स्लाटर हाउसों से भगवान के दीपक तक पहुंच रहा, कैमरे में देखिए प्रोसेस

आपका पूजा वाला घी जानवरों की चर्बी से बना:यूपी के स्लाटर हाउसों से भगवान के दीपक तक पहुंच रहा, कैमरे में देखिए प्रोसेस ‘ये चर्बी वाला तेल (जानवरों की पिघली हुई चर्बी) है, जो जम गई है, इसे गर्म किया, अब इसमें थोड़ा-सा देसी घी मिलाएंगे, इससे देशी घी वाली खुशबू आएगी। अब ये तैयार है। डिब्बों में पैक कर बाजार में बेच सकते हैं। ये हम 90 रुपए किलो देंगे। बाजार में 150 से 200 रुपए किलो बिकता है। ये यूपी सहित दूसरे प्रदेशों में भी जाता है। पूरे देश में ये ही चल रहा है।’ ये कहना है पूजा में उपयोग होने वाला घी बनाने वालों का। ये जानवरों की पिघली हुई चर्बी से घी तैयार कर रहे हैं। ये यूपी में खूब बिक रहा है। इसकी 2 वजह हैं। पहली- बड़े से बड़े शॉपिंग मॉल से लेकर छोटी से छोटी दुकान पर ये आसानी से मिल रहा है। दूसरी- खाने वाले देसी घी की तुलना में इसकी कीमत आधी से भी कम है। इसलिए लोग इसे बगैर सोचे-समझे खरीद रहे हैं और भगवान के सामने घी का दीपक लगाकर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। यूपी में ये अपवित्र घी कहां बन रहा है? कैसे बन रहा है? जानवरों की चर्बी कहां से आ रही है? बस, इन्हीं सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने 15 दिन तक इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… कुछ महीने पहले आगरा के एत्मादपुर में पुलिस ने 3 घरों से देसी घी लिखे टीन के 82 डिब्बे जब्त किए। यहां जानवरों की चर्बी और हडि्डयां भी मिलीं। जांच में सामने आया कि यहां गाय, भैंसों को मारकर उनकी चर्बी से घी बनाकर ब्रांडेड कंपनी के देसी घी के नाम से बेचा जा रहा था। हमने आगरा से इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। यहां से पता चला कि कानपुर और उन्नाव के स्लाटर हाउस में ये काम धड़ल्ले से हो रहा है। हम लखनऊ से 90 किमी दूर कानपुर–उन्नाव की बाॅर्डर पर बिजलामऊ पहुंचे। यहां ऊबड़खाबड़ और कांटेदार झाड़ियों वाले रास्ते मिले। 1 किलोमीटर के दायरे में एक दर्जन चिमनियां धुआं उगल रही थीं। यहां जानवरों के चमड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े कर खाद बनाई जा रही थी। किसी बाहरी व्यक्ति का कारखानों में प्रवेश प्रतिबंधित था। यहां हमारी कहानी का पहला किरदार मिला– राहुल। इससे हमारी बातचीत शुरू हुई… रिपोर्टर: यहां चर्बी वाला घी कहां मिलता है? राहुल: वो तो बंथर में। यहां तो खाद बनती है। रिपोर्टर: बंथर कहां है? राहुल: यहां से उन्नाव रोड पर 3 किलोमीटर पर है, यूपीएसआईडी (Uttar Pradesh State Industrial Development Authority) में। रिपोर्टर: कोई है जो काम करा दे? राहुल: हां, एक आदमी है जो ये सब काम करता है। बात करते हैं उससे। (किसी व्यक्ति को फोन लगाकर) हेलो… हमारे पास व्यापारी हैं, जो चर्बी वाले घी का काम करना चाहते हैं, कोई सिस्टम हो तो करवा दीजिए। पूजा वाला घी का काम करेंगे ये। हम नंबर दिए दे रहे हैं। ये आपसे बात कर लेंगे। रिपोर्टर: क्या नाम है उसका? राहुल: आतिफ भाई… ये नंबर है उसका। वो आपका काम करा देगा। रिपोर्टर: ठीक है। यहां से हम तत्काल निकलना चाहते थे, क्योंकि चारों ओर चमड़ा जलने की बदबू आ रही थी। हम मेन रोड पर पहुंचे और आतिफ को फोन मिलाया। रिपोर्टर: राहुल ने आपका नंबर दिया है। आतिफ: जी हां, फोन किया था उसने। रिपोर्टर: राहुल ने जो बताया है, वही वाला घी चाहिए। आतिफ: घी बनाने के लिए कायदे से ये आइटम (चर्बी) तो है ही नहीं। बस ये है कि ये हिन्दुस्तान है। यहां सब कुछ होता है। रिपोर्टर: हमको साबुन वाला नहीं, वही (पूजा) वाला चाहिए। आतिफ: साबुन वाले में हल्की महक होगी। वो (पूजा) वाले में महक नहीं होगी। बस यही अंतर है। और महक ऐसी होगी कि आपको उसमें यह नहीं पता चलेगा कि ये चर्बी वाला है। वो महक थोड़ा दूसरे टाइप की होगी। रिपोर्टर: यानी कि हमको वहां से केवल गली हुई चर्बी मिलेगी। आतिफ: हां, गली हुई चर्बी मिलेगी। आपको उसको सिर्फ पैक करना होगा। हम लाेग भी टैलो का काम करते हैं। पैकिंग में मार्जिन है। हम आपको विकास भाई का नंबर देंगे। वो रिसेल का काम करते हैं। वो स्लाटर हाउस से टैलो लेकर पैकिंग करके सप्लाई करते हैं। आपको कुछ नहीं करना है, उनसे माल लेकर बेचना रहेगा। रिपोर्टर: ठीक है तो कल मिलो आप। आतिफ: सुनो, विकास भाई का नंबर दे देते हैं आपको। उनसे बना बनाया माल मिल जाएगा। ले जाकर बेचिए। हम कल उनसे आपकी बात करा देंगे। आप कल आओ… मिलो। उनसे बात करा देंगे। आपका आसानी से काम हो रहा है कि यहां आना भी न पड़े और आपको माल भी मिल जाए। रिपोर्टर: अच्छा। आतिफ: हम लोग भी टैलो का काम करते हैं, जो साबुन वाला है। 25 हजार लीटर हफ्ते में टैंकर बेचते हैं। अगले दिन भी आतिफ सामने नहीं आया अगले दिन हम आतिफ से मिलने पहुंचे। फोन लगाया लेकिन वह सामने नहीं आया। जब शाम को हमने मैसेज किया तो उसने जुनैद का नंबर दिया। जुनैद में एक घंटे बाद हमको चांदपुर इंडस्ट्रियल एरिया में रुस्तम फैक्ट्री के पास बुलाया। हमने एक गैलेन (डिब्बा) खरीदा और शाम सात बजे इंडस्ट्रियल एरिया पहुंचे। जुनैद आगे और हम पीछे चल रहे थे। रास्ते में जुनैद ने दिलीप को बाइक पर बैठाया। वे दोनों हमें एक फैक्ट्री पर ले गए। जुनैद और दिलीप ने गेट पर किसी से बात की। अंदर से बताया कि टैलो मिल जाएगा, लेकिन क्वालिटी ठीक नहीं है। दोनों दूसरे स्लाटर हाउस ले गए। यह बहुत बड़ा था। यहां मंसूर से हमारी बात हुई। रिपोर्टर: मंसूर भाई आप हैं? मंसूर: जी भैया। रिपोर्टर: टैलो चाहिए। मंसूर: ठीक है, अभी दूसरी जगह से दिला देते हैं। रिपोर्टर: यहां से नहीं मिल पाएगा? मंसूर: यहीं का तेल दूसरी जगह से मिलेगा। रिपोर्टर: दरअसल, हमको मिल रहा था पर वह ओरिजिनल नहीं था। मंसूर: इस टाइम मुश्किल है। ये जम जाता है तो इसे गर्म करना पड़ता है। आप मॉर्निंग में ले लीजिएगा। रिपोर्टर: देखिए, अभी दिलवा दीजिए। मंसूर: ठीक है, अभी वो टैंकर लेकर जाएगा। उसको बोल दिया हूं। आप जाकर ले लीजिएगा। स्टैंडर्ड फ्रोजन स्लाटर फैक्ट्री के अंदर से जानवरों की चर्बी से बने घी का टैंकर निकला और एक दूसरे स्लाटर हाउस पहुंचा। ड्राइवर शकील गेट खोलकर बाहर आया। शकील: आपकी भाई से बात हुई है? रिपोर्टर: हां, मंसूर ने आपके मालिक शमशाद भाई से बात कर ली है। शकील: ठीक है, वही जानना चाहते हैं। रिपोर्टर: आप जो पैसा कहेंगे, वो दे देंगे। शकील: 77 रुपए किलो का रेट लगेगा। रिपोर्टर: बढ़िया वाला ही रहेगा न? शकील: उसमें कोई दिक्कत होगी तो हमारा गला पकड़ लीजिएगा। हमारे पास यही माल आता है। चाहें टैंकर से भेजें या टीना में भरें। रिपोर्टर: जम तो जाएगा न? शकील: अगर न जमे तो कहिएगा। गारंटी दे रहा हूं। पन्नी में लाकर तौलें। रिपोर्टर: नहीं, गैलन (डिब्बे) में लाकर दीजिए। शकील: ठीक है, ये टैंकर