अंतरिक्ष में भारत का अपना ठिकाना! 2035 तक तैयार होगा BAS, जानिए कैसे बनेगा देश का स्पेस स्टेशन

यह परियोजना भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। BAS के जरिए भारत माइक्रोग्रैविटी, अंतरिक्ष चिकित्सा, जैव-विज्ञान और भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों से जुड़े प्रयोगों के लिए अपना एक अलग प्लेटफॉर्म तैयार करेगा। इतना ही नहीं, भविष्य में चंद्रमा तक मानव मिशन भेजने की भारत की महत्वाकांक्षी योजना में भी इस स्टेशन की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। पहले जानिए क्या है BAS भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को आसान भाषा में समझें तो यह अंतरिक्ष में भारत की अपनी प्रयोगशाला होगी। यह पृथ्वी की सतह पर किसी स्पेस सेंटर की तरह स्थिर नहीं रहेगा, बल्कि…

रूस-यूक्रेन युद्ध में किस देश को हुआ ज्यादा नुकसान? जानिए अब तक का पूरा हिसाब

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। इसी सिलसिले में अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने शनिवार को मॉस्को स्थित क्रेमलिन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लंबी बातचीत की। यह बैठक तीन घंटे से अधिक समय तक चली। बातचीत का मकसद कई वर्षों से चल रहे सैन्य संघर्ष को राजनीतिक समाधान की दिशा में ले जाना था। बैठक के बाद रूस और यूक्रेन के…

UN का नया वर्ल्ड मैप क्यों चर्चा में? 500 साल पुराने नक्शे को बदलने की जरूरत क्यों महसूस हुई

दुनिया को हम जिस नक्शे पर देखते आए हैं, वह धरती के वास्तविक आकार की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता. स्कूलों की किताबों, ग्लोब के साथ इस्तेमाल होने वाले चार्ट, दफ्तरों और कई डिजिटल मैप्स में लंबे समय से जिस विश्व मानचित्र का इस्तेमाल होता रहा है, उसमें कुछ देशों और महाद्वीपों का आकार वास्तविकता से काफी अलग नजर आता है. यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एक नई मैप पहल ने एक बार फिर दुनिया के नक्शे को लेकर बहस छेड़ दी है. इस चर्चा का केंद्र है इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन, जिसे धरती के अलग-अलग हिस्सों के वास्तविक…

श्रीकृष्ण के 108 नामों का क्या है रहस्य? हर नाम में छिपी है कान्हा की लीला और स्वरूप की अलग कहानी

श्रीकृष्ण को भारतीय धार्मिक परंपरा में प्रेम, करुणा, नीति, ज्ञान और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है। बाल गोपाल से लेकर योगेश्वर तक उनका स्वरूप अलग-अलग नामों में दिखाई देता है। यही वजह है कि भगवान कृष्ण के नाम केवल उन्हें पुकारने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, शक्तियों, लीलाओं और दिव्य स्वरूप को समझने का एक रास्ता भी माने जाते हैं। श्रीकृष्ण के अनेक नाम प्रचलित हैं और अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों व परंपराओं में उनके नामों की संख्या भी अलग मिलती है। हालांकि पूजा-पाठ और नाम-जप की परंपरा में उनके 108 नामों यानी अष्टोत्तरशतनामावली का विशेष महत्व…

दही-हांडी सिर्फ मटकी फोड़ने का खेल नहीं, जानिए कृष्ण की लीला से महाराष्ट्र के बड़े उत्सव तक का पूरा सफर

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर देशभर में अलग-अलग तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन्हीं में दही-हांडी का उत्सव खास आकर्षण का केंद्र रहता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है और इसके अगले दिन कई शहरों में दही-हांडी के आयोजन होंगे। खासतौर पर महाराष्ट्र में इस पर्व का उत्साह देखने लायक होता है। मुंबई, ठाणे, पुणे और आसपास के इलाकों में बड़ी-बड़ी हांड़ियां ऊंचाई पर लटकाई जाती हैं और उन्हें फोड़ने के लिए गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर दही-हांडी की यह परंपरा शुरू…

उज्बेकिस्तान के पास ऐसा क्या है जिसकी दुनिया को जरूरत? जानिए इस देश के खजाने की पूरी कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों मध्य एशिया के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उनकी यात्रा का पहला पड़ाव उज्बेकिस्तान है, जहां वे राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री किर्गिस्तान का रुख करेंगे। उज्बेकिस्तान में अपने प्रवास के दौरान पीएम मोदी व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। इस यात्रा को सिर्फ कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। मध्य एशिया में बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच उज्बेकिस्तान की प्राकृतिक संपदा भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।…

