जज ने पूछा- क्या मालखाने से उड़कर गया तमंचा:कानपुर का एनकाउंटर अदालत में झूठा निकला; 2 युवकों के पैर में मारी थी गोली

जज ने पूछा- क्या मालखाने से उड़कर गया तमंचा:कानपुर का एनकाउंटर अदालत में झूठा निकला; 2 युवकों के पैर में मारी थी गोली

कानपुर पुलिस चार साल पहले मुठभेड़ में दो युवकों को जेल भेजने के मामले में फंस गई है। अपर जिला जज की कोर्ट ने मुठभेड़ को संदिग्ध करार देते हुए आरोपियों को रिहा कर दिया। अदालत ने पुलिस टीम के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस कमिश्नर को भी आदेश दिया है कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पेश करें। खास बात यह है कि जो तमंचा आरोपियों के पास दिखाया गया वो 2014 में एक दूसरे मामले में बरामद किया गया था। कोर्ट के सीन के साथ मालखाने में जमा था। अदालत ने सवाल उठाया कि मालखाने में जमा तमंचे से से फायरिंग कैसे की जा सकती थी? अब विस्तार से पढ़िए… पुलिस का दावा- चेकिंग के दौरान भागे बाइक सवार, मुठभेड़ में अरेस्ट तारीख- 21 अक्टूबर, 2020
जगह- कानपुर का अरमापुर थाना नजीराबाद के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक ज्ञान सिंह ने 21 अक्टूबर, 2020 को थाना अरमापुर में एक मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार, दरोगा सुरजीत सिंह, सिपाही बालमुकुंद पटेल, हेड कॉन्स्टेबल ब्रजेश कुमार और जीप ड्राइवर अमित कुमार के साथ मरियमपुर के पास गाड़ियों की चेकिंग कर रहे थे। तभी काकादेव की तरफ से मोटरसाइकिल पर दो लोग निकले। उनको रोकने की कोशिश की गई तो दोनों मरियमपुर अस्पताल की ओर भागे। पुलिस ने पीछा किया तो बाइक सवार युवक विजय नगर चौराहे से मुड़ कर अरमापुर एस्टेट की ओर भागने लगे। इस बात की सूचना वायरलेस पर दी गई तो अरमापुर थाना के प्रभारी निरीक्षक अजीत कुमार वर्मा ने भी घेराबंदी की। घेराबंदी देख युवकों ने अरमापुर एस्टेट के अंदर बाइक मोड़ दी। 500 मीटर दूर तक पीछा करने पर पुलिस ने केंद्रीय विद्यालय के सामने चौराहे पर घेर लिया। सरेंडर करने की बात कहने पर युवकों ने फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में दोनों युवकों के पैर में गोली लगी। पुलिस ने दोनों को अरेस्ट कर अस्पताल में भर्ती कराया। पूछताछ में युवकों ने अपना नाम इंद्रा नगर कच्ची बस्ती निवासी अमित और कुंदन बताया था। आरोपियों के पास तमंचा और बाइक बरामद हुई थी। पुलिस की ऐसे खुली पोल तमंचे पर 2014 को सीजेएम कोर्ट की तरफ से सीन किया जाना लिखा था
बचाव पक्ष के अधिवक्ता रवि प्रकाश पाठक ने बताया, पुलिस ने अमित और कुंदन से बरामद तमंचा कोर्ट में जब पेश किया तो उसमें पहले से ही काले स्केच पेन से मई 2014 को कोर्ट द्वारा तमंचा सीन किया जाना दर्ज था। बचाव पक्ष ने कागजात पेश कर बताया कि सरकार बनाम ऋषभ श्रीवास्तव के मुकदमे में यह तमंचा दिखाया गया था। कोर्ट से अगस्त 2018 में अभियुक्तों को बरी किया जा चुका है। यह तमंचा मालखाने में होना चाहिए था और अपील की अवधि खत्म होने के बाद नष्ट हो जाना चाहिए था। यह तमंचा इस मुकदमे के अभियुक्तों के पास से कैसे बरामद हो गया? इसका जवाब किसी के पास नहीं था। पुलिस टीम पर रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश, 3 माह में रिपोर्ट मांगी
