भारत ने तेज़ की ‘गोल्ड वापसी’ रणनीति, विदेशों से 104 टन सोना देश में शिफ्ट

भारत ने तेज़ की ‘गोल्ड वापसी’ रणनीति, विदेशों से 104 टन सोना देश में शिफ्ट

भारत अपने स्वर्ण भंडार को तेजी से देश के भीतर सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह महीनों में रिजर्व बैंक ने करीब 104 टन सोना विदेशों से वापस मंगाया है, जिससे अब कुल भंडार का बड़ा हिस्सा भारत में ही रखा जा रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि मार्च 2026 तक भारत के पास कुल 880.52 टन सोना है, जिसमें से लगभग 680 टन देश के भीतर मौजूद है। वहीं करीब 197 टन सोना अभी भी विदेशों में सुरक्षित रखा गया है। पहले लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वित्तीय केंद्रों में सोना रखना सामान्य प्रथा मानी जाती थी, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।

दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध और कुछ देशों की विदेशी संपत्तियों के फ्रीज होने जैसी घटनाओं ने केंद्रीय बैंकों की सोच बदल दी है। अब सोने को केवल निवेश नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। इसी कारण भारत सहित कई देश अपने भंडार को घरेलू स्तर पर मजबूत करने में जुटे हैं।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर 2025 में भारत के भीतर 575.8 टन सोना था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 680 टन हो गया। इसी दौरान विदेशों में रखे सोने की मात्रा घटकर लगभग 197.7 टन रह गई है।

सोने की कीमतों में आई तेजी का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखा है। सितंबर 2025 में जहां सोने की वैल्यू करीब 97.4 अरब डॉलर थी, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 115.4 अरब डॉलर पहुंच गई। कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी भी 13.9% से बढ़कर 16.7% हो गई है।

यह ट्रेंड सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देश भी अपने गोल्ड रिजर्व को वापस अपने देश में ला रहे हैं। बढ़ते वैश्विक अनिश्चित माहौल में अब देश अपनी आर्थिक सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं और सोने को ‘सुरक्षित संपत्ति’ के रूप में प्राथमिकता दे रहे हैं।

(Photo : AI Generated)