23 साल बाद मंदाकिनी ने दिखाया रौद्र रूप, 137 मीटर तक पहुंचा जलस्तर; जानिए बाढ़ की वजह और नदी का धार्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने इस बार ऐसा विकराल रूप धारण किया है, जिसकी तस्वीरें और मंजर स्थानीय लोगों ने लंबे समय से नहीं देखे थे। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और मानिकपुर के डोडा डैम के टूटने के बाद नदी में अचानक पानी की मात्रा बढ़ गई। देखते ही देखते मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी और बाढ़ ने चित्रकूट के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि रामघाट पूरी तरह पानी में डूब गया है। घाटों की सीढ़ियां नजर नहीं आ रही हैं…

क्या आपने सुने हैं Gen-Z के ये शब्द? जानिए इन वायरल शब्दों का मतलब

आज की Gen-Z पीढ़ी सिर्फ अपने पहनावे, सोशल मीडिया इस्तेमाल या सोचने के अलग अंदाज के लिए ही चर्चा में नहीं रहती, बल्कि उसकी बोलचाल की भाषा भी लगातार लोगों का ध्यान खींच रही है। बातचीत के दौरान युवा ऐसे कई छोटे-छोटे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जिनका मतलब पहली बार सुनने वाले व्यक्ति के लिए समझना मुश्किल हो सकता है। खास बात यह है कि इनमें से कई शब्द अब सोशल मीडिया की दुनिया से निकलकर आम बातचीत और सार्वजनिक चर्चाओं तक पहुंच चुके हैं। मीम्स, इंस्टाग्राम रील्स, शॉर्ट वीडियो और ऑनलाइन कम्युनिटी ने Gen-Z स्लैंग को तेजी से…

भारत-नेपाल के बीच क्यों नहीं लगता वीजा-पासपोर्ट? जानिए सदियों पुराने रिश्ते से जुड़ी खुली सीमा की पूरी कहानी

भारत और नेपाल के रिश्ते सिर्फ दो पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सदियों से लोगों का आना-जाना, व्यापार, धार्मिक यात्राएं और पारिवारिक संबंध कायम रहे हैं। यही वजह है कि भारत और नेपाल की सीमा दुनिया की उन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में शामिल है, जहां सामान्य परिस्थितियों में दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के यहां जाने के लिए वीजा और पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती। यह व्यवस्था पहली नजर में भले ही असामान्य लगे, लेकिन इसके पीछे इतिहास, भूगोल, सामाजिक रिश्तों और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों की लंबी कहानी…

ग्लेशियर फटा तो मचेगी भारी तबाही! नेपाल के बाद भारत के इस राज्य को लेकर क्यों बढ़ी चिंता

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के आसपास अचानक आई बाढ़ ने देखते ही देखते बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में सैकड़ों लोग लापता बताए गए, जिनमें भारत से नेपाल पहुंचे पर्यटक भी शामिल थे। कई जगहों पर सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं बाढ़ के तेज बहाव में बह गईं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना के पीछे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर से बनी झील के अचानक फटने जैसी घटना को माना…

पिघलते ग्लेशियर, फटते बादल और टूटते पहाड़: हिमालय में क्यों बढ़ रही हैं फ्लैश फ्लड की घटनाएं?

हिमालयी क्षेत्र एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की भयावह तस्वीर पेश कर रहा है। नेपाल में 25 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ और जलसैलाब ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। सैकड़ों लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों घर क्षतिग्रस्त हो गए, मवेशी बह गए और कई इलाकों में सड़क तथा पुलों का नेटवर्क पूरी तरह टूट गया। आपदा की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का पूरा आकलन अभी तक नहीं हो पाया है। नेपाल की…

पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त किसे मिलेगी और किन किसानों को नहीं? जानें नियम और जरूरी शर्तें

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना यानी पीएम किसान देश के करोड़ों किसानों के लिए आर्थिक मदद का एक अहम जरिया है। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल कुल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम एक साथ खाते में नहीं भेजी जाती, बल्कि 2,000-2,000 रुपये की तीन अलग-अलग किस्तों में किसानों को उपलब्ध कराई जाती है। इस सहायता का उद्देश्य खेती से जुड़े छोटे-बड़े खर्चों में किसानों को आर्थिक सहारा देना है। अब किसानों की नजर योजना की अगली यानी 24वीं किस्त पर है। किस्त जारी होने से पहले सबसे बड़ा…

चीनी के मामले में ब्राजील क्यों है दुनिया का बादशाह? जानिए उत्पादन से निर्यात तक की पूरी कहानी

भारत में इन दिनों चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। करीब एक महीने के भीतर खुदरा बाजार में चीनी के भाव में तेज उछाल देखने को मिला है। जुलाई में जहां कई जगह चीनी करीब 48 रुपये किलो बिक रही थी, वहीं अब कुछ बाजारों में इसका भाव 58 से 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में खुदरा कीमतें 70 रुपये प्रति किलो के आसपास बताई जा रही हैं। कीमतों में इस तेजी के पीछे त्योहारों से बढ़ी मांग, आपूर्ति से जुड़ी परेशानियां और बाजार में स्टॉक…

