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दिल्ली, नोएडा समेत दर्जन भर ठिकानों पर ED की रेड, रिटायर्ड IAS के लॉकर से मिले 20 करोड़ का डायमंड, गोल्ड और कैश बरामद
दिल्ली, नोएडा समेत दर्जन भर ठिकानों पर ED की रेड, रिटायर्ड IAS के लॉकर से मिले 20 करोड़ का डायमंड, गोल्ड और कैश बरामद <p style=”text-align: justify;”><strong>ED Raid Today News:</strong> दिल्ली, मेरठ, नोएडा और चंडीगढ़ सहित देश की दर्जन भर ठिकानों पर गुरुवार सुबह से ED की रेड जारी है. छापेमारी के दौरान ईडी की अधिकारियों ने एक रिटायर्ड IAS अफसर के घर से करोड़ों रुपये की डायमंड, गोल्ड, कैश और दस्तावेज बरामद किए हैं. इसमें एक पांच करोड़ का डायमंड भी शामिल है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सूत्रों के मुताबिक लोटस 300 हाउसिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ ED ने ये कार्रवाई की है. ईडी ने रिटायर्ड IAS एवं नोएडा अथॉरिटी के पूर्व CEO रहे मोहिंदर सिंह के चंडीगढ़ स्थित आवास पर छापेमारी की है. रेड में करीब एक करोड़ रुपये कैश, 12 करोड़ रुपये की डायमंड ज्वेलरी, सात करोड़ रुपये कीमत के सोने के जेवरात और केस से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>लोटस हाउसिंग प्रोजेक्ट घोटाले से जुड़ा है मामला </strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>बता दें कि ईडी ने जिस मामले में कार्रवाई की है वह 300 करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित है. इस मामले में ED ने मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया था. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong><a title=”Delhi Cabinet: दिल्ली की आतिशी कैबिनेट में ये नए चेहरों हो सकते हैं शामिल, क्या केजरीवाल सरकार के मंत्री होंगे रिपीट?” href=”https://www.abplive.com/states/delhi-ncr/delhi-atishi-cabinet-big-update-two-new-faces-can-included-arvind-kejriwal-ministers-repeated-2786478″ target=”_blank” rel=”noopener”>Delhi Cabinet: दिल्ली की आतिशी कैबिनेट में ये नए चेहरों हो सकते हैं शामिल, क्या केजरीवाल सरकार के मंत्री होंगे रिपीट?</a></strong></p>
<p style=”text-align: justify;”> </p>

अकाल तख्त साहिब पर 5 जत्थेदारों की बैठक:बागी शिअद गुट की माफी पर होगा विचार, अध्यक्ष सुखबीर की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अकाल तख्त साहिब पर 5 जत्थेदारों की बैठक:बागी शिअद गुट की माफी पर होगा विचार, अध्यक्ष सुखबीर की बढ़ सकती हैं मुश्किलें शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर बादल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। SAD बागी गुट की तरफ से श्री अकाल तख्त साहिब पर 1 जुलाई को दिए गए माफीनामे पर जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह की तरफ से सभी तख्तों के जत्थेदारों की सोमवार को बैठक बुला ली है। इस बैठक में सभी जत्थेदार मिल कर SAD बागी गुट की तरफ से दिए गए माफीनामे पर विचार करेंगे। अकाली दल के लिए भविष्य के लिए ये बैठक अहम होने जा रही है। हाशिए पर खड़े अकाली दल को लेकर सिर्फ बागी गुट ही नहीं, विरोधी पार्टियां भी चिंतित हैं। वहीं, बागी गुट खुल कर झूंदा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहा है। इसके अलावा अकाली दल के अध्यक्ष पद से सुखबीर बादल को हटाने की मांग भी प्रबल होती जा रही है। हालांकि इस पर अभी तक अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनकी तरफ से पदाधिकारियों की बैठकों को बुला कर अपना शक्ति प्रदर्शन जाहिर कर दिया गया है। माफीनामे के शब्द बढ़ा सकते हैं सुखबीर बादल की दिक्कतें श्री अकाल तख्त साहिब पर बागी गुट की तरफ से दिए गए माफी नामे में लिखी गई बातें अकाली दल सुखबीर बादल की मुश्किलों को बढ़ा सकते हैं। इस माफी नामे में बागी गुट ने साफ तौर पर सुखबीर बादल का साथ देने के लिए माफियां मांगी हैं, लेकिन इसके साथ ही बादल परिवार पर वे आरोप लगाए हैं, जिन्हें लेकर सिख समुदाय में लंबे समय से गुस्सा चला आ रहा है। जानें क्या लिखा है माफीनामे में बागी गुट के अकाल तख्त को सौंपे माफीनामे में कबूली 4 गलतियां… 1. वापस ली गई थी डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ शिकायत 2007 में सलाबतपुरा में सच्चा सौदा डेरा के प्रमुख गुरुमीत राम रहीम ने दसवें गुरू श्री गुरू गोबिंद सिंह जी की परंपरा का अनुकरण करते हुए उन्हीं कपड़ों को पहनकर अमृत छकाने का स्वांग रचाया था। उस वक्त इसके खिलाफ पुलिस केस भी दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में SAD सरकार ने सजा देने की जगह इस मामले को ही वापस ले लिया। 