<p style=”text-align: justify;”><strong>Chaitra Navratri 2025:</strong> दिल्ली के करोल बाग के पास स्थित झंडेवालान देवी मंदिर भक्तों की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. यह मंदिर न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे भारत में प्रसिद्ध है. </p>
<p style=”text-align: justify;”>खासतौर पर नवरात्रि के दौरान यहां का नज़ारा बेहद भव्य और भक्तिमय होता है. माता के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु यहां एकत्रित होते हैं, जिनमें से कई दूर-दराज़ के क्षेत्रों और विदेशों से भी आते हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मंदिर का ऐतिहासिक महत्व</strong><br />झंडेवालान मंदिर का इतिहास 18वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है. ऐसा कहा जाता है कि एक व्यापारी, बद्री दास को सपने में देवी मां के दर्शन हुए थे. इसके बाद उन्होंने यहां खुदाई करवाई, जिससे देवी की मूर्ति प्राप्त हुई. इसके बाद इस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, जो आज भी भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बना हुआ है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>नवरात्रि में विशेष आयोजन</strong><br />नवरात्रि के दौरान मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है. माता के दरबार को फूलों, रंगीन रोशनी और पारंपरिक सजावट से सुशोभित किया जाता है. टोकरी में रंग-बिरंगे फूल सजे होते हैं, और मां के दरबार की साज-सज्जा मनमोहक होती है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>झंडेवालान मंदिर के पुजारी विनोद प्रसाद, एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन कलश पूजन, चैत्र मां का पूजन और गंगाजल से स्नान कराया जाता है. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है, जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होकर 6 अप्रैल तक चलेगी. नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है, जिसमें कलश पूजन, मंत्रोच्चार और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है. हर दिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें सुबह से ही देखी जा सकती हैं. कई श्रद्धालु सुबह 4 बजे से ही लाइन में खड़े होते हैं और करीब दो घंटे के इंतजार के बाद माता के दर्शन कर पाते हैं. मंदिर परिसर के बाहर तक लगभग एक किलोमीटर लंबी कतार लगी होती है. हालांकि, प्रशासन की ओर से भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, ताकि किसी को कोई असुविधा न हो. श्रद्धालु लगभग 30-40 सेकंड तक माता के दर्शन कर सकते हैं, जिसके बाद उन्हें आगे बढ़ना होता है. लेकिन इस थोड़े से समय में भी भक्तों को देवी की उपस्थिति का गहरा अनुभव होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>भक्तों की भावनाएं</strong><br />झंडेवालान मंदिर में आने वाले भक्त अपनी-अपनी मनोकामनाओं को लेकर यहां पहुंचते हैं. कई भक्तों का मानना है कि माता उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं. एक पिता ने अपने दुबई में मौजूद बेटे को वीडियो कॉल के जरिए माता के दर्शन करवाए और कहा कि नवरात्रि का यह शुभ अवसर हिंदू समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. एक अन्य भक्त ने बताया, “माता के दरबार की भव्यता देखकर मन प्रसन्न हो गया. यहां की व्यवस्था भी बहुत अच्छी है, जिससे दर्शन आसानी से हो रहे हैं. हर बार जो भी मांगा है, माता ने दिया है. बस यही प्रार्थना है कि माता सबकी झोली खुशियों से भर दें.”</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मंदिर तक कैसे पहुंचे?</strong><br />मंदिर दिल्ली के मध्य में स्थित है, इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान है. श्रद्धालु दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन के झंडेवालान स्टेशन पर उतरकर पैदल या ऑटो से मंदिर तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा बस या निजी वाहन से भी यहां आसानी से आया जा सकता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>नवरात्रि में भक्तों के लिए संदेश</strong><br />झंडेवालान देवी मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और शक्ति का प्रतीक भी है. नवरात्रि के दौरान माता की कृपा प्राप्त करने का यह एक विशेष अवसर होता है, जब हर भक्त उनके चरणों में अपने जीवन की खुशहाली की प्रार्थना करता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>जो भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं, वे यहां से आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा लेकर जाते हैं. यही कारण है कि झंडेवालान देवी मंदिर सदियों से आस्था का केंद्र बना हुआ है और भविष्य में भी बना रहेगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”><iframe title=”YouTube video player” src=”https://www.youtube.com/embed/n5Yq-iFlFdM?si=JhL1_1dRlBtKkIW-” width=”560″ height=”315″ frameborder=”0″ allowfullscreen=”allowfullscreen”></iframe></p> <p style=”text-align: justify;”><strong>Chaitra Navratri 2025:</strong> दिल्ली के करोल बाग के पास स्थित झंडेवालान देवी मंदिर भक्तों की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है. यह मंदिर न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे भारत में प्रसिद्ध है. </p>