मच्छर सबको एक जैसा नहीं काटते, जानिए क्यों कुछ लोगों की तरफ ज्यादा खिंचे चले आते हैं

बरसात या उमस भरे मौसम में मच्छरों की परेशानी बढ़ जाती है। अक्सर एक ही कमरे में कई लोग बैठे होते हैं, लेकिन मच्छरों का निशाना बार-बार किसी एक व्यक्ति को ही बनता दिखाई देता है। वहीं उसके पास बैठा दूसरा व्यक्ति लगभग बेफिक्र रहता है। ऐसे में मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर मच्छर कुछ लोगों को ज्यादा क्यों काटते हैं? क्या इसके पीछे खून का ग्रुप है, शरीर की गंध है या फिर पसीना इसकी वजह बनता है? दरअसल, मच्छरों का किसी इंसान की तरफ आकर्षित होना महज संयोग नहीं है। ये कीड़े अपने आसपास मौजूद…

100 किलो गन्ने से चीनी ज्यादा फायदेमंद है या एथेनॉल? जानिए पूरा हिसाब

देश में इन दिनों चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। कई जगहों पर खुदरा बाजार में चीनी के भाव 60 से 70 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंचने की चर्चा है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए सरकार को आयात का सहारा लेने की जरूरत पड़ सकती है। सहकारी चीनी मिलों की संस्था NFCSF की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आयातित चीनी की शुरुआती खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती है। इसी बीच गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी चर्चा तेज है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल में एथेनॉल…

दार्जिलिंग का गोरखालैंड विवाद क्या है? अमित शाह ने कैसे खोजा स्थायी समाधान का रास्ता

दार्जिलिंग की पहाड़ियों में लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और प्रशासनिक मांगों को अब केंद्र सरकार नए तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रही है। गोरखा पहचान, राजनीतिक अधिकार, प्रशासनिक स्वायत्तता और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर दशकों से चले आ रहे विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहाड़ी क्षेत्र के नेताओं के साथ अहम बैठक की। बैठक में केंद्र की ओर से संकेत दिया गया कि सरकार अब इस पूरे मामले को किसी अस्थायी समझौते के बजाय स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में ले जाना चाहती है। सुकना में हुई इस बैठक की…

आर्थिक मोर्चे पर ईरान को घेरने की तैयारी में अमेरिका, बिना मिसाइल के कैसे दबाव बनाएगा ट्रंप? समझिए ‘इकोनॉमिक वॉर’ की पूरी रणनीति

अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब केवल मिसाइलों, युद्धपोतों और सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रह गया है। लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष में जब सैन्य दबाव से निर्णायक नतीजा हासिल करना मुश्किल साबित हुआ, तो अब आर्थिक मोर्चे को हथियार बनाने की कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ खड़े देशों को कड़े आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी देकर संकेत दिया है कि आगे की लड़ाई व्यापार, तेल, बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था के जरिए लड़ी जा सकती है। ईरान ने भी अमेरिका के इस रुख को…

1984 के सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार ने क्या किया था? जानिए दिल्ली के किन इलाकों में हिंसा के मामले, कौन-कौन से केस चले और क्या सजा मिली?

कांग्रेस के पूर्व सांसद और नेता सज्जन कुमार के निधन के बाद 1984 के सिख विरोधी दंगों की घटनाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। लंबे समय तक चले इन मामलों में सज्जन कुमार का नाम सबसे प्रमुख आरोपियों में रहा। दंगों के कई दशक बाद अदालतों में चली सुनवाई के दौरान कुछ मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया, जबकि कुछ में उन्हें राहत भी मिली। जेल में सजा काटते समय तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया। 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों में सज्जन कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कई…

20 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है सद्भावना दिवस? राजीव गांधी जयंती से जुड़ा है खास कनेक्शन, जानिए पूरी कहानी

हर साल 20 अगस्त को देशभर में सद्भावना दिवस मनाया जाता है। यह तारीख पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के रूप में भी महत्वपूर्ण है। सद्भावना दिवस का मूल उद्देश्य समाज में आपसी प्रेम, शांति, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। इस दिन लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में अलग-अलग धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच आपसी सम्मान और सहयोग बना रहना बेहद जरूरी है। सद्भावना दिवस किसी एक समुदाय या वर्ग तक सीमित संदेश नहीं देता। इसका मकसद पूरे समाज में…

कावेरी जल विवाद: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पानी को लेकर क्यों छिड़ी है दशकों पुरानी जंग?

दक्षिण भारत की कावेरी नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए खेती, पेयजल और अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। यही वजह है कि इस नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। सामान्य मानसून के दौरान स्थिति अपेक्षाकृत शांत रहती है, लेकिन जैसे ही बारिश कम होती है और जलाशयों में पानी घटता है, दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ जाता है। कावेरी जल विवाद का मूल सवाल यह है कि नदी में उपलब्ध पानी में किस राज्य का कितना अधिकार है और सूखे या…