हरियाणा की पॉलिटिक्स में किसी वक्त दबदबा रखने वाला पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल का चौटाला परिवार 4 महीने बाद भी विधानसभा में मिली चुनावी हार से नहीं उबर पाया है। कभी लोकसभा-विधानसभा से लेकर सरपंच चुनाव तक चौटाला परिवार दखल रखता था। मगर, इस बार निकाय चुनाव से चौटाला परिवार पूरी तरह गायब है। चौटाला परिवार के दिग्गज नेता निकाय चुनाव को लेकर कहीं एक्टिव नहीं हैं। खासकर, अपने गढ़ सिरसा तक में ग्राउंड लेवल पर चौटाला परिवार के बड़े चेहरे नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, सिरसा नगर परिषद से इनेलो ने ओमप्रकाश कमेटीवाला और जजपा ने प्रवीन कुमार लक्की को चेयरमैन उम्मीदवार बनाया है। इनेलो से अभय चौटाला, सुनैना चौटाला, अर्जुन चौटाला, कर्ण चौटाला, आदित्य चौटाला और जजपा से अजय चौटाला, दुष्यंत चौटाला, दिग्विजय चौटाला बड़े चेहरे हैं। इनमें से किसी ने भी पार्टी उम्मीदवार के लिए कोई कैंपेन नहीं किया। बड़ी जनसभा तो दूर, ये नेता नुक्कड़ मीटिंग तक करने नहीं पहुंचे। यह स्थिति तब है जबकि निकाय चुनाव के लिए 3 दिन बाद 2 मार्च को वोटिंग होनी है। वहीं, इसके लिए प्रचार के लिए कल शाम तक का ही समय बचा है। चौटाला परिवार के सियासी दबदबे की पूरी कहानी… उपप्रधानमंत्री पद तक पहुंचे ताऊ देवीलाल
चौटाला परिवार की राजनीति की धुरी ताऊ देवीलाल गांव-देहात से उठकर देश की राजनीति के शिखर तक पहुंचे। वह 19 अक्टूबर 1989 से 21 जून 1991 तक भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। वहीं, 2 बार 21 जून 1977 से 28 जून 1979 और 17 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 1989 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रहे। चार बार सीएम रहे ओपी चौटाला
ताऊ देवीलाल के बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला भी हरियाणा के 5 बार सीएम रहे। ताऊ देवीलाल जब केंद्र की राजनीति में गए तो उन्होंने अपनी जगह ओपी चौटाला को मुख्यमंत्री बना दिया। ओपी चौटाला का 20 दिसंबर को गुरुग्राम के अस्पताल में निधन हो गया था। राजस्थान तक में जीते थे अजय चौटाला
ओपी चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने 1980 के दशक में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। वह राजस्थान में भी 2 बार विधायक रहे थे। पहले साल 1989 में दांता रामगढ़ और साल 1993 में नोहर से विधायक बने। इसके बाद अजय चौटाला साल 1999 में भिवानी से लोकसभा सांसद बने। साल 2004 में हरियाणा से राज्यसभा सांसद बने। 2009 में वह इनेलो की टिकट पर डबवाली से विधायक बने। अजय चौटाला के जेबीटी भर्ती घोटाले में जेल जाने के बाद उनकी पत्नी नैना चौटाला भी 2014 में डबवाली और फिर 2019 में बाढड़ा से विधायक रही। उनके बेटे दुष्यंत चौटाला साल 2014 से 2019 तक हिसार से लोकसभा सांसद रहे। फिर 2019 में जींद जिले के उचाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। ऐलनाबाद से 4 बार जीते अभय चौटाला
ओपी चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सिरसा जिले के ही गांव चौटाला के उपसरपंच के रूप में निर्वाचित होकर की। 2005 में चौटाला सिरसा जिला परिषद के अध्यक्ष बने। 2010 में वह अपने पिता ओमप्रकाश चौटाला और अपने भाई अजय सिंह चौटाला की गिरफ्तारी के बाद ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में विजयी हुए। 2014 में फिर से ऐलनाबाद से विधायक बने और 2019 तक हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। 2019 में फिर ऐलनाबाद से तीसरी बार जीते। इसके बाद किसान आंदोलन के चलते 2021 में इस्तीफा दे दिया। फिर हुए उपचुनाव में चौथी बार जीत हासिल की। मगर 2024 में ऐलनाबाद से हार गए। चौटाला परिवार का विस चुनाव में सिर्फ 2 सीटें जीत सका
अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान चौटाला परिवार का निराशाजनक ही प्रदर्शन रहा था। परिवार के छह सदस्य चुनाव लड़े, लेकिन मात्र 2 सदस्य ही विधानसभा में पहुंच पाए हैं। चौटाला परिवार में पूर्व सीएम स्व.ओपी चौटाला के भाई एवं पूर्व बिजली मंत्री रणजीत चौटाला रानियां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय मैदान में उतरे। मगर वह 36401 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, इनेलो की ओर से खुद अभय चौटाला चुनाव हार गए थे। वह ऐलनाबाद से लड़े और 62865 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे। उनके बेटे अर्जुन चौटाला रानियां और चचेरे भाई आदित्य चौटाला डबवाली से जीते थे। वहीं, जेजेपी का तो और भी बुरा हश्र हुआ। जेजेपी की तरफ से उचाना कलां से लड़े दुष्यंत चौटाला 7950 वोट लेकर पांचवें नंबर पर रहे थे। उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला डबवाली से जेजेपी की टिकट पर लड़े, लेकिन 35261 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे। 20 साल तक रहा है सिरसा नगर परिषद में राज
सिरसा नगर परिषद का गठन साल 1987 में हुआ था। इससे पहले यह नगरपालिका होती थी। इन 38 सालों में से 20 साल तक चौटाला परिवार का ही सिरसा नगर परिषद में एकछत्र राज रहा है। इन्हीं की पार्टी का कोई कार्यकर्ता नगर परिषद प्रधान के पद पर बैठता रहा है। साल 2016 में पहली बार भाजपा ने यहां प्रधान बनाया था। सिरसा के वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक नवदीप सेतिया बताते हैं कि पिछले दो विधानसभा चुनावों से इनेलो को काफी नुकसान हुआ है। कार्यकर्ता भी टूटे हैं। पूरे जोश के साथ चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की भी कमी रही है। इसी तरह जेजेपी भी विधानसभा चुनाव के परिणाम के झटके से उबरी नहीं है। उनके कार्यकर्ताओं में भी उत्साह की कमी है। कुछ चौटाला परिवार का भाजपा के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर भी रहा है। इसलिए निकाय चुनाव में इनकी भागीदारी सक्रिय नहीं दिख रही है। हरियाणा की पॉलिटिक्स में किसी वक्त दबदबा रखने वाला पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल का चौटाला परिवार 4 महीने बाद भी विधानसभा में मिली चुनावी हार से नहीं उबर पाया है। कभी लोकसभा-विधानसभा से लेकर सरपंच चुनाव तक चौटाला परिवार दखल रखता था। मगर, इस बार निकाय चुनाव से चौटाला परिवार पूरी तरह गायब है। चौटाला परिवार के दिग्गज नेता निकाय चुनाव को लेकर कहीं एक्टिव नहीं हैं। खासकर, अपने गढ़ सिरसा तक में ग्राउंड लेवल पर चौटाला परिवार के बड़े चेहरे नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, सिरसा नगर परिषद से इनेलो ने ओमप्रकाश कमेटीवाला और जजपा ने प्रवीन कुमार लक्की को चेयरमैन उम्मीदवार बनाया है। इनेलो से अभय चौटाला, सुनैना चौटाला, अर्जुन चौटाला, कर्ण चौटाला, आदित्य चौटाला और जजपा से अजय चौटाला, दुष्यंत चौटाला, दिग्विजय चौटाला बड़े चेहरे हैं। इनमें से किसी ने भी पार्टी उम्मीदवार के लिए कोई कैंपेन नहीं किया। बड़ी जनसभा तो दूर, ये नेता नुक्कड़ मीटिंग तक करने नहीं पहुंचे। यह स्थिति तब है जबकि निकाय चुनाव के लिए 3 दिन बाद 2 मार्च को वोटिंग होनी है। वहीं, इसके लिए प्रचार के लिए कल शाम तक का ही समय बचा है। चौटाला परिवार के सियासी दबदबे की पूरी कहानी… उपप्रधानमंत्री पद तक पहुंचे ताऊ देवीलाल
चौटाला परिवार की राजनीति की धुरी ताऊ देवीलाल गांव-देहात से उठकर देश की राजनीति के शिखर तक पहुंचे। वह 19 अक्टूबर 1989 से 21 जून 1991 तक भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। वहीं, 2 बार 21 जून 1977 से 28 जून 1979 और 17 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 1989 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रहे। चार बार सीएम रहे ओपी चौटाला
ताऊ देवीलाल के बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला भी हरियाणा के 5 बार सीएम रहे। ताऊ देवीलाल जब केंद्र की राजनीति में गए तो उन्होंने अपनी जगह ओपी चौटाला को मुख्यमंत्री बना दिया। ओपी चौटाला का 20 दिसंबर को गुरुग्राम के अस्पताल में निधन हो गया था। राजस्थान तक में जीते थे अजय चौटाला
ओपी चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने 1980 के दशक में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। वह राजस्थान में भी 2 बार विधायक रहे थे। पहले साल 1989 में दांता रामगढ़ और साल 1993 में नोहर से विधायक बने। इसके बाद अजय चौटाला साल 1999 में भिवानी से लोकसभा सांसद बने। साल 2004 में हरियाणा से राज्यसभा सांसद बने। 2009 में वह इनेलो की टिकट पर डबवाली से विधायक बने। अजय चौटाला के जेबीटी भर्ती घोटाले में जेल जाने के बाद उनकी पत्नी नैना चौटाला भी 2014 में डबवाली और फिर 2019 में बाढड़ा से विधायक रही। उनके बेटे दुष्यंत चौटाला साल 2014 से 2019 तक हिसार से लोकसभा सांसद रहे। फिर 2019 में जींद जिले के उचाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। ऐलनाबाद से 4 बार जीते अभय चौटाला
ओपी चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सिरसा जिले के ही गांव चौटाला के उपसरपंच के रूप में निर्वाचित होकर की। 2005 में चौटाला सिरसा जिला परिषद के अध्यक्ष बने। 2010 में वह अपने पिता ओमप्रकाश चौटाला और अपने भाई अजय सिंह चौटाला की गिरफ्तारी के बाद ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में विजयी हुए। 2014 में फिर से ऐलनाबाद से विधायक बने और 2019 तक हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। 2019 में फिर ऐलनाबाद से तीसरी बार जीते। इसके बाद किसान आंदोलन के चलते 2021 में इस्तीफा दे दिया। फिर हुए उपचुनाव में चौथी बार जीत हासिल की। मगर 2024 में ऐलनाबाद से हार गए। चौटाला परिवार का विस चुनाव में सिर्फ 2 सीटें जीत सका
अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान चौटाला परिवार का निराशाजनक ही प्रदर्शन रहा था। परिवार के छह सदस्य चुनाव लड़े, लेकिन मात्र 2 सदस्य ही विधानसभा में पहुंच पाए हैं। चौटाला परिवार में पूर्व सीएम स्व.ओपी चौटाला के भाई एवं पूर्व बिजली मंत्री रणजीत चौटाला रानियां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय मैदान में उतरे। मगर वह 36401 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, इनेलो की ओर से खुद अभय चौटाला चुनाव हार गए थे। वह ऐलनाबाद से लड़े और 62865 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे। उनके बेटे अर्जुन चौटाला रानियां और चचेरे भाई आदित्य चौटाला डबवाली से जीते थे। वहीं, जेजेपी का तो और भी बुरा हश्र हुआ। जेजेपी की तरफ से उचाना कलां से लड़े दुष्यंत चौटाला 7950 वोट लेकर पांचवें नंबर पर रहे थे। उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला डबवाली से जेजेपी की टिकट पर लड़े, लेकिन 35261 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे। 20 साल तक रहा है सिरसा नगर परिषद में राज
सिरसा नगर परिषद का गठन साल 1987 में हुआ था। इससे पहले यह नगरपालिका होती थी। इन 38 सालों में से 20 साल तक चौटाला परिवार का ही सिरसा नगर परिषद में एकछत्र राज रहा है। इन्हीं की पार्टी का कोई कार्यकर्ता नगर परिषद प्रधान के पद पर बैठता रहा है। साल 2016 में पहली बार भाजपा ने यहां प्रधान बनाया था। सिरसा के वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक नवदीप सेतिया बताते हैं कि पिछले दो विधानसभा चुनावों से इनेलो को काफी नुकसान हुआ है। कार्यकर्ता भी टूटे हैं। पूरे जोश के साथ चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की भी कमी रही है। इसी तरह जेजेपी भी विधानसभा चुनाव के परिणाम के झटके से उबरी नहीं है। उनके कार्यकर्ताओं में भी उत्साह की कमी है। कुछ चौटाला परिवार का भाजपा के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर भी रहा है। इसलिए निकाय चुनाव में इनकी भागीदारी सक्रिय नहीं दिख रही है। हरियाणा | दैनिक भास्कर