<p style=”text-align: justify;”>खासतौर पर नवरात्रि के दौरान यहां का नज़ारा बेहद भव्य और भक्तिमय होता है. माता के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु यहां एकत्रित होते हैं, जिनमें से कई दूर-दराज़ के क्षेत्रों और विदेशों से भी आते हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मंदिर का ऐतिहासिक महत्व</strong><br />झंडेवालान मंदिर का इतिहास 18वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है. ऐसा कहा जाता है कि एक व्यापारी, बद्री दास को सपने में देवी मां के दर्शन हुए थे. इसके बाद उन्होंने यहां खुदाई करवाई, जिससे देवी की मूर्ति प्राप्त हुई. इसके बाद इस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, जो आज भी भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बना हुआ है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>नवरात्रि में विशेष आयोजन</strong><br />नवरात्रि के दौरान मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है. माता के दरबार को फूलों, रंगीन रोशनी और पारंपरिक सजावट से सुशोभित किया जाता है. टोकरी में रंग-बिरंगे फूल सजे होते हैं, और मां के दरबार की साज-सज्जा मनमोहक होती है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>झंडेवालान मंदिर के पुजारी विनोद प्रसाद, एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन कलश पूजन, चैत्र मां का पूजन और गंगाजल से स्नान कराया जाता है. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है, जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होकर 6 अप्रैल तक चलेगी. नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है, जिसमें कलश पूजन, मंत्रोच्चार और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है. हर दिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें सुबह से ही देखी जा सकती हैं. कई श्रद्धालु सुबह 4 बजे से ही लाइन में खड़े होते हैं और करीब दो घंटे के इंतजार के बाद माता के दर्शन कर पाते हैं. मंदिर परिसर के बाहर तक लगभग एक किलोमीटर लंबी कतार लगी होती है. हालांकि, प्रशासन की ओर से भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, ताकि किसी को कोई असुविधा न हो. श्रद्धालु लगभग 30-40 सेकंड तक माता के दर्शन कर सकते हैं, जिसके बाद उन्हें आगे बढ़ना होता है. लेकिन इस थोड़े से समय में भी भक्तों को देवी की उपस्थिति का गहरा अनुभव होता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>भक्तों की भावनाएं</strong><br />झंडेवालान मंदिर में आने वाले भक्त अपनी-अपनी मनोकामनाओं को लेकर यहां पहुंचते हैं. कई भक्तों का मानना है कि माता उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं. एक पिता ने अपने दुबई में मौजूद बेटे को वीडियो कॉल के जरिए माता के दर्शन करवाए और कहा कि नवरात्रि का यह शुभ अवसर हिंदू समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. एक अन्य भक्त ने बताया, “माता के दरबार की भव्यता देखकर मन प्रसन्न हो गया. यहां की व्यवस्था भी बहुत अच्छी है, जिससे दर्शन आसानी से हो रहे हैं. हर बार जो भी मांगा है, माता ने दिया है. बस यही प्रार्थना है कि माता सबकी झोली खुशियों से भर दें.”</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मंदिर तक कैसे पहुंचे?</strong><br />मंदिर दिल्ली के मध्य में स्थित है, इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान है. श्रद्धालु दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन के झंडेवालान स्टेशन पर उतरकर पैदल या ऑटो से मंदिर तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा बस या निजी वाहन से भी यहां आसानी से आया जा सकता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>नवरात्रि में भक्तों के लिए संदेश</strong><br />झंडेवालान देवी मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और शक्ति का प्रतीक भी है. नवरात्रि के दौरान माता की कृपा प्राप्त करने का यह एक विशेष अवसर होता है, जब हर भक्त उनके चरणों में अपने जीवन की खुशहाली की प्रार्थना करता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>जो भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं, वे यहां से आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा लेकर जाते हैं. यही कारण है कि झंडेवालान देवी मंदिर सदियों से आस्था का केंद्र बना हुआ है और भविष्य में भी बना रहेगा.</p>
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