मामला एडीजे–21 विनय सिंह की कोर्ट में ट्रायल पर था। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 10 गवाह पेश किए गए। पुलिस कोर्ट में मुठभेड़ के साक्ष्य पेश नहीं कर पाई। चौराहे के सीसीटीवी फुटेज भी सबूत के तौर पर कोर्ट में नहीं दे पाई। लिहाजा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर जिला जज 21 विनय सिंह ने कोर्ट ने जेल में बंद आरोपी कुंदन को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए। अमित जमानत पर था, उसे भी दोषमुक्त कर दिया गया। जज ने कहा- पुलिस टीम ने मालखाने से अवैध तमंचा निकाल कर आरोपियों के पास से बरामदगी दिखा कर फर्जी मुकदमा दाखिल किया है। मालखाने में जमा तमंचा पुलिस टीम के पास कैसे पहुंचा, पुलिस कमिश्नर को जांच कराने के आदेश दिए। साथ की पुलिस कमिश्नर को नजीराबाद पुलिस टीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर तीन माह में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। ………………………….. ये खबर भी पढ़ें- हॉस्पिटल में नर्स की मौत, मां बोली- गैंगरेप कर मारा:शरीर पर खरोंच, कपड़े गायब थे; पुलिस बोली- शहबाज के प्यार में जहर खाया ‘जिस अस्पताल में मेरी बेटी 4 साल से काम कर रही थी, वहीं उससे गैंगरेप हुआ। अस्पताल के डॉक्टरों और वार्ड बॉय ने उसे जहर का इंजेक्शन देकर मार डाला। बिटिया की लाश मिली तो उसकी गर्दन पर खरोचें थीं। हाथ पर चोट के निशान थे। शरीर के निचले हिस्से के कपड़े गायब थे। उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि किसी ने उसके साथ जबरदस्ती गंदा काम किया हो।’ ये यूपी के प्रतापगढ़ की रहने वाली गुड़िया की मां का दर्द है। 21 साल की गुड़िया शहर के प्राइवेट अस्पताल में नर्स थी। 27 मार्च को ड्यूटी के वक्त उसकी मौत हो गई। वो दलित समुदाय से थी, इसलिए उसकी मौत के बाद से इलाके में तनाव है। पढ़ें पूरी खबर कानपुर पुलिस चार साल पहले मुठभेड़ में दो युवकों को जेल भेजने के मामले में फंस गई है। अपर जिला जज की कोर्ट ने मुठभेड़ को संदिग्ध करार देते हुए आरोपियों को रिहा कर दिया। अदालत ने पुलिस टीम के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस कमिश्नर को भी आदेश दिया है कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पेश करें। खास बात यह है कि जो तमंचा आरोपियों के पास दिखाया गया वो 2014 में एक दूसरे मामले में बरामद किया गया था। कोर्ट के सीन के साथ मालखाने में जमा था। अदालत ने सवाल उठाया कि मालखाने में जमा तमंचे से से फायरिंग कैसे की जा सकती थी? अब विस्तार से पढ़िए… पुलिस का दावा- चेकिंग के दौरान भागे बाइक सवार, मुठभेड़ में अरेस्ट तारीख- 21 अक्टूबर, 2020
जगह- कानपुर का अरमापुर थाना नजीराबाद के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक ज्ञान सिंह ने 21 अक्टूबर, 2020 को थाना अरमापुर में एक मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार, दरोगा सुरजीत सिंह, सिपाही बालमुकुंद पटेल, हेड कॉन्स्टेबल ब्रजेश कुमार और जीप ड्राइवर अमित कुमार के साथ मरियमपुर के पास गाड़ियों की चेकिंग कर रहे थे। तभी काकादेव की तरफ से मोटरसाइकिल पर दो लोग निकले। उनको रोकने की कोशिश की गई तो दोनों मरियमपुर अस्पताल की ओर भागे। पुलिस ने पीछा किया तो बाइक सवार युवक विजय नगर चौराहे से मुड़ कर अरमापुर एस्टेट की ओर भागने लगे। इस बात की सूचना वायरलेस पर दी गई तो अरमापुर थाना के प्रभारी निरीक्षक अजीत कुमार वर्मा ने भी घेराबंदी की। घेराबंदी देख युवकों ने अरमापुर एस्टेट के अंदर बाइक मोड़ दी। 