हिमाचल प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों और विकास से जुड़े अहम मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आगामी नीति आयोग की बैठक में केंद्र सरकार के समक्ष विस्तृत रूप से रखेंगे। 11 जून को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री राज्य की आर्थिक स्थिति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान और लंबित वित्तीय मामलों पर केंद्र से सहयोग की मांग करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक को हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि हाल के वर्षों में वित्तीय संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में चुनौतियां सामने आई हैं। ऐसे में नीति आयोग का मंच राज्य की आवश्यकताओं को सीधे केंद्र के सामने रखने का अवसर प्रदान करेगा।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री चार प्रमुख विषयों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण राजस्व घाटे की भरपाई का मुद्दा है। राज्य सरकार का तर्क है कि विशेष वित्तीय सहायता बंद होने के बाद हिमाचल के राजकोष पर भारी दबाव बढ़ा है, जिससे विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। सरकार चाहती है कि या तो पूर्व वित्तीय सहायता व्यवस्था को कुछ वर्षों के लिए जारी रखा जाए अथवा राज्य को विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया जाए।
बैठक में वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदाओं से हुए व्यापक नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण सड़कें, पुल, जलापूर्ति योजनाएं और अन्य सार्वजनिक ढांचे प्रभावित हुए थे। प्रदेश सरकार का कहना है कि पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता आवश्यक है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।
इसके अलावा लंबे समय से लंबित वित्तीय देनदारियों का विषय भी मुख्यमंत्री के एजेंडे में शामिल है। राज्य सरकार केंद्र से अपेक्षा कर रही है कि विभिन्न संस्थाओं और राज्यों से जुड़े वित्तीय मामलों के समाधान में सहयोग दिया जाए, जिससे हिमाचल को उसका बकाया धन शीघ्र प्राप्त हो सके। अधिकारियों का मानना है कि इससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।
बैठक में हिमाचल की पर्यावरणीय भूमिका को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। राज्य सरकार लगातार यह तर्क देती रही है कि हिमाचल प्रदेश देश के पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। प्रदेश का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसके कारण औद्योगिक और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के विकास पर कई प्रकार की सीमाएं रहती हैं। ऐसे में सरकार पर्यावरण संरक्षण के बदले विशेष प्रोत्साहन राशि या ग्रीन बोनस की मांग दोहराएगी।
राज्य सरकार का कहना है कि हिमाचल न केवल अपने नागरिकों के लिए बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जंगलों के संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और जैव विविधता को बचाए रखने के लिए प्रदेश को अतिरिक्त आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली जाएंगे और विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुति देंगे। राज्य सरकार को उम्मीद है कि नीति आयोग की बैठक के माध्यम से हिमाचल के वित्तीय हितों को मजबूती से रखा जा सकेगा और विकास योजनाओं के लिए केंद्र से सकारात्मक समर्थन प्राप्त होगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय होता है तो इससे हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को राहत मिलेगी, विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और कर्मचारियों, पेंशनरों तथा आम जनता से जुड़े कई मुद्दों के समाधान का रास्ता भी खुल सकता है।