वाला माल गर्म है। इसका बिल बाउचर बन गया है। ये बाहर जाएगा। यही माल टीन में रखा है। उसी को गर्म करके दे रहे हैं। गार्ड बोला– टैलो के बारे में कुछ नहीं बता सकते शकील चर्बी वाला घी लेने चला गया। गार्ड रुम में गार्ड से हमने पूछा– यह टैलो कहां जाएगा? उसने कहा– इस बारे में न तो हम कुछ बता सकते हैं, न ही बताने का परमिशन है। जो भी बात करना है, आप मालिक से कर सकते हैं। मतलब इसके विषय में बातचीत नहीं कर सकते। ये क्या है, कहां से आता है, कहां जाता है। इस विषय में कोई जानकारी नहीं दे सकते। ये ऑर्डर नहीं है हमको। इसी बीच शकील चर्बी वाला घी लेकर आ गया। अपना ब्रांड बनाकर बेचें चर्बी वाला घी शकील: ये लीजिए घी। रिपोर्टर: कितना होगा? शकील: यही, साढ़े छह किलो होगा। माल बहुत अच्छा है। चाहें तो आप चलकर देख लीजिए। रिपोर्टर: हां, चलिए… पास से देख लें। शकील: ये देखिए। कितना बढ़िया माल है। अब ये पूरी तरह से तैयार है। रिपोर्टर: यानी अपने ब्रांड में ले जाकर बेचें? शकील: हां, अपने डिब्बे में पैक कर लेना। रिपोर्टर: यह माल कहां जाएगा? शकील: यह टैंकर असम जाएगा। रिपोर्टर: अब इसमें कुछ डालने की जरूरत है कि नहीं? शकील: नहीं, एकदम तैयार है। यदि इससे थोड़ा और अच्छा करना है तो इसमें हाइड्रोजन डाल सकते हैं। ये जितना है, इसमें प्लास्टिक के गिलास से एक गिलास बहुत है। रिपोर्टर: कहां मिलता है? शकील: हम लोग कानपुर से लाते हैं। दो नंबर वाले माल में डालने के लिए लाते हैं। रिपोर्टर: इसमें कुछ और डालना होगा। शकील: नहीं एकदम तैयार है। इसमें कोई जरूरत ही नही है। अपनी कंपनी के ब्रांड में डालकर बेचें। अब सबसे अहम सवाल… चर्बी से पूजा का घी कैसे बनता है? आइए जानते हैं शकील से साढ़े छह किलो चर्बी वाला घी यानी टैलो लेकर हम जाजमऊ के एक घर ले गए। यहां मुजाहिद ने पूजा का घी बनाने का तरीका बताया। उसने चेहरे पर नकाब बांध रखा था। मुजाहिद: ये चर्बी वाला तेल है, जो जम गया है। इसे गर्म कर रहे हैं। रिपोर्टर: गर्म करके क्या करोगे? मुजाहिद: गर्म करके इसमें देसी घी मिलाएंगे। रिपोर्टर: देशी घी क्यों? मुजाहिद: देशी घी डाल देने से खुशबू देशी घी जैसे आने लगेगी। रिपोर्टर: कितना डालना होता है? मुजाहिद: इतने (छह किलो) में ढाई सौ ग्राम। रिपोर्टर: और इसमें क्या-क्या डालेंगे? मुजाहिद: इसमें पहले से ही सबकुछ पड़ा हुआ है। रिपोर्टर: अब क्या करेंगे? मुजाहिद: इसको अब डिब्बों में भर देंगे। रिपोर्टर: इस पीछे वाले कमरे में भी आपने माल रखा है क्या? मुजाहिद: माल हमारा सप्लाई हो चुका है। यह सैंपल के तौर पर है। रिपोर्टर: हमको कितने में मिल जाएगा? मुजाहिद: 90 रुपए किलो मिल जाएगा। बाहर हमारा माल 150 से 200 रुपए किलो बिकता है। रिपोर्टर: यह माल कहां-कहां तक जाता है? मुजाहिद: कानपुर, उन्नाव, लखनऊ के अलावा दूसरे जिलों और प्रदेशों में। पूरे देश में ये ही चल रहा है। 100 ग्राम से लेकर 1 लीटर तक का पैक आपको मिल जाएगा। चलिए, अब दुकानों पर… जहां ये बिक रहा लखनऊ के यहियागंज मार्केट में जब हमने व्यापारियों से पूछा कि चर्बी वाला घी पूजा के लिए क्यों बेच रहे हैं तो उनका कहना था– हम लोग बेचना नहीं चाहते, लेकिन लोग पूजा के लिए सस्ता वाला घी मांगते हैं। तेजाबी चर्बी से कैंसर का खतरा राजकीय नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल काॅलेज (एनएचएमसी), लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. डीके सोनकर का कहना है कि तेजाबी चर्बी से बनने वाला घी खाने से उल्टी, दस्त, एनीमिया, चर्मरोग हो सकते हैं। चर्बी में केमिकल रिएक्शन से फीनॉल एवं एपॉक्सी बन जाता है। इसमें स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक ट्रांस फैट, एल्केनॉल भी होते हैं। प्रदूषण की वजह बन रहा चर्बी वाला घी लखनऊ विवि के रसायन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर भरत कुमार का कहना है कि जानवरों की चर्बी या वसा को जलाने पर कार्बन डाईऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के साथ-साथ डाई ऑक्सिन जैसे परसिसटेंट एनवायरमेंटल पॉल्यूटेंट्स (Persistent Environmental Pollutants) निकलते हैं। ये सभी प्रदूषक मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माने गए हैं। डाई ऑक्सिन विशेष रूप से खतरनाक रासायनिक यौगिक है, जो जानवरों की वसा में पाया जाता है। यह लंबे समय तक पर्यावरण तथा मानव शरीर में बने रहते हैं। इससे कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अब पढ़िए, क्या बोल रहे हैं अफसर उन्नाव में स्लॉटर हाउस से चर्बी वाला घी बनने के मामले पर भास्कर ने सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त प्रियंका सिंह से बातचीत की। जब उनसे पूछा कि स्लॉटर हाउस से चर्बी वाला घी निकलता है, आप कार्रवाई क्यों नहीं कर रहीं? इस पर उन्होंने जवाब दिया मैं अभी नई आई हूं। ———————- भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़ें- आपकी पूजा में केमिकल वाला नकली चंदन:यूपी में खिन्नी की लकड़ी पर परफ्यूम; ऐसे 100 कारखाने, कैमरे में देखिए ठगी ये लकड़ी होती है… खिन्नी की, इसमें कोई महक नहीं होती। इसमें कंपाउंड (केमिकल मिक्सचर) मिलाया जाता है चंदन का… फिर यह महकती है चंदन जैसी। जब जलइयो चंदन-सी खुशबू होगी। अगर इसमें असली चंदन की लकड़ियां मिला दें, तो पहचानना मुश्किल हो जाता है। हम ही लोग पहचान पाते हैं। ये हैं यूपी के चंदन के बड़े कारोबारी, लेकिन ये चंदन होता नकली है। पढ़ें पूरी खबर महिलाएं कागजों पर ‘नेता’, कुर्सी पर पति का कब्जा:भास्कर टीम मिलने पहुंची तो पति बोले- हम ही सबकुछ संवैधानिक पदों पर महिलाओं को आरक्षण देने के बाद महिलाएं कितनी एक्टिव हुई हैं? क्या ये अपने क्षेत्र का काम खुद संभाल रही हैं? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने कुशीनगर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर में 10 दिन तक इन्वेस्टिगेशन किया। हम कुशीनगर से 25 किमी दूर सेवरही ब्लॉक पहुंचे। ऑफिस में भीड़ थी। अंदर गए तो महिला ब्लॉक प्रमुख अनु तिवारी की कुर्सी खाली थी। पढ़िए पूरी खबर मंत्री-विधायकों के गांवों में भी नहीं पहुंचा ‘हर घर जल’:विधायक की मां हैंडपंप से भर रहीं पानी; यूपी के जलशक्ति मंत्री का गांव भी प्यासा ‘रामप्यारी देवी। उम्र 75 साल, लेकिन जोर लगाकर हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर। रामप्यारी देवी कोई आम महिला नहीं। हमीरपुर के भाजपा विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति की मां हैं। इनके घर में जल जीवन मिशन की टोटी है, लेकिन पानी नहीं। पौथिया बुजुर्ग गांव विधायक डॉ. मनोज प्रजापति का पैतृक गांव है। सरकारी रिकॉर्ड में यहां जल जीवन मिशन का काम 100% हो गया है। अफसरों का दावा है कि यहां हर घर में पानी आ रहा है। पढ़ें पूरी खबर

संजय निषाद बोले-धनंजय सिंह, ब्रजेश सिंह संरक्षक:मोदी-शाह ही हमारा राष्ट्रीय नेतृत्व, भाजपा को मछुआ समाज को जवाब देना होगा

संजय निषाद बोले-धनंजय सिंह, ब्रजेश सिंह संरक्षक:मोदी-शाह ही हमारा राष्ट्रीय नेतृत्व, भाजपा को मछुआ समाज को जवाब देना होगा निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद ने कहा कि धनंजय सिंह और ब्रजेश सिंह किसी के लिए बाहुबली हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए संरक्षक हैं। निषाद पार्टी को बड़ा और खड़ा करने में उनकी बड़ी भूमिका है, यदि कोई कानूनी अड़चन नहीं हुई तो वह उन्हें चुनाव लड़ने का मौका देंगे। निषाद का कहना है कि मछुआ समाज को अनुसूचित जाति में आरक्षण देने का भाजपा का पुराना वादा है, यदि वादा पूरा नहीं हुआ तो भाजपा को इसका जवाब देना होगा। संजय निषाद ने बिहार चुनाव सहित अन्य मुद्दों पर दैनिक भास्कर से विस्तार से बात की। संजय निषाद ने एक बार फिर दोहराया है कि सरकार में ऐसे अफसर बैठे हैं जो बाहर से खुद को कमल के साथ दिखाते हैं लेकिन अंदर से हाथी और साइकिल वाले हैं। ऐसे अफसरों को चिह्नित कर हटाना चाहिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल : बिहार चुनाव का आगाज हो गया है, आपकी पार्टी की क्या भूमिका रहेगी? संजय निषाद: हम लोग केंद्रीय नेतृत्व से गवर्न होते हैं। जेपी नड्‌डा, अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र के विकास के लिए काम करते हैं। हम 24 कैरेट के राष्ट्रवादी हैं, मुगलों को मौत के घाट उतारने वाले और भगवान राम को पार उतारने वाले लोग हैं। लोकतंत्र में जीत के माध्यम से ही समस्या का समाधान हो सकता है। निषाद समाज की समस्या तब ही दूर होगी जब लोकतंत्र में हमारी जीत होगी। बिहार में भी बहार आए, निषाद समाज को आरक्षण का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है। बिहार के 18 फीसदी निषाद एनडीए के साथ रहेंगे। सवाल: क्या अमित शाह, जेपी नड्‌डा आपका भी राष्ट्रीय नेतृत्व है? संजय निषाद: हमें जॉइन तो जेपी नड्‌डा साहब ने कराया था। हम लोग 2017, 2018 में भाजपा से अलग चुनाव लड़े थे, हम 2019 में भाजपा के साथ आए। हमें तो शीर्ष नेतृत्व जहां कहता है वहीं हम जाते हैं। जितनी भी संवैधानिक समस्याएं थीं चाहे वह राम मंदिर का मुद्दा हो या जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति हो, यह मुद्दे भाजपा ने ही सुलझाए हैं जबकि अन्य दल इन मुद्दों को उलझा रहे थे। सवाल: पिछले दिनों एक आदेश के तहत जातियों का नाम लिखने पर रोक लगाई गई थी, आपने इसका विरोध भी किया था, अब क्या कर रहे हैं? संजय निषाद: निषाद, ठाकुर, ब्राह्मण यदि जाति नहीं लिखेगा तो क्या करेगा, इन्हें जाति मानें या धर्म। अभी क्षत्रिय महासभा का सम्मेलन हुआ था तो कौनसा उन पर मुकदमा हो गया। जाति के नाम पर एक होना चाहिए। जैसे सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट कहती है कि ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण पर मिल्क मैन का कब्जा है, एससी के 22 फीसदी आरक्षण पर लैदर-मैन का कब्जा है। तो अदर मैन कहां जाएगा? यदि धोबी, पासी, वाल्मीकि एकत्रित नहीं हुआ तो क्या करेंगे? केवट, मल्लाह एकजुट नहीं होगा तो क्या करेगा। यदि हाथी और मिल्क-मैन को सभी का हिस्सा खिलाना हो तो इस तरह की रोक लगाएं। सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट कहती है कि यादव और जाटव अपनी संख्या से सौ गुना से अधिक सरकारी नौकरियों पर कब्जा किए हैं। कब्जा वापस लेने के लिए समूह में एकत्रित होना होगा, यदि कब्जा कराना हो तो जाति लिखने पर रोक लगाएं। सरकार को इसके खिलाफ अपील में जाना चाहिए, विचार करना चाहिए। सरकार को इन जातियों के साथ खड़े रहना चाहिए। सवाल: पंचायत चुनाव में निषाद समाज की क्या भूमिका रहेगी? संजय निषाद: पंचायत चुनाव बिना सिंबल का होता है, जब सदस्य जीतकर आते हैं तो ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए गठबंधन करेंगे। सदस्य का चुनाव अलग लड़ेंगे, यदि भाजपा कहेगी तो तालमेल मिलाया जाएगा। सवाल: आप कहते हैं कि सरकार में सपा के अधिकारी बैठे हैं, तो क्या आपने उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार से बात की? संजय निषाद: अभी देखिए अधिकारियों ने जाति नहीं लिखने का आदेश जारी कर दिया, अभी क्षत्रिय महासभा की बैठक हुई है यदि उन पर मुकदमा दर्ज होता तो प्रदेश का क्षत्रिय तो नाराज हो जाता। अभी जिन जातियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा क्या वह भाजपा के साथ रहेंगी, यह आदेश वही अधिकारी जारी कर रहे हैं जो सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं? जापान में एक लड़की को स्कूल ले जाने और लाने के लिए ट्रेन चलती है लेकिन यहां स्कूल बंद करा दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल चल रहा था तो उसे प्राइवेट को देते थे, अब बच्चे दस किलोमीटर स्कूल जाएंगे। यह छोटे-छोटे निर्णय काफी प्रभावित करते हैं, अधिकारी तो वोट मांगने जाते नहीं हैं, अधिकारी ऐसे निर्णय लेते हैं कि वोट खराब हो जाए। 