500 मीटर दूर तक पीछा करने पर पुलिस ने केंद्रीय विद्यालय के सामने चौराहे पर घेर लिया। सरेंडर करने की बात कहने पर युवकों ने फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में दोनों युवकों के पैर में गोली लगी। पुलिस ने दोनों को अरेस्ट कर अस्पताल में भर्ती कराया। पूछताछ में युवकों ने अपना नाम इंद्रा नगर कच्ची बस्ती निवासी अमित और कुंदन बताया था। आरोपियों के पास तमंचा और बाइक बरामद हुई थी। पुलिस की ऐसे खुली पोल तमंचे पर 2014 को सीजेएम कोर्ट की तरफ से सीन किया जाना लिखा था
बचाव पक्ष के अधिवक्ता रवि प्रकाश पाठक ने बताया, पुलिस ने अमित और कुंदन से बरामद तमंचा कोर्ट में जब पेश किया तो उसमें पहले से ही काले स्केच पेन से मई 2014 को कोर्ट द्वारा तमंचा सीन किया जाना दर्ज था। बचाव पक्ष ने कागजात पेश कर बताया कि सरकार बनाम ऋषभ श्रीवास्तव के मुकदमे में यह तमंचा दिखाया गया था। कोर्ट से अगस्त 2018 में अभियुक्तों को बरी किया जा चुका है। यह तमंचा मालखाने में होना चाहिए था और अपील की अवधि खत्म होने के बाद नष्ट हो जाना चाहिए था। यह तमंचा इस मुकदमे के अभियुक्तों के पास से कैसे बरामद हो गया? इसका जवाब किसी के पास नहीं था। पुलिस टीम पर रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश, 3 माह में रिपोर्ट मांगी
मामला एडीजे–21 विनय सिंह की कोर्ट में ट्रायल पर था। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 10 गवाह पेश किए गए। पुलिस कोर्ट में मुठभेड़ के साक्ष्य पेश नहीं कर पाई। चौराहे के सीसीटीवी फुटेज भी सबूत के तौर पर कोर्ट में नहीं दे पाई। लिहाजा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर जिला जज 21 विनय सिंह ने कोर्ट ने जेल में बंद आरोपी कुंदन को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए। अमित जमानत पर था, उसे भी दोषमुक्त कर दिया गया। जज ने कहा- पुलिस टीम ने मालखाने से अवैध तमंचा निकाल कर आरोपियों के पास से बरामदगी दिखा कर फर्जी मुकदमा दाखिल किया है। मालखाने में जमा तमंचा पुलिस टीम के पास कैसे पहुंचा, पुलिस कमिश्नर को जांच कराने के आदेश दिए। साथ की पुलिस कमिश्नर को नजीराबाद पुलिस टीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर तीन माह में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। ………………………….. ये खबर भी पढ़ें- हॉस्पिटल में नर्स की मौत, मां बोली- गैंगरेप कर मारा:शरीर पर खरोंच, कपड़े गायब थे; पुलिस बोली- शहबाज के प्यार में जहर खाया ‘जिस अस्पताल में मेरी बेटी 4 साल से काम कर रही थी, वहीं उससे गैंगरेप हुआ। अस्पताल के डॉक्टरों और वार्ड बॉय ने उसे जहर का इंजेक्शन देकर मार डाला। बिटिया की लाश मिली तो उसकी गर्दन पर खरोचें थीं। हाथ पर चोट के निशान थे। शरीर के निचले हिस्से के कपड़े गायब थे। उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि किसी ने उसके साथ जबरदस्ती गंदा काम किया हो।’ ये यूपी के प्रतापगढ़ की रहने वाली गुड़िया की मां का दर्द है। 21 साल की गुड़िया शहर के प्राइवेट अस्पताल में नर्स थी। 27 मार्च को ड्यूटी के वक्त उसकी मौत हो गई। वो दलित समुदाय से थी, इसलिए उसकी मौत के बाद से इलाके में तनाव है। पढ़ें पूरी खबर   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर