यूपी की जेलें बन रहीं मिसाल, BPRD ने की तारीफ:देश भर की जेलों की बेस्ट प्रैक्टिस पर बीपीआरडी ने जारी की रिपोर्ट

यूपी की जेलें बन रहीं मिसाल, BPRD ने की तारीफ:देश भर की जेलों की बेस्ट प्रैक्टिस पर बीपीआरडी ने जारी की रिपोर्ट

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) ने उत्तर प्रदेश की जेलों ने सुधार और नवाचार के क्षेत्र में किए गए कामों की तारीफ की है।बीपीआरडी की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में यूपी की जेलों को देश भर में बेहतरीन काम के लिए मिसाल बताया है। यहां बंदियों को सजा के साथ-साथ नई जिंदगी का मौका दिया जा रहा है। एक जेल एक उत्पाद से लेकर स्किल ट्रेनिंग और शिक्षा तक, यूपी ने जेलों को बदलाव का केंद्र बना दिया, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। एक जेल एक उत्पाद’ योजना को सराहा उत्तर प्रदेश की जेलों ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरणा लेकर “एक जेल एक उत्पाद” (OJOP) नाम की योजना शुरू की है। इसके तहत 22 जेलों में बंदी अपने हाथों से अलग-अलग चीजें बना रहे हैं। मसलन, ज्ञानपुर जेल में टफ्टेड कारपेट, मैनपुरी जेल में तारकशी कला, आगरा जेल में जूते, फर्रुखाबाद जेल में ब्लॉक प्रिंटिंग और बहराइच जेल में गेहूं की भूसी से पेंटिंग बनाई जा रही है। इन चीजों को जेल के बाहर बेचा जाता है, जिससे बंदियों को काम मिलता है। यह योजना बंदियों की प्रतिभा को भी सामने ला रही है। कौशल सिखाकर बदली जिंदगी जेलों में कौशल प्रशिक्षण का भी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत 2022 से अब तक 15,833 बंदियों को सिलाई, डाटा एंट्री, इलेक्ट्रिशियन, मशरूम की खेती और जूट से सामान बनाने की ट्रेनिंग दी गई है। यह सब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन व कुछ गैर-सरकारी संगठनों की मदद से हो रहा है। ट्रेनिंग के बाद कई बंदी जेल से निकलकर अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। इसके अलावा, जेल के बाहर बने स्टॉल्स पर उनके बनाए सामान बिकते हैं। पढ़ाई का मौका, नई शुरुआत यूपी की जेलों में “Each One Teach One” नाम की एक खास पहल चल रही है। इसमें पढ़े-लिखे बंदियों को दूसरों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती है और इसके बदले उन्हें पैसे मिलते हैं। जेल में बेसिक शिक्षा परिषद के टीचर आते हैं, जो बच्चों की तरह बंदियों को पढ़ाते हैं। 5वीं और 8वीं कक्षा के लिए नाम लिखवाया जाता है और पास होने पर सर्टिफिकेट मिलता है, जिसमें जेल का नाम नहीं लिखा होता। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए भी इंतजाम है। IGNOU और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के सेंटर जेलों में खोले गए हैं। हाई स्कूल के बंदियों को “परीक्षा पे चर्चा” में हिस्सा लेने का मौका मिलता है और अच्छे नंबर लाने पर सम्मान भी दिया जाता है। खास तौर पर महिला बंदियों के लिए 10 से ज्यादा जेलों में स्मार्ट बोर्ड लगाकर पढ़ाई कराई जा रही है। महिलाओं के लिए सुविधा, बच्चों को पढ़ाई का भी इंतजाम महिला बंदियों के लिए जेलों में सैनिटरी पैड की मशीन और उसे जलाने की सुविधा दी गई है। उनके छोटे बच्चों को जेल में ही प्रेप और नर्सरी की पढ़ाई कराई जाती है। कुछ जेलों में बच्चों को बाहर स्कूल भेजने और आंगनवाड़ी सेंटर खोलने का भी इंतजाम है। ट्रांसजेंडर बंदियों के लिए अलग कमरे और टॉयलेट बनाए गए हैं। जेल स्टाफ को उनके साथ अच्छे बर्ताव का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो। यह सब मॉडल प्रिजन एक्ट 2023 के नियमों के हिसाब से किया जा रहा है। खेल और सेहत का ध्यान बंदियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए “जेल प्रीमियर लीग” शुरू की गई है। इसमें खेल-कूद की प्रतियोगिताएं होती हैं। बसंत पंचमी के मौके पर एक हफ्ते तक खेल आयोजन किए जाते हैं, जिससे उनका मन बहलता है और तनाव कम होता है। साफ-सफाई के लिए भी आगे आ रहे कैदी फतेहगढ़ जेल को पर्यावरण के लिए ISO सर्टिफिकेट मिला है। वहां 8 एकड़ में एक बड़ा तालाब बनाया गया है, जो जेल को हरा-भरा बनाता है। नैनी और आगरा जेल में बंदी साबुन और फिनायल बनाते हैं, जिसे दूसरी जेलों में साफ-सफाई के लिए भेजा जाता है। इससे जेलें साफ रहती हैं और बंदियों को काम भी मिलता है। बंदियों की अपनी कमाई का भी रास्ता यूपी की 21 जेलों में सहकारी समितियां बनाई गई हैं। इसमें बंदी खुद पैसे लगाते हैं और काम करके मुनाफा कमाते हैं। नैनी जेल में 44 लाख रुपये और वाराणसी जेल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी जमा हो चुकी है। ये समितियां बंदियों को मेहनत का फल देती हैं और 15% मुनाफा जेल के कल्याण के लिए रखा जाता है। यह सिस्टम इतना खास है कि इसमें जेल अफसर सिर्फ निगरानी करते हैं, बाकी फैसले बंदी खुद लेते हैं। इस बारे में डीजी जेल पीवी रामाशास्त्री ने बताया कि देश भर में जिन जेलों में अच्छा काम होता है, उनकी रिपोर्ट बीपीआरडी तैयार करती है। मुझे खुशी है कि यूपी में जो मेहनत की गई इसका परिणाम सामने है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) ने उत्तर प्रदेश की जेलों ने सुधार और नवाचार के क्षेत्र में किए गए कामों की तारीफ की है।बीपीआरडी की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में यूपी की जेलों को देश भर में बेहतरीन काम के लिए मिसाल बताया है। यहां बंदियों को सजा के साथ-साथ नई जिंदगी का मौका दिया जा रहा है। एक जेल एक उत्पाद से लेकर स्किल ट्रेनिंग और शिक्षा तक, यूपी ने जेलों को बदलाव का केंद्र बना दिया, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। एक जेल एक उत्पाद’ योजना को सराहा उत्तर प्रदेश की जेलों ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरणा लेकर “एक जेल एक उत्पाद” (OJOP) नाम की योजना शुरू की है। इसके तहत 22 जेलों में बंदी अपने हाथों से अलग-अलग चीजें बना रहे हैं। मसलन, ज्ञानपुर जेल में टफ्टेड कारपेट, मैनपुरी जेल में तारकशी कला, आगरा जेल में जूते, फर्रुखाबाद जेल में ब्लॉक प्रिंटिंग और बहराइच जेल में गेहूं की भूसी से पेंटिंग बनाई जा रही है। इन चीजों को जेल के बाहर बेचा जाता है, जिससे बंदियों को काम मिलता है। यह योजना बंदियों की प्रतिभा को भी सामने ला रही है। कौशल सिखाकर बदली जिंदगी जेलों में कौशल प्रशिक्षण का भी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत 2022 से अब तक 15,833 बंदियों को सिलाई, डाटा एंट्री, इलेक्ट्रिशियन, मशरूम की खेती और जूट से सामान बनाने की ट्रेनिंग दी गई है। यह सब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन व कुछ गैर-सरकारी संगठनों की मदद से हो रहा है। ट्रेनिंग के बाद कई बंदी जेल से निकलकर अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। इसके अलावा, जेल के बाहर बने स्टॉल्स पर उनके बनाए सामान बिकते हैं। पढ़ाई का मौका, नई शुरुआत यूपी की जेलों में “Each One Teach One” नाम की एक खास पहल चल रही है। इसमें पढ़े-लिखे बंदियों को दूसरों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती है और इसके बदले उन्हें पैसे मिलते हैं। जेल में बेसिक शिक्षा परिषद के टीचर आते हैं, जो बच्चों की तरह बंदियों को पढ़ाते हैं। 5वीं और 8वीं कक्षा के लिए नाम लिखवाया जाता है और पास होने पर सर्टिफिकेट मिलता है, जिसमें जेल का नाम नहीं लिखा होता। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए भी इंतजाम है। IGNOU और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के सेंटर जेलों में खोले गए हैं। हाई स्कूल के बंदियों को “परीक्षा पे चर्चा” में हिस्सा लेने का मौका मिलता है और अच्छे नंबर लाने पर सम्मान भी दिया जाता है। खास तौर पर महिला बंदियों के लिए 10 से ज्यादा जेलों में स्मार्ट बोर्ड लगाकर पढ़ाई कराई जा रही है। महिलाओं के लिए सुविधा, बच्चों को पढ़ाई का भी इंतजाम महिला बंदियों के लिए जेलों में सैनिटरी पैड की मशीन और उसे जलाने की सुविधा दी गई है। उनके छोटे बच्चों को जेल में ही प्रेप और नर्सरी की पढ़ाई कराई जाती है। कुछ जेलों में बच्चों को बाहर स्कूल भेजने और आंगनवाड़ी सेंटर खोलने का भी इंतजाम है। ट्रांसजेंडर बंदियों के लिए अलग कमरे और टॉयलेट बनाए गए हैं। जेल स्टाफ को उनके साथ अच्छे बर्ताव का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो। यह सब मॉडल प्रिजन एक्ट 2023 के नियमों के हिसाब से किया जा रहा है। खेल और सेहत का ध्यान बंदियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए “जेल प्रीमियर लीग” शुरू की गई है। इसमें खेल-कूद की प्रतियोगिताएं होती हैं। बसंत पंचमी के मौके पर एक हफ्ते तक खेल आयोजन किए जाते हैं, जिससे उनका मन बहलता है और तनाव कम होता है। साफ-सफाई के लिए भी आगे आ रहे कैदी फतेहगढ़ जेल को पर्यावरण के लिए ISO सर्टिफिकेट मिला है। वहां 8 एकड़ में एक बड़ा तालाब बनाया गया है, जो जेल को हरा-भरा बनाता है। नैनी और आगरा जेल में बंदी साबुन और फिनायल बनाते हैं, जिसे दूसरी जेलों में साफ-सफाई के लिए भेजा जाता है। इससे जेलें साफ रहती हैं और बंदियों को काम भी मिलता है। बंदियों की अपनी कमाई का भी रास्ता यूपी की 21 जेलों में सहकारी समितियां बनाई गई हैं। इसमें बंदी खुद पैसे लगाते हैं और काम करके मुनाफा कमाते हैं। नैनी जेल में 44 लाख रुपये और वाराणसी जेल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी जमा हो चुकी है। ये समितियां बंदियों को मेहनत का फल देती हैं और 15% मुनाफा जेल के कल्याण के लिए रखा जाता है। यह सिस्टम इतना खास है कि इसमें जेल अफसर सिर्फ निगरानी करते हैं, बाकी फैसले बंदी खुद लेते हैं। इस बारे में डीजी जेल पीवी रामाशास्त्री ने बताया कि देश भर में जिन जेलों में अच्छा काम होता है, उनकी रिपोर्ट बीपीआरडी तैयार करती है। मुझे खुशी है कि यूपी में जो मेहनत की गई इसका परिणाम सामने है।   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर