<p style=”text-align: justify;”><strong>Chhattisgarh Bypoll 2024 Schedule:</strong> छत्तीसगढ़ की एक विधानसभा सीट रायपुर सिटी साउथ पