<p style=”text-align: justify;”><strong>Bihar Inter Exam:</strong> बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 में पश्चिमी चंपारण जिले के हर्नाटांड़ में रहने वाली प्रिया जायसवाल (Priya Jaiswal) ने साइंस स्ट्रीम में प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरे राज्य में नाम रोशन किया है. प्रिया ने 484 अंक (96.8%) हासिल किए हैं, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले में खुशी का माहौल है. बगहा का इतिहास यह रहा है कि आज भी बगहा को नक्सलाइट एरिया के मैप में माना गया है. माओवादी क्षेत्र से निकलकर प्रिया शिक्षा की नई मिसाल बनीं है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>माओवादी क्षेत्र से आती हैं प्रिया जायसवाल</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया का यह सफर आसान नहीं था. हर्नाटांड़ का इलाका कभी माओवादी गतिविधियों के लिए कुख्यात था. यह क्षेत्र थारू और उड़ान जातियों का बहुल इलाका है, जहां पहले विकास और शिक्षा की रोशनी कम ही पहुंची थी. जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में अक्सर माओवादी गतिविधियां देखने को मिलती थीं, जिससे यहां के बच्चों के लिए पढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण था.</p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया का परिवार भी इन्हीं चुनौतियों से जूझ रहा था. उनका घर जंगल के किनारे था, जहां नेटवर्क की भारी समस्या थी. कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद यह समस्या और बढ़ गई. बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए प्रिया के पिता संतोष जायसवाल ने हर्नाटांड़ बाजार में एक घर बनवाया और पूरे परिवार को वहां शिफ्ट कर दिया.</p>
<p style=”text-align: justify;”>इसी फैसले ने प्रिया को आगे बढ़ने का मौका दिया और आज उन्होंने पूरे राज्य में टॉप कर दिखाया. प्रिया शुरू से ही मेधावी छात्रा रही हैं. उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल की थी. उनके परिवार में शिक्षा का माहौल है. बड़ी बहन सोनी जायसवाल डीएलएड कर रही हैं. मंझली बहन प्रीति जायसवाल नीट की तैयारी में जुटी हैं. छोटे भाई आदित्य जायसवाल इंटरमीडिएट में पढ़ रहे हैं. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>गांव और जिले में खुशी की लहर</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया की इस उपलब्धि से उनके गांव और जिले में जश्न का माहौल है. शिक्षकों, स्थानीय लोगों और परिजनों ने उन्हें बधाई दी. प्रिया ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और अपने कठिन परिश्रम को दिया है. उन्होंने बताया कि “संघर्ष कितना भी बड़ा हो, अगर हौसला बुलंद हो, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है.”</p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया की यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखती हैं. माओवादी प्रभावित क्षेत्र से निकलकर राज्य की टॉपर बनना यह साबित करता है कि शिक्षा ही सच्ची क्रांति है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>ये भी पढ़ें: <a href=”https://www.abplive.com/states/bihar/bseb-12th-bihar-board-inter-result-2025-out-anand-kishore-sunil-kumar-girls-student-topper-ann-2911619″>Bihar Inter Result 2025: बिहार में सफलता की ऊंचाइयों को छू रही बेटियां, 12वीं की परीक्षा में फिर मारी लड़कों से बाजी</a></strong></p> <p style=”text-align: justify;”><strong>Bihar Inter Exam:</strong> बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 में पश्चिमी चंपारण जिले के हर्नाटांड़ में रहने वाली प्रिया जायसवाल (Priya Jaiswal) ने साइंस स्ट्रीम में प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरे राज्य में नाम रोशन किया है. प्रिया ने 484 अंक (96.8%) हासिल किए हैं, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले में खुशी का माहौल है. बगहा का इतिहास यह रहा है कि आज भी बगहा को नक्सलाइट एरिया के मैप में माना गया है. माओवादी क्षेत्र से निकलकर प्रिया शिक्षा की नई मिसाल बनीं है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>माओवादी क्षेत्र से आती हैं प्रिया जायसवाल</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया का यह सफर आसान नहीं था. हर्नाटांड़ का इलाका कभी माओवादी गतिविधियों के लिए कुख्यात था. यह क्षेत्र थारू और उड़ान जातियों का बहुल इलाका है, जहां पहले विकास और शिक्षा की रोशनी कम ही पहुंची थी. जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में अक्सर माओवादी गतिविधियां देखने को मिलती थीं, जिससे यहां के बच्चों के लिए पढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण था.</p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया का परिवार भी इन्हीं चुनौतियों से जूझ रहा था. उनका घर जंगल के किनारे था, जहां नेटवर्क की भारी समस्या थी. कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद यह समस्या और बढ़ गई. बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए प्रिया के पिता संतोष जायसवाल ने हर्नाटांड़ बाजार में एक घर बनवाया और पूरे परिवार को वहां शिफ्ट कर दिया.</p>
<p style=”text-align: justify;”>इसी फैसले ने प्रिया को आगे बढ़ने का मौका दिया और आज उन्होंने पूरे राज्य में टॉप कर दिखाया. प्रिया शुरू से ही मेधावी छात्रा रही हैं. उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल की थी. उनके परिवार में शिक्षा का माहौल है. बड़ी बहन सोनी जायसवाल डीएलएड कर रही हैं. मंझली बहन प्रीति जायसवाल नीट की तैयारी में जुटी हैं. छोटे भाई आदित्य जायसवाल इंटरमीडिएट में पढ़ रहे हैं. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>गांव और जिले में खुशी की लहर</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया की इस उपलब्धि से उनके गांव और जिले में जश्न का माहौल है. शिक्षकों, स्थानीय लोगों और परिजनों ने उन्हें बधाई दी. प्रिया ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और अपने कठिन परिश्रम को दिया है. उन्होंने बताया कि “संघर्ष कितना भी बड़ा हो, अगर हौसला बुलंद हो, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है.”</p>
<p style=”text-align: justify;”>प्रिया की यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखती हैं. माओवादी प्रभावित क्षेत्र से निकलकर राज्य की टॉपर बनना यह साबित करता है कि शिक्षा ही सच्ची क्रांति है.</p>
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