2020 में चौरीचौरा में दो निषाद ब्लॉक का चुनाव जीते थे, दूसरे दिन प्रमाण पत्र लेने गए तो यादव अधिकारी ने उनका प्रमाण पत्र ही बदल दिया। जब जिले के निषादों ने आंदोलन किया तो वह एसडीएम जेल गया था, जब उससे पूछा गया तो उसने कहा कि सरकार आएगी तो वापस बहाल हो जाएंगे, हमारा काम ही यह है। सोचिए कि यदि इस सोच के लोग तहसील, कचहरी और थाना में रहेंगे तो क्या होगा? अंदर से हाथी-साइकिल है बाहर से कमल है, लेकिन जब वह नुकसान करते हैं तो पता चलता है। सीएम योगी समय-समय पर ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी करते हैं। ऐसे अफसरों को चिह्नित कर हटाना जाहिए। सवाल: आप बीजेपी के नेताओं की बयानबाजी से नाराज थे, क्या कुछ सुधार आया है अब? संजय निषाद: अभी बहुत कुछ सुधार हुआ है। कुछ आयातित नेता हैं, उनका काम ही है कि सत्ता में साथ आना और मलाई खाना। जो नेता सपा के साथ रहा हो तब निषादों का आरक्षण छीन लिया, बहनजी ने जमीन छीन ली थी। अब वही लोग भाजपा को गुमराह कर रहे हैं कि झउआ भर वोट हैं, पौव्वा पीएगा और वोट दिलाएगा। 2019 और 2022 में निषाद ने भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई है। निषाद नेता आरक्षण पर क्यों नहीं बोलते हैं। आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा 45 सीट हार गई, हम भाजपा के सहयोगी हैं इसलिए यह हमारी भी हार है। हमने निषाद का महत्व बढ़ाया है, निषाद पार्टी के कारण उनकी पूछ हो रही है। भाजपा को अपने कैडर लीडर को आगे बढ़ाना चाहिए जो संघ से आया हो। दूसरे दल से आए हैं उन्हें अवसर नहीं दें। सवाल: आपका 2019 से बीजेपी से गठबंधन है, आपकी मांगों को कितना पूरा किया गया जिनके लिए आपने निषाद समाज से बीजेपी को वोट देने की अपील की थी? संजय निषाद: यह भाजपा का खुद का मुद्दा है। मछुआ विजन 2014 में बनाया था। योगी जी खुद आवाज उठाते रहे हैं कि निषाद को एससी में आरक्षण मिलना चाहिए। आज जब भाजपा खुद सरकार में है, मैं तो वकील हूं अपनी मांग करूंगा। जवाब तो भाजपा को देना होगा। पहली बार है कि सीएम योगी ने आरजीआई को पत्र लिखा है। आरजीआई ने कह दिया है कि केवल, मल्लाह, माझी को एससी में आरक्षण दिया। सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय इसका नोडल विभाग है, भाजपा को इसे हल करना चाहिए। हमारा कहना है कि ओबीसी से हमारा नाम खारिज करो और अनुसूचित में जोड़ने का आदेश जारी करो। राज्यपाल और राष्ट्रपति ने भी आदेश दिया है, इसका पालन करना चाहिए। इससे 2027 की जीत आसान हो जाएगी। सवाल: बाहुबली धनंजय सिंह और ब्रजेश सिंह आपके संपर्क में हैं, क्या आपकी पार्टी उन्हें टिकट देगी? संजय निषाद: कांग्रेस, सपा का कितना आतंक था कि वह किसी दूसरे दल को खड़ा नहीं होने देते थे। हमारे लोगों पर मुकदमा दर्ज किया जाता था। यह लोग आपके लिए बाहुबली हो सकते हैं, लेकिन यह लोग उस समय हमारे संरक्षक रहे हैं, हमारी पार्टी को खड़ा-बड़ा करने में उनकी भूमिका है। हमारे समाज को संरक्षण दिया था। यदि उन लोगों ने साथ दिया है कि वह हमारे मित्र हैं। यदि न्यायालय रोकेगा तो रुक जाएंगे, लेकिन लोकतंत्र में मिलना-जुलना जारी रहना चाहिए। वह लोग सरकार के साथ हैं, हम भी सरकार के साथ हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… महिला बोली- कामदगिरि की परिक्रमा से दूर हुई गरीबी:जो मांगते हैं, मिलता है; दिवाली तक चित्रकूट 40 लाख श्रद्धालु आएंगे ‘हम पिछले 16 साल से रोज कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। यह हमारी आस्था का प्रतीक है। यहां आने के बाद हम एक विशेष ऊर्जा से भर जाते हैं। हम सामाजिक और जनहित में जो भी काम करते हैं। ऐसा लगता है कि उसमें हमें यहां की ईश्वरीय शक्ति सहयोग करती है। आगे हमेशा ऐसे ही करते रहेंगे।’ ये कहना है श्रद्धालु अक्षांश पंडित का। अक्षांश की ही तरह ही हजारों लोग चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। दीपावली तक इस परिक्रमा में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 40 लाख तक पहुंच जाती है। पढ़ें पूरी खबर

