हरियाणा सरकार ने राज्य को देश के अग्रणी औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए नई ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ लागू कर दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में तैयार की गई इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में बड़े निवेश को आकर्षित करना, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और औद्योगिक विकास को एनसीआर तक सीमित न रखकर दूरदराज के जिलों तक पहुंचाना है।
राज्य सरकार का दावा है कि आने वाले पांच वर्षों में यह नीति हरियाणा की औद्योगिक तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नई नीति को कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू कर दिया गया है। इसके तहत उद्योगों को जमीन, बिजली, टैक्स छूट, आधारभूत ढांचे और मंजूरियों में कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी।
सरकार का फोकस केवल पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और नई तकनीक आधारित उद्योगों को भी प्राथमिकता दी गई है। इससे हरियाणा को भविष्य की इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र बनाने की योजना तैयार की गई है।
नीति की सबसे खास बात यह है कि औद्योगिक विकास को संतुलित बनाने के लिए प्रदेश के जिलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। सरकार चाहती है कि उद्योग केवल गुरुग्राम, फरीदाबाद और एनसीआर क्षेत्र तक सीमित न रहें, बल्कि पिछड़े और कम विकसित जिलों में भी बड़े प्रोजेक्ट स्थापित हों। इससे उन क्षेत्रों में रोजगार, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
नई नीति के तहत 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक निवेश करने वाली परियोजनाओं को ‘मेगा प्रोजेक्ट’ का दर्जा दिया जाएगा। वहीं इससे भी बड़े निवेश वाली इकाइयों को विशेष श्रेणी में शामिल कर अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। ऐसे उद्योगों को मंजूरियों में तेजी, बिजली कनेक्शन, भूमि आवंटन और टैक्स लाभ जैसी प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
हरियाणा के युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से सरकार ने स्थानीय भर्ती पर भी विशेष जोर दिया है। उद्योगों में काम करने वाले स्थानीय कर्मचारियों की पहचान परिवार पहचान पत्र (PPP) के माध्यम से की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर आर्थिक मजबूती बढ़ेगी।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों यानी MSME सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भी कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। छोटे उद्योगों को पूंजी निवेश सहायता, तकनीकी सहयोग, जीएसटी आधारित प्रोत्साहन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही स्टार्टअप्स और इनोवेशन आधारित कंपनियों को भी विशेष समर्थन देने की योजना बनाई गई है ताकि हरियाणा नई तकनीक और उद्यमिता का केंद्र बन सके।
सरकार ग्रीन इंडस्ट्री और पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस कर रही है। नई नीति के तहत ग्रीन एनर्जी, प्रदूषण नियंत्रण, टिकाऊ औद्योगिक विकास और आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा फ्लैटेड फैक्ट्री, निजी इंडस्ट्रियल टाउनशिप और स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की योजना भी शामिल है।
सरकार का दावा है कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये का निवेश आएगा और लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा। खासतौर पर उन जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जहां अब तक निवेश सीमित रहा है। इससे हरियाणा को देश के सबसे तेज गति से विकसित हो रहे औद्योगिक राज्यों में शामिल करने की तैयारी की जा रही है।



