चंडीगढ़ नगर निगम में हाई मस्ट स्ट्रीट लाइट पोल लगाने के नाम पर बड़े घोटाले के आरोप सामने आए हैं। शहर के कई इलाकों में लगाए गए पोलों की गुणवत्ता पर सवाल उठने के साथ-साथ करोड़ों रुपये के भुगतान में भारी अनियमितताओं की चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि कम कीमत और कमजोर गुणवत्ता वाले पोलों को कई गुना अधिक दरों पर खरीदकर निगम को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
सूत्रों के मुताबिक नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रिकल विंग की देखरेख में सेक्टर-34, सेक्टर-35 के स्लो कैरिज-वे, नाइट फूड स्ट्रीट और सेक्टर-48 स्थित ओपन एयर थिएटर सहित कई स्थानों पर हाई मस्ट लाइट पोल लगाए गए। इन पोलों की सप्लाई जीरकपुर की एक निजी कंपनी द्वारा की गई। आरोप है कि जिन पोलों की वास्तविक कीमत करीब 40 से 50 हजार रुपये थी, उनके बिल 1.80 लाख रुपये तक लगाए गए।
स्थानीय लोगों और तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि लगाए गए कई पोल बेहद हल्के वजन के हैं और उनमें इस्तेमाल धातु की मोटाई भी तय मानकों से कम है। कुछ स्थानों पर तो पोलों पर कुछ ही समय में जंग लगने लगी है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका भी जताई जा रही है।
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि केवल पोल ही नहीं बल्कि उनके साथ लगाए गए केबल, पाइप, विंच और अन्य इलेक्ट्रिकल उपकरण भी निम्न स्तर के इस्तेमाल किए गए। तकनीकी नियमों के अनुसार इस तरह के उपकरणों की प्रमाणित लैब या केंद्रीय संस्थान से टेस्टिंग रिपोर्ट जरूरी होती है, लेकिन कई फाइलों में ऐसी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।
नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि काम की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने कभी सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति दर्ज नहीं की। यहां तक कि सप्लाई से पहले पोलों की गुणवत्ता जांचने के लिए बाहर राज्यों का दौरा भी किया गया, लेकिन चयनित सामग्री की तकनीकी विशेषताओं और मंजूरी का पूरा रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया।
इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन की बंदरबांट की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़े भ्रष्टाचार घोटाले का रूप ले सकता है।
मामले के सामने आने के बाद अब स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग उठने लगी है। मांग की जा रही है कि जांच कमेटी में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), CSIO और अन्य तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए ताकि पोलों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की निष्पक्ष जांच हो सके।
इस विवाद के बाद प्रशासनिक विभागों द्वारा लगाए गए अन्य हाई मस्ट पोल भी जांच के घेरे में आ गए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या शहर के अन्य सरकारी प्रोजेक्ट्स में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई हैं और क्या संबंधित विभाग अब सभी पोलों का तकनीकी ऑडिट करवाएंगे।