पंजाब का तापमान में नहीं दिखा बदलाव:वेस्टर्न डिस्टरबेंस हो रहा एक्टिव, मैदानी इलाकों में नहीं दिखेगा असर; आने वाले दिनों में रातें होंगी ठंडी

पंजाब का तापमान में नहीं दिखा बदलाव:वेस्टर्न डिस्टरबेंस हो रहा एक्टिव, मैदानी इलाकों में नहीं दिखेगा असर; आने वाले दिनों में रातें होंगी ठंडी पंजाब के तापमान में सोमवार भी कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) एक्टिव हो रहा है। लेकिन इसका असर सिर्फ ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों तक ही सीमित रहने वाला है। लेकिन आने वाले दिनों में मौसम में हल्का बदलाव भी देखने को मिल रहा है। राज्य के कई इलाकों में आने वाले 4 से 5 दिनों में रात का तापमान 2 डिग्री तक कम हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार पंजाब के औसत अधिकतम तापमान में मात्र 0.2 डिग्री की हल्की बढ़ौतरी देखने को मिली है। जबकि बठिंडा का तापमान लगातार बढ़ रहा है और बीती शाम 35 डिग्री को पार कर 35.5 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं, न्यूनतम तापमान में भारी कमी देखने को मिल रही है। न्यूनतम तापमान 0.1 डिग्री तक गिरा है, जो सामान्य के करीब बना हुआ है। जबकि सबसे कम तापमान श्री आनंदपुर साहिब में 14.9 डिग्री दर्ज किया गया। पंजाब के प्रमुख शहरों का तापमान- हल्की-हल्की ठंड बढ़नी होगी शुरू मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अभी तापमान में बढ़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। लेकिन अब रात के तापमान में हल्की-हल्की कमी देखने को मिलेगी। आने वाले 4 दिनों में तापमान 4 डिग्री तक गिरने के आसार बन रहे हैं। जिसके बाद सुबह शाम के समय हल्की ठंड बढ़ेगी। वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर पंजाब पर नहीं होगा। 26 अक्टूबर तक राज्य में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है और बारिश के असार ना के बराबर हैं। पंजाब के प्रमुख शहरों का मौसम अमृतसर- आसमान साफ रहेगा, धूप खिलेगी। तापमान 19 से 31 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। जालंधर- आसमान साफ रहेगा, धूप खिलेगी। तापमान 19 से 31 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। लुधियाना- आसमान साफ रहेगा, धूप खिलेगी। तापमान 18 से 32 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। पटियाला- आसमान साफ रहेगा, धूप खिलेगी। तापमान 18 से 33 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। मोहाली- आसमान साफ रहेगा, धूप खिलेगी। तापमान 18 से 33 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है।

हिमाचल के DC नहीं मानते हाईकोर्ट-सरकार के ऑर्डर:पंचायतों में नहीं लगाया रिजर्वेशन रोस्टर; 25 सितंबर तक लगाना था, इलेक्शन पर संशय

हिमाचल के DC नहीं मानते हाईकोर्ट-सरकार के ऑर्डर:पंचायतों में नहीं लगाया रिजर्वेशन रोस्टर; 25 सितंबर तक लगाना था, इलेक्शन पर संशय हिमाचल सरकार और सभी जिलों के DC हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना कर रहे हैं। पंचायतीराज विभाग के सेक्रेटरी के आदेशों के बावजूद पंचायत चुनाव के लिए किसी भी DC ने अब तक आरक्षण रोस्टर नहीं लगाया, जबकि आरक्षण रोस्टर 25 सितंबर तक हर हाल में लगना जरूरी था। हिमाचल हाईकोर्ट ने मनीष धर्मेक बनाम स्टेट केस में साल 2020 में पंचायत और नगर निकाय चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर कमेंसमेंट ऑफ इलेक्शन प्रोसेस से 90 दिन पहले लगाने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा- चुनाव प्रोसेस होने से तीन महीने पहले आरक्षण रोस्टर लगाया जाए, ताकि किसी व्यक्ति को यदि आरक्षण रोस्टर पर आपत्ति है और वह उसे कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, इससे व्यक्ति आरक्षण रोस्टर के खिलाफ अदालत में अपील कर सकेगा। कोर्ट को भी आरक्षण रोस्टर पर मिलने वाली अपील के निपटारे के लिए वक्त मिलेगा। यदि आरक्षण रोस्टर देरी से लगेगा और इधर इलेक्शन कमीशन चुनाव की तिथियां घोषित कर दी गई तो अपीलकर्ता से आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने का अधिकार छिन जाएगा या फिर इससे इलेक्शन में देरी होगी। 25 सितंबर को लगना जरूरी थी आरक्षण रोस्टर हिमाचल में साल 2020 में पंचायतों की पहली मीटिंग 1 फरवरी 2021 को हुई। लगभग 35 दिन का वक्त चुनावी प्रक्रिया संपन्न करने में लगा। इस लिहाज से तीन महीने पहले यानी 25 सितंबर को हर हाल में आरक्षण रोस्टर लगाना जरूरी था। सेक्रेटरी पंचायतीराज ने भी 15 सितंबर को अपने आदेशों को हाईकोर्ट का जिक्र करते हुए सभी जिलों के DC को पत्र लिखा। इसमें 25 सितंबर तक प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए आरक्षण रोस्टर लगाने के निर्देश दिए। पंचायत सेक्रेटरी द्वारा तय तिथि से लगभग 28 दिन अधिक हो गए। मगर अब तक रोस्टर नहीं लग पाया। पंचायत में उप प्रधान ऐसा पद होता है जिसके लिए आरक्षण रोस्टर नहीं लगता। ‌BJP बार बार सरकार को घेरती रही आरक्षण रोस्टर में देरी पर भारतीय जनता पार्टी बार बार सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेरती रही है। बीजेपी का आरोप है कि चुनाव में हार के डर से कांग्रेस सरकार चुनाव नहीं कराना चाह रही। सीएम-मंत्री के दावे भी अब तक झूठे वहीं सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी कई बार कह चुके हैं कि चुनाव तय समय पर होंगे। मगर अब तक आरक्षण रोस्टर नहीं लगाया जा सका। इससे चुनाव समय पर होंगे, इस पर संशय बना हुआ है। अपील के निपटारे को वक्त मिलेगा मनीष धर्मेक बनाम स्टेट केस में हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव प्रोसेस होने से तीन महीने पहले आरक्षण रोस्टर लगना चाहिए, ताकि यदि किसी व्यक्ति को आरक्षण रोस्टर पर आपत्ति है और वह उसे कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, तो 90 दिन का वक्त होने से व्यक्ति ऐसा कर पाएगा। कोर्ट को भी आरक्षण रोस्टर पर मिलने वाली अपील के निपटारे को वक्त मिलेगा। दिसंबर-जनवरी में प्रस्तावित चुनाव हिमाचल में 3577 पंचायतें है। इनमें इसी साल दिसंबर में चुनाव होने हैं। मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल 23 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है। स्टेट इलेक्शन कमीशन को 23 जनवरी से पहले चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। इलेक्शन कमीशन दिसंबर में ही वोटिंग करवाना चाह रहा है, क्योंकि जनवरी में शिमला, मंडी, लाहौल स्पीति, किन्नौर, कांगड़ा, कुल्लू और सिरमौर जिला के कई भागों में भारी बर्फबारी होती है। बर्फबारी में चुनाव करा पाना टेडी खीर साबित हो सकता है।

हिमाचल के ऊंचे क्षेत्रों में आज बर्फबारी के आसार:निचले इलाकों में आंधी-तूफान की चेतावनी; शिमला से ठंडी हुई ऊना-धर्मशाला व हमीरपुर की रातें

हिमाचल के ऊंचे क्षेत्रों में आज बर्फबारी के आसार:निचले इलाकों में आंधी-तूफान की चेतावनी; शिमला से ठंडी हुई ऊना-धर्मशाला व हमीरपुर की रातें हिमाचल प्रदेश में आज से वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होगा। अधिक ऊंचाई वाले भागों में इसका असर तीन दिन नजर आएगा। आज अधिक ऊंचे और मैदानी इलाकों में हल्की बारिश व तूफान चल सकता है। मध्यम ऊंचाई वाले भागों में मौसम साफ रहेगा। मौसम विभाग ने आज चार जिले चंबा, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर में आंधी व तूफान चलने का यलो अलर्ट जारी किया है। किन्नौर, लाहौल स्पीति और चंबा के अधिक ऊंचे क्षेत्रों में हल्का हिमपात होने का पूर्वानुमान है। बारिश-बर्फबारी के बाद कम होगा तापमान मौसम में बदलाव के बाद तापमान में कमी आएगी। अभी अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों ही सामान्य से ज्यादा है। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक और न्यूनतम तापमान नॉर्मल से 0.3 डिग्री ज्यादा है। ऊना का अधिकतम तापमान अभी 33.4 डिग्री ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के बाद तापमान में कमी आएगी। अभी लाहौल स्पीति के कुकुमसैरी का न्यूनतम तापमान सबसे कम 1.2 डिग्री और ऊना का अधिकतम तापमान सबसे ज्यादा 33.4 डिग्री सेल्सियस है। शिमला से ठंडी हुई धर्मशाला-सोलन व हमीरपुर की रातें अभी तक शिमला से ज्यादा ठंडी रातें धर्मशाला, मनाली, पालमपुर, ऊना, हमीरपुर, सोलन में है। न्यूनतम तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे 2.3 डिग्री का उछाल शिमला के तापमान में है, जबकि धर्मशाला, ऊना, पालमपुर, हमीरपुर और सोलन में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे गिर गया है।

हिमाचल में धूमधाम से मनाई दिवाली:मणिकर्ण के कसौल इन में होटल आग; लाखों रुपए का नुकसान, रामपुर में 4 दुकानें जलकर राख

हिमाचल में धूमधाम से मनाई दिवाली:मणिकर्ण के कसौल इन में होटल आग; लाखों रुपए का नुकसान, रामपुर में 4 दुकानें जलकर राख हिमाचल प्रदेश में दिवाली पर्व को उत्साह के साथ मनाया गया। दिनभर लोगों ने बाजार में पटाखें और मिठाइयों की खरीददारी की। रात में 8 से 10 बजे तक खूब पटाखे फोड़े। वहीं दिवाली पर कई जगह आग की घटनाओं से लाखों रुपए का नुकसान भी देखने को मिला है। कुल्लू जिला के मणिकर्ण में बहुमंजिला कसोल इन होटल में रात को भीषण आग लग गई। इससे होटल की ऊपरी मंजिल जलकर राख हो गई। मणिकर्ण में कसोल इन होटल में भड़की आग दमकल विभाग की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। इससे अफरा-तफरी मच गई। होटल की ऊपरी मंजिल में आग से लाखों रुपए का नुकसान हो गया। बताया जा रहा है कि आतिशबाजी की वजह से होटल में आग लगी है। रामपुर में चार दुकानें जलकर राख शिमला जिला के रामपुर बुशहर के खोपड़ी मंदिर के पास चार-पांच दुकानों में आग भड़क गई। इससे दुकानों में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाकर इसे आसपास फैलने से रोका। हिमाचल में दिवाली सेलिब्रेशन के PHOTOS…

हरियाणा CET एग्जाम- नवंबर में रिजल्ट आने की संभावना:24 तक कैटेगरी करेक्शन का मौका; 14 जून से पहले सर्टिफिकेट आवेदन जरूरी

हरियाणा CET एग्जाम- नवंबर में रिजल्ट आने की संभावना:24 तक कैटेगरी करेक्शन का मौका; 14 जून से पहले सर्टिफिकेट आवेदन जरूरी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) के अभ्यर्थियों के लिए करेक्शन पोर्टल खोला है। जिसके बाद अभ्यर्थी अपनी कैटेगरी का सर्टिफिकेट अपडेट करके करेक्शन करवा सकते हैं। सीईटी परीक्षा के दौरान चेयरमैन हिम्मत सिंह ने बयान दिया था करेक्शन पोर्टल खोलने की प्रक्रिया होने के करीब 15 दिन बाद रिजल्ट जारी किया जाएगा। जिसका अभ्यार्थियों को इंतजार है। बता दें कि, एचएसएससी ने प्रदेशभर के परीक्षा केंद्रों पर 26-27 जुलाई को सीईटी एग्जाम आयोजित कराया था। इस सीईटी परीक्षा में करीब 13.48 लाख अभ्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। वहीं इनमें से करीब 12.46 लाख अभ्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। सभी अभ्यार्थियों को रिजल्ट का इंतजार है। सीईटी का रिजल्ट नवंबर माह में आने का अनुमान है। युवा भी लगातार रिजल्ट को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। ताकि उनका इंतजार लंबा ना हो। हालांकि परीक्षा के वक्त चेयरमैन हिम्मत सिंह ने कहा था कि एक माह के अंदर रिजल्ट घोषित किया जाएगा, लेकिन अब तक इस बारे में कोई अधिकारी जानकारी अपडेट नहीं है। 24 अक्टूबर तक खोला करेक्शन पोर्टल
बता दें कि, अब एचएसएससी ने CET के अभ्यर्थियों के लिए करेक्शन पोर्टल 17 से 24 अक्टूबर तक खोला है। अभ्यर्थी 24 अक्टूबर को रात 11 बजकर 59 मिनट तक अपने फॉर्म में सुधार कर सकते हैं। आयोग ने एक पब्लिक नोटिस भी जारी किया है, जिसमें हाईकोर्ट के 1 जुलाई के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि CET ग्रुप-सी 2025 परीक्षा के लिए सुधार पोर्टल खोलने का निर्णय लिया गया है। नोटिस में उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे 17 से 24 अक्टूबर के बीच करेक्शन पोर्टल पर सुधार कर लें। इसको लेकर चेयरमैन हिम्मत सिंह ने युवाओं को जानकारी देते हुए निर्देश दिए कि जिस अभ्यर्थी को कैटेगरी करेक्शन करना है। उनका कैटेगरी सर्टिफिकेट 14 जून से पहले का आवेदन किया हुआ होना चाहिए। वे ही उम्मीदवार पोर्टल पर जाकर करेक्शन कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि श्रेणी सुधार के किसी भी अनुरोध पर भौतिक रूप से विचार नहीं किया जाएगा।

हरियाणा के कॉलेजों में सेमिनार-वर्कशॉप के रेट तय:₹40 की चाय, खाने के ₹200 फिक्स; ये करने की 3 वजह, शिकायत कर सकेंगे स्टूडेंट

हरियाणा के कॉलेजों में सेमिनार-वर्कशॉप के रेट तय:₹40 की चाय, खाने के ₹200 फिक्स; ये करने की 3 वजह, शिकायत कर सकेंगे स्टूडेंट हरियाणा के कॉलेजों में सेमिनार, वर्कशॉप, कॉन्फ्रेंस में खाने-पीने के रेट तय कर दिए गए हैं। अब कॉलेज प्रबंधन ऐसे आयोजनों में अपनी मनमर्जी नहीं चला सकेंगे। हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट ने इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बना दी है। ये एसओपी सरकारी, एडिड व निजी कॉलेजों में लागू की गई है। इसके अनुसार, आयोजनों में शामिल होने वालों से 500 रुपए से अधिक रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ले सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार या वर्कशॉप पर प्रतिदिन 60 हजार और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार पर 1 लाख रुपए खर्च किए जा सकेंगे। आयोजनों में प्रतिभागियों की संख्या 60 से 80 के बीच रहेगी। प्रिंसिपल कारण बता इनकी संख्या 10% बढ़ाने की अनुमति ले सकेंगे। 40 रुपए चाय के फिक्स हुए आयोजन में प्रति व्यक्ति चाय के लिए 40 रुपए और खाने का 200 रुपए प्रतिदिन बजट तय किया है। विशेष वक्ता को प्रति घंटे 2 हजार रुपए के हिसाब से पेमेंट की जा सकेगी। वक्ता दिन में दो लेक्चरर दे सकेंगे। बोर्डिंग व लोडिंग पर प्रति व्यक्ति 1 हजार रुपए खर्च होगा। स्टेशनरी व अन्य चीजों पर 15 हजार रुपए तक खर्च कर सकेंगे। आयोजन के बाद 15 दिन में यूटिलाइज सर्टिफिकेट देना होगा। कार्यक्रम की रिपोर्ट, फोटोग्राफ, प्रतिभागियों का फीडबैक निदेशालय के पास भेजना होगा। ऐसे में कोई भी सेमिनार के नाम पर फर्जीवाड़ा नहीं कर सकेगा। नवंबर-दिसंबर में देना होगा प्रस्ताव आयोजनों का समय सुबह 9:30 से शाम 5 बजे तक रहेगा। 4 सेशन होंगे। टी-ब्रेक, लंच का समय भी तय है। कार्यक्रम के लिए शनिवार, रविवार जैसे छुट्‌टी के दिन को प्राथमिकता देने के लिए कहा है। इनसे कॉलेज में पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। आयोजन की तारीखें व मकसद बताते हुए नवंबर-दिसंबर में ही इसका प्रस्ताव हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट के पास भेजना होगा। पिछले 3 साल के आयोजनों के विषय की भी जानकारी देनी होगी। स्क्रीनिंग कमेटी मंजूरी जरूरी एसओपी में हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट ने एसओपी में ये भी व्यवस्था की है जिसके तहत बजट की डिमांड करते वक्त आइटम वाइज खर्च ब्योरा देना होगा। आयोजन में कौन शामिल होगा, जैसे विद्यार्थी, फैकल्टी, स्कॉलर्स, वक्ता या अन्य। स्क्रीनिंग कमेटी तय करेगी कि आयोजन होना चाहिए या नहीं। अभी कॉलेजों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए प्रबंधन मर्जी के हिसाब से फीस लेते हैं। लागू करने की ये 3 बड़ी वजह… 1. कॉलेज के स्टूडेंट्स की हमेशा से शिकायत रहती है कि खर्च के मुकाबले फीस ज्यादा ले ली जाती है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ये एसओपी में इसकी भी व्यवस्था की गई है। यदि कोई कॉलेज अब ज्यादा फीस लेता है तो विद्यार्थी शिकायत भी कर पाएंगे। 2. सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप जैसे आयोजनों में खाने-पीने के बिलों में बजट को लेकर गड़बड़ी सामने आई हैं। कुछ कॉलेजों में कई बार आयोजन पर बजट खर्च अधिक दिखाए जाने की संभावना रहती है। इस एसओपी के बाद अब इस पर अंकुश लग सकेगा। 3. हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट की ओर से जारी एसओपी से फर्जीवाड़ा रुकेगा। कुछ कॉलेजों में कार्यक्रमों में देर शाम हो जाती है। इससे छात्रों को घर जाने में असुविधा होती है। खासकर छात्राओं को इससे काफी परेशानी होती थी।

यमुनानगर में बडे़ धार्मिक उत्सव की तैयारी:श्रीकपालमोचन-श्री आदि बद्री मेला एक नवंबर से, 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

यमुनानगर में बडे़ धार्मिक उत्सव की तैयारी:श्रीकपालमोचन-श्री आदि बद्री मेला एक नवंबर से, 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना हरियाणा में यमुनानगर जिले के व्यासपुर में स्थित पवित्र तीर्थस्थल कपालमोचन एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का केंद्र बनने को तैयार है। 1 से 5 नवंबर तक श्री कपालमोचन-श्री आदि बद्री मेला आयोजित होने जा रहा है। यह मेला हिंदू-सिख एकता का प्रतीक है। इस बार कपालमोचन सरोवर, ऋण मोचन सरोवर, और सूरजकुंड सरोवर में स्नान के लिए देशभर से 8 से 10 लाख श्रद्धालु जुटने की उम्मीद है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ सहित अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालु यहां स्नान कर पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करेंगे। यमुनानगर प्रशासन ने मेले को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसमें तकनीकी नवाचार और बीमा कवरेज जैसे विशेष इंतजाम शामिल हैं। इंटरेक्टिव हिस्ट्री से दर्शाया जाएगा महत्त्व इस बार मेले में श्रद्धालुओं के अनुभव को और समृद्ध करने के लिए प्रशासन ने इंटरेक्टिव डिजिटल हिस्ट्री बोर्ड लगाने का फैसला किया है। ये बोर्ड मेले के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को आकर्षक और आधुनिक ढंग से प्रस्तुत करेंगे, जिससे श्रद्धालु कपाल मोचन की पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक विरासत से आसानी से परिचित हो सकेंगे। इसके साथ ही, प्रशासन ने श्रद्धालुओं और दुकानदारों की सुरक्षा के लिए व्यापक बीमा कवरेज की व्यवस्था की है। प्रतिदिन 2 लाख श्रद्धालुओं के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी और दुकानदारों के लिए 1 लाख तक की कवरेज सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा सके। 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से रखी जाएगी नजर एसडीएम जसपाल सिंह ने बताया कि सुरक्षा के लिए मेला क्षेत्र में 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी और 4,000 से 5,000 सिविल कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। वहीं 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन की मदद से मेला क्षेत्र के हर कोने पर कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि कोई ब्लैक स्पॉट न रहे। सड़क यातायात को सुगम बनाने के लिए रणजीतपुर, लेडी-प्रताप नगर, व्यासपुर और साढौरा से कपालमोचन तक की सड़कों की मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। सरोवरों में जलभराव और सफाई का कार्य भी जोरों पर है, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान के लिए स्वच्छ और पर्याप्त जल उपलब्ध हो। महिला घाटों की ऊंचाई बढ़ाई गई है, ताकि महिलाएं सुरक्षित और आरामदायक तरीके से स्नान कर सकें। सभी टेंडर प्रक्रियाएं हुई पूरी एसडीएम ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री बद्रीनारायण और श्री केदारनाथ मंदिरों पर व्हीलचेयर और वॉलंटियर्स की व्यवस्था की जाएगी, जो विशेष रूप से बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए सहायक होगी। मेला क्षेत्र में 20 स्थायी शौचालय बनाए गए हैं, और हर साल 15-20 नए शौचालय जोड़े जा रहे हैं। अस्थायी शौचालयों और कैटरिंग सेवाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरोवरों पर स्थायी लाइटें और मेला ग्राउंड में अस्थायी लाइटें लगाई गई हैं। बिजली के खंभों और तारों की मरम्मत का कार्य भी तेजी से चल रहा है, ताकि रात के समय मेला क्षेत्र में पर्याप्त उजाला रहे। एसडीएम जसपाल सिंह ने बताया कि सभी तैयारियां एक सप्ताह के भीतर पूर्ण हो जाएंगी, और प्रशासन का लक्ष्य श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव प्रदान करना है। भगवान शंकर का हुआ था बह्मा कपाली दोष दूर गऊ बच्छा मंदिर के पुजारी सुभाष चंद शर्मा ने बताया कि, स्कंद महापुराण के अनुसार, कलयुग के प्रभाव से ब्रह्मा ने सरस्वती के प्रति अनुचित विचार रखे। सरस्वती ने भगवान शंकर से द्वैत-वन में शरण मांगी। शंकर ने ब्रह्मा का सिर काट दिया, जिससे उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप और ब्रह्मा कपाली का चिह्न लगा। तीर्थों में स्नान-दान के बाद भी चिह्न नहीं हटा। शंकर पार्वती सहित सोमसर (कपाल मोचन) तीर्थ पहुंचे। यहां बछड़े ने ब्राह्मण की हत्या कर ब्रह्म हत्या का पाप लिया, लेकिन सोमसर तालाब में स्नान से वह और गोमाता पापमुक्त हो गए। पार्वती के कहने पर शंकर ने भी स्नान किया और ब्रह्मा कपाली दोष से मुक्त हुए। इसलिए यह तीर्थ कपाल मोचन कहलाया। कपालमोचन मेला सिख इतिहास के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरु गोबिंद सिंह ने भंगानी की लड़ाई के बाद यहां 52 दिनों तक रुककर तपस्या की थी। उन्होंने सिख सैनिकों को सम्मानित करने के लिए यहीं से सिरोपा देने की परंपरा शुरू की और बाद में यहीं पर पहली बार गुरु नानक देव जी का जन्मोत्सव भी मनाया। यह स्थान सिखों और हिंदुओं दोनों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है। 100 से ज्यादा ग्रामीण सेवक सेवा में लगे हुए स्थानीय निवासी नवीन कुमार ने बताया कि करीब एक माह से मेले की तैयारियां चल रही हैं। तीन कस्बों के 100 से भी ज्यादा ग्रामीण सेवक सेवा में लगे हुए हैं। इस बार 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के यहां पर पहुंचने की उम्मीद है। धर्मशालाएं भी पूरी तरह से तैयार हैं। ग्रामीणों को भी इस मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि मेले में उन्हें रोजगार मिल जाता है।

पंजाब में दिवाली पर 13 जजों का तबादला:हाईकोर्ट ने जारी किए आदेश, 76 वकीलों को भी सीनियर एडवोकेट बनाया

पंजाब में दिवाली पर 13 जजों का तबादला:हाईकोर्ट ने जारी किए आदेश, 76 वकीलों को भी सीनियर एडवोकेट बनाया दिवाली के दिन पंजाब के 13 जजों का तबादला किया गया है। सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इसको लेकर ऑर्डर जारी किया। इसमें जिला व सेशन जज, एडिशनल सेशन जज शामिल हैं। जल्दी ही सारे जज अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। जतिंदर कौर को अमृतसर का डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज लगाया गया है। इसके साथ अवतार सिंह को फाजिल्का से पटियाला भेजा गया है। इसके साथ हरियाणा में 29 जजों का भी तबादला किया गया है। इससे पहले 15 अप्रैल 2025 को पंजाब के 52 जिला एवं सेशन जजों का तबादला हुआ था। इसके अलावा हाईकोर्ट ने 76 एडवोकेट को दिवाली का तोहफा दिया है। उन्हें सीनियर एडवोकेट बनाया गया है। 13 जजों की लिस्ट… 76 वकील, जिन्हें सीनियर एडवोकेट बनाया गया…