जालंधर| नकोदर रोड पर वीरवार को सिंघा गांव के सामने हुए एक्सीडेंट में चारों दोस्तों की जान चली गई। शनिवार को चौथे नाबालिग सूरज का भी बस्ती बावा खेल स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं अमृतसर के अस्पताल में भर्ती सूरज को मौत से पहले उसके बाकी साथियों ने आखिरी वीडियो कॉल कर देखा तो सबकी आंखें छलक पड़ीं। बेसुध पड़े अपने मित्र को देखते ही उनकी आंखें नम हो गईं। मानों दोस्ती की सारी यादें आंखों के सामने से एक झटके में गुजर गईं हों। इस आखिरी वीडियो कॉल को सूरज के साथियों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और फिर इसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किया। दोस्तों ने उसे अपने अंदाज में आखिरी विदाई दी। इस दौरान मां कमलेश, बहन सोनिया और भाई हैप्पी का भी रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों ने बताया िक सूरज बड़ा आदमी बनना चाहता था। संस्कार के समय राज नगर के लोगों व दोस्त भी गम में डूबे दिखाई दिए। साथियों ने बताया कि चारों बहुत हंसमुख थे। देर शाम इक्ट्ठे उठते-बैठते, खेलते थे। अब ये दिन कभी वापस न आ पाएंगे। इस बीच राज नगर की गलियों में खेलने वाले सूरज, कृष, एकम और जश्न को उनके बाकी दोस्त अब मिस कर रहे हैं। वाकई जिन परिवारों के चिराग उजड़े, उनके चेहरे की मुस्कान भी कहीं खो सी गई है। शायद ही अब यह वापस आ पाए। वीडियो कॉल पर सूरज को देखते उसके अन्य साथी मित्र। जालंधर| नकोदर रोड पर वीरवार को सिंघा गांव के सामने हुए एक्सीडेंट में चारों दोस्तों की जान चली गई। शनिवार को चौथे नाबालिग सूरज का भी बस्ती बावा खेल स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं अमृतसर के अस्पताल में भर्ती सूरज को मौत से पहले उसके बाकी साथियों ने आखिरी वीडियो कॉल कर देखा तो सबकी आंखें छलक पड़ीं। बेसुध पड़े अपने मित्र को देखते ही उनकी आंखें नम हो गईं। मानों दोस्ती की सारी यादें आंखों के सामने से एक झटके में गुजर गईं हों। इस आखिरी वीडियो कॉल को सूरज के साथियों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और फिर इसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किया। दोस्तों ने उसे अपने अंदाज में आखिरी विदाई दी। इस दौरान मां कमलेश, बहन सोनिया और भाई हैप्पी का भी रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों ने बताया िक सूरज बड़ा आदमी बनना चाहता था। संस्कार के समय राज नगर के लोगों व दोस्त भी गम में डूबे दिखाई दिए। साथियों ने बताया कि चारों बहुत हंसमुख थे। देर शाम इक्ट्ठे उठते-बैठते, खेलते थे। अब ये दिन कभी वापस न आ पाएंगे। इस बीच राज नगर की गलियों में खेलने वाले सूरज, कृष, एकम और जश्न को उनके बाकी दोस्त अब मिस कर रहे हैं। वाकई जिन परिवारों के चिराग उजड़े, उनके चेहरे की मुस्कान भी कहीं खो सी गई है। शायद ही अब यह वापस आ पाए। वीडियो कॉल पर सूरज को देखते उसके अन्य साथी मित्र। पंजाब | दैनिक भास्कर