2. डेरा मुखी को सुखबीर बादल ने दिलवाई थी माफी श्री अकाल तख्त साहिब ने कार्रवाई करते हुए डेरा मुखी को सिख पंथ से निष्कासित कर दिया था। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए डेरा मुखी को माफी दिलवा दी थी। इसके बाद शिरोमणि अकाली दल और शिरोमणि कमेटी के नेतृत्व को सिख पंथ के गुस्से और नाराजगी को ध्यान में रखते हुए इस फैसले से पीछे हटना पड़ा। 3. बेअदबी की घटनाओं की सही जांच नहीं हुई 1 जून 2015 को कुछ तत्वों ने बुर्ज जवाहर सिंह वाला (फरीदकोट) के गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बीड़ चुराई। फिर 12 अक्टूबर 2015 को बरगाड़ी (फरीदकोट) के गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 110 अंग चुरा लिए व बाहर फेंक दिए। इससे सिख पंथ में भारी आक्रोश फैल गया। शिरोमणि अकाली दल सरकार और तत्कालीन गृह मंत्री सुखबीर सिंह बादल ने इस मामले की समय रहते जांच नहीं की। दोषियों को सजा दिलाने में सफल नहीं हुए। इससे पंजाब में हालात बिगड़ गए और कोटकपूरा और बहबल कलां में दुखद घटनाएं हुईं। 4. झूठे केसों में मारे गए सिखों को नहीं दे पाए इंसाफ SAD सरकार ने सुमेध सैनी को पंजाब का DGP नियुक्त किया गया। राज्य में फर्जी पुलिस मुठभेड़ों को अंजाम देकर सिख युवाओं की हत्या करने के लिए उन्हें जाना जाता था। पुलिसकर्मी इजहार आलम, जिन्होंने आलम सेना का गठन किया, उनकी पत्नी को टिकट दिया और उन्हें मुख्य संसदीय सचिव बनाया। बताना चाहते हैं कि 2012 में बनी SAD सरकार और पिछली अकाली सरकारों ने भी राज्य में झूठे पुलिस मुठभेड़ों की निष्पक्ष जांच करने और पीड़ितों को राहत देने के लिए एक आयोग बनाकर लोगों से किए वादे विफल रहे। चंदूमाजरा की अध्यक्षता में चल रहा विरोधी गुट सुखबीर बादल के खिलाफ अकाली दल के बागी गुट की अगुआई प्रेम सिंह चंदूमाजरा कर रहे हैं। उनके साथ सिकंदर मलूका, सुरजीत रखड़ा, बीबी जागीर कौर, प्रेम सिंह चंदूमाजरा, किरणजोत कौर, मनजीत सिंह, सुरिंदर भुल्लेवाल, गुरप्रताप वडाला, चरणजीत बराड़, हरिंदर पाल टोहरा और गगनजीत बरनाला भी हैं। अकाली दल में फूट की वजह, 2 बार लगातार सरकार, फिर 2 बार हार अकाली दल में फूट की वजह सत्ता से बाहर होना है। 2008 तक अकाली दल प्रकाश सिंह बादल के हाथों में था, जबकि 2012 के चुनाव भी प्रकाश सिंह बादल की अगुआई में हुए। 2002 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 62 सीटों के साथ सरकार बनाई थी, जबकि अकाली दल ने 34 सीटें हासिल की। 2007 में अकाली दल फिर सत्ता में आई और 67 पर जीत हासिल की। इस दौरान कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई। 2012 के चुनावों में पहली बार अकाली दल ने खुद को रिपीट किया। प्रकाश सिंह बादल दूसरी बार मुख्यमंत्री बने और अकाली दल ने 68 और कांग्रेस ने 44 सीटें हासिल की। इसके बाद 2017 में अकाली दल को सुखबीर बादल ने अपने हाथों में लिया। उन्होंने चुनाव की अगुआई की। मगर अकाली दल 18 सीटों पर सिमट गया और कांग्रेस ने 77 सीटें जीतकर सरकार बना ली। इस चुनाव में अकाली दल तीसरे नंबर पर रहा क्योंकि 20 सीटें आम आदमी पार्टी जीत गई। 2022 में अकाली दल की स्थिति और दयनीय हो गई। आप 92, कांग्रेस 18 और अकाली दल मात्र 3 सीटों पर सिमट गई। लोकसभा में लगातार 2 बार 4 सीट जीती, अब एक सीट आई 2004 लोकसभा चुनाव में पंजाब में कांग्रेस ने 8, बीजेपी एक और शिरोमणि अकाली दल ने एक 4 सीट जीती थीं। जबकि साल 2014 में कांग्रेस 3, भाजपा 2, शिरोमणि अकाली दल 4, AAP 4 सीटों पर विजेता बनी थी। इसी तरह साल 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने 8, शिरोमणि अकाली दल 2, भाजपा 2 और AAP को एक सीट मिली। इसी तरह साल 2024 के चुनाव में कांग्रेस 7, आप 3, शिरोमणि अकाली दल एक, दो आजाद उम्मीदवार जीते। झूंदा कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग हो रही ये गुट लगातार झूंदा कमेटी, जिसे 2022 में भी लागू करने की मांग उठी थी, पर विचार करने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि इसमें पार्टी प्रधान बदलने का प्रस्ताव नहीं है, लेकिन ये लिखा गया है कि पार्टी अध्यक्ष 10 साल के बाद रिपीट नहीं होगा। झूंदा रिपोर्ट पर जब अमल नहीं हुआ तो इसे सार्वजनिक नहीं किया गया था। झूंदा ने सार्वजनिक तौर पर बयान जारी किया था कि 117 विधानसभा हलकों में से 100 में जाकर उन्होंने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। इस रिपोर्ट में कुछ जानकारियां 2022 में सांझी की थी। तब अकाली नेताओं ने कहा था कि झूंदा रिपोर्ट में 42 सुझाव दिए गए हैं। पार्टी प्रधान को बदले जाने का रिपोर्ट में कहीं जिक्र नहीं है। लेकिन, भविष्य में पार्टी प्रधान के चुने जाने की तय सीमा जरूर तय की गई है। ये भी बात उठाई गई कि अकाली दल अपने मूल सिद्धांतों से भटका है और राज्य सत्ता में रहने के मकसद से कई कमियां आई हैं। 3 दशक से बादल परिवार का कब्जा शिरोमणि अकाली दल पर पिछले 3 दशक से बादल परिवार का कब्जा है। 1995 में सरदार प्रकाश सिंह बादल अकाली दल के प्रमुख बने थे। इस पद पर वे 2008 तक बने रहे। 2008 के बाद शिअद की कमान उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल के हाथ में आ गई। किसी जमाने में पंजाब ही नहीं भारतीय राजनीति में अकाली दल की तूती बोलती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका प्रभुत्व समाप्त होता चला गया। आलम ये है कि अब इसके पास लोकसभा की केवल एक सीट है। विधानसभा में भी इसका प्रभाव लगातार खत्म हो रहा है।

मोहाली में रुद्राक्ष कंपनी का लाइसेंस रद्द:विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों रुपए ठगे, मालिक पहले ही गिरफ्तार, रोजाना आ रही थी शिकायतें
मोहाली में रुद्राक्ष कंपनी का लाइसेंस रद्द:विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों रुपए ठगे, मालिक पहले ही गिरफ्तार, रोजाना आ रही थी शिकायतें पंजाब में मोहाली जिला प्रशासन ने फेज-एक स्थित नामी इमिग्रेशन कंपनी रुद्राक्ष ग्रुप ओवरसीज सॉल्यूशंस पर बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया है। कंपनी को 2015 में लाइसेंस जारी किया गया था, यह लाइसेंस 24 मार्च को रिन्यू होना था। हालांकि इससे पहले कंपनी के मालिक राकेश रिखी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उन पर लोगों को विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी का आरोप है। अभी तक उनकी जमानत नहीं हो पाई है। कंपनी के खिलाफ लगातार शिकायतें पुलिस के पास पहुंच रही है। दो बार लाइसेंस किया था सस्पेंड मोहाली प्रशासन के अनुसार, इससे पहले दो बार कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड किया गया था। यह कार्रवाई साल 2021 और 2022 में की गई थी। हालांकि इसके बाद लाइसेंस धारक के अनुरोध के आधार पर उसका लाइसेंस इस शर्त पर बहाल कर दिया गया कि भविष्य में उसकी फर्म के खिलाफ कोई शिकायत प्राप्त नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद आरोपी के कार्य में कोई सुधार नहीं हुआ और उसकी फके र्म के खिलाफ इस कार्यालय में शिकायतें प्राप्त होती रहीं हैं। अफसरों व पुलिस के साथ थे अच्छे लिंक जानकारों की माने तो रुद्राक्ष ग्रुप के मालिक और मुलाजिमों की मोहाली पुलिस व प्रशासन में काफी पैठ रही है। वहीं, उसके राजनीतिक संबंध भी रहे हैं। इस चीज का वह काफी समय तक उठाता रहा है। इसके अलावा इस ठगी के खेल में उसके कई नामी लोग सहयोगी है, लेकिन इस बार पंजाब पुलिस लोगों को विदेश भेजने के नाम पर ठगने वाले एजेंटों पर काफी सख्त थी। इस वजह से ही रुद्राक्ष ग्रुप पर केस हुआ है। पुलिस ने उसकी मर्सिडीज गाड़ी भी कब्जे में ली है। हालांकि आरोपी को अभी तक जमानत नहीं मिल पाई है। हालांकि पर्चा दर्ज हाेने के करीब तीन महीने बाद लाइसेंस रद्द हुआ है।