हरियाणा में 2 मेयरों के चुनाव को कानूनी चुनौती:निर्वाचन आयोग ने निकाय विभाग से रिपोर्ट मांगी; 7 सवाल-जवाब से जानिए पूरा मामला

हरियाणा में 2 मेयरों के चुनाव को कानूनी चुनौती:निर्वाचन आयोग ने निकाय विभाग से रिपोर्ट मांगी; 7 सवाल-जवाब से जानिए पूरा मामला

हरियाणा में नए चुने 2 मेयरों के चुनाव पर कानूनी पेंच फंस गया है। इस संबंध में प्रदेश निर्वाचन आयोग ने शहरी निकाय विभाग को निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा गया है कि मेयर को लेकर आई कानूनी आपत्तियों को दूर किया जाए। आयोग ने शिकायत का निपटारा करने के बाद उसकी रिपोर्ट भी मांगी है। इस संबंध में आयोग को मिली शिकायत में अंबाला और सोनीपत के मेयर के उपचुनाव को कानूनी तौर पर गलत ठहराया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के 2 मौजूदा कानूनी प्रावधानों के कारण दोनों निगमों में मेयर पद का उप चुनाव नहीं कराया जा सकता था। 1.सवाल: अंबाला और सोनीपत में मेयर के उपचुनाव क्यों हुए?
जवाब: अंबाला से पिछली बार हरियाणा जन चेतना पार्टी (HJCP) की शक्तिरानी शर्मा मेयर बनीं थी। वहीं सोनीपत से कांग्रेस के निखिल मदान मेयर बने थे। पिछले साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में दोनों मेयर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने मदान को सोनीपत और शक्तिरानी को कालका से टिकट दी। जिसके बाद दोनों विधायक बन गए। इसके बाद दोनों निगमों में उपचुनाव कराने पड़े। 2. सवाल: दोनों निगमों में उपचुनाव कब हुए?
जवाब: प्रदेश में 5 फरवरी को निकाय चुनाव का नोटिफिकेशन हुआ। इसके बाद 2 मार्च को दोनों निगमों में उपचुनाव के लिए वोटिंग हुई। 12 मार्च को इसके नतीजे घोषित किए गए। 3. सवाल: दोनों निगमों में मेयर चुनाव कौन जीता?
जवाब: अंबाला में मेयर का उपचुनाव भाजपा उम्मीदवार शैलजा सचदेवा ने जीता। वहीं सोनीपत से राजीव जैन नए मेयर बने। इन दोनों को इसी महीने शपथ भी दिलाई जा चुकी है। 4. सवाल: उपचुनाव को लेकर कानूनी विवाद क्या हुआ?
जवाब: मेयर चुनाव के लिए हरियाणा नगर निगम एक्ट बना हुआ है। इस कानून की 2 धाराओं में मेयर के उपचुनाव के बारे में बताया गया है। 5. सवाल: क्या उपचुनाव से पहले इस बारे में शिकायत हुई थी?
जवाब: हां, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने 5 फरवरी को अंबाला-सोनीपत के मेयर पद पर उपचुनाव के लिए हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग को लीगल नोटिस भेजा था। इसमें हरियाणा नगर निगम एक्ट (1994) के आधार पर उपचुनाव न कराने को कहा गया था। इसके बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव करा दिया। 6. सवाल: आयोग ने सरकार को अब कार्रवाई के लिए क्यों कहा?
जवाब: एडवोकेट हेमंत कुमार ने लीगल नोटिस पर कार्रवाई न होने के बाद 12 मार्च को मतगणना शुरू होने के तुरंत बाद आयोग को मेयर उपचुनाव की कानूनी वैधता और वैधानिक मान्यता पर पत्र भेजा था। निर्वाचन आयोग ने इसका संज्ञान ले लिया। फिर इसे शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को कार्रवाई के लिए भेज दिया। 7.सवाल: अगर मेयर उपचुनाव गैरकानूनी हैं, तो फिर यह कानूनी कैसे माने जाएंगे।
जवाब: एडवोकेट हेमंत कुमार कहते हैं कि मेयर उपचुनाव की कानूनी मान्यता तभी होगी, जब विधानसभा में हरियाणा नगर निगम कानून,1994 की दो धाराओं 9(5) और 13(1) में तत्काल संशोधन किया जाएगा। इनमें मेयर के पद छोड़ने जैसी परिस्थिति में उपचुनाव को लेकर स्पष्ट प्रावधान करने होंगे। हरियाणा में नए चुने 2 मेयरों के चुनाव पर कानूनी पेंच फंस गया है। इस संबंध में प्रदेश निर्वाचन आयोग ने शहरी निकाय विभाग को निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा गया है कि मेयर को लेकर आई कानूनी आपत्तियों को दूर किया जाए। आयोग ने शिकायत का निपटारा करने के बाद उसकी रिपोर्ट भी मांगी है। इस संबंध में आयोग को मिली शिकायत में अंबाला और सोनीपत के मेयर के उपचुनाव को कानूनी तौर पर गलत ठहराया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के 2 मौजूदा कानूनी प्रावधानों के कारण दोनों निगमों में मेयर पद का उप चुनाव नहीं कराया जा सकता था। 1.सवाल: अंबाला और सोनीपत में मेयर के उपचुनाव क्यों हुए?
जवाब: अंबाला से पिछली बार हरियाणा जन चेतना पार्टी (HJCP) की शक्तिरानी शर्मा मेयर बनीं थी। वहीं सोनीपत से कांग्रेस के निखिल मदान मेयर बने थे। पिछले साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में दोनों मेयर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने मदान को सोनीपत और शक्तिरानी को कालका से टिकट दी। जिसके बाद दोनों विधायक बन गए। इसके बाद दोनों निगमों में उपचुनाव कराने पड़े। 2. सवाल: दोनों निगमों में उपचुनाव कब हुए?
जवाब: प्रदेश में 5 फरवरी को निकाय चुनाव का नोटिफिकेशन हुआ। इसके बाद 2 मार्च को दोनों निगमों में उपचुनाव के लिए वोटिंग हुई। 12 मार्च को इसके नतीजे घोषित किए गए। 3. सवाल: दोनों निगमों में मेयर चुनाव कौन जीता?
जवाब: अंबाला में मेयर का उपचुनाव भाजपा उम्मीदवार शैलजा सचदेवा ने जीता। वहीं सोनीपत से राजीव जैन नए मेयर बने। इन दोनों को इसी महीने शपथ भी दिलाई जा चुकी है। 4. सवाल: उपचुनाव को लेकर कानूनी विवाद क्या हुआ?
जवाब: मेयर चुनाव के लिए हरियाणा नगर निगम एक्ट बना हुआ है। इस कानून की 2 धाराओं में मेयर के उपचुनाव के बारे में बताया गया है। 5. सवाल: क्या उपचुनाव से पहले इस बारे में शिकायत हुई थी?
जवाब: हां, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने 5 फरवरी को अंबाला-सोनीपत के मेयर पद पर उपचुनाव के लिए हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग को लीगल नोटिस भेजा था। इसमें हरियाणा नगर निगम एक्ट (1994) के आधार पर उपचुनाव न कराने को कहा गया था। इसके बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव करा दिया। 6. सवाल: आयोग ने सरकार को अब कार्रवाई के लिए क्यों कहा?
जवाब: एडवोकेट हेमंत कुमार ने लीगल नोटिस पर कार्रवाई न होने के बाद 12 मार्च को मतगणना शुरू होने के तुरंत बाद आयोग को मेयर उपचुनाव की कानूनी वैधता और वैधानिक मान्यता पर पत्र भेजा था। निर्वाचन आयोग ने इसका संज्ञान ले लिया। फिर इसे शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को कार्रवाई के लिए भेज दिया। 7.सवाल: अगर मेयर उपचुनाव गैरकानूनी हैं, तो फिर यह कानूनी कैसे माने जाएंगे।
जवाब: एडवोकेट हेमंत कुमार कहते हैं कि मेयर उपचुनाव की कानूनी मान्यता तभी होगी, जब विधानसभा में हरियाणा नगर निगम कानून,1994 की दो धाराओं 9(5) और 13(1) में तत्काल संशोधन किया जाएगा। इनमें मेयर के पद छोड़ने जैसी परिस्थिति में उपचुनाव को लेकर स्पष्ट प्रावधान करने होंगे।   हरियाणा | दैनिक भास्कर