हरोली के किसानों को बड़ी राहत, केंद्र ने सिंचाई परियोजना के लिए जारी किए 41 करोड़ रुपये

हरोली के किसानों को बड़ी राहत, केंद्र ने सिंचाई परियोजना के लिए जारी किए 41 करोड़ रुपये

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली विधानसभा क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी वित्तीय सहायता जारी की है। कमांड एरिया डेवलपमेंट एवं वाटर मैनेजमेंट योजना (एम-सीएडीडब्ल्यूएम) के तहत केंद्र ने 41.48 करोड़ रुपये की पहली किस्त को मंजूरी दी है। यह राशि करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली व्यापक सिंचाई परियोजना के लिए जारी की गई है, जिससे क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नगनोली से लेकर बाथड़ी तक फैली करीब 131 सिंचाई योजनाओं का सुधार, विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाएगा। लंबे समय से जर्जर हो चुकी नहरों, जल वितरण प्रणालियों और सिंचाई ढांचे को नई तकनीक के साथ विकसित किया जाएगा, ताकि खेतों तक पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। परियोजना पूरी होने के बाद लगभग पांच हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इसे क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए केंद्र सरकार के समक्ष लगातार प्रयास किए गए और कई दौर की बैठकों में बजट जारी करने की मांग उठाई गई। उन्होंने बताया कि वे स्वयं कई बार केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मिले थे, जिसके बाद अब इस परियोजना को मंजूरी मिल सकी है।

उन्होंने कहा कि यह योजना केवल सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय मजबूत करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। क्षेत्र के किसानों को समय पर सिंचाई मिलने से फसलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार आने की उम्मीद है। खासकर गर्मियों और कम बारिश वाले समय में पानी की उपलब्धता बड़ी राहत साबित होगी।

हरोली क्षेत्र लंबे समय से सिंचाई ढांचे के उन्नयन की मांग कर रहा था। कई गांवों में पुरानी नहरों और टूटी जल प्रणालियों के कारण किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था, जिससे खेती प्रभावित होती थी। अब नई परियोजना के तहत पाइपलाइन नेटवर्क, जल वितरण प्रणाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा।

प्रदेश सरकार का कहना है कि “हर खेत को पानी” के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना के चरणबद्ध क्रियान्वयन के बाद क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को नई गति मिलेगी और किसानों की निर्भरता वर्षा आधारित खेती पर कम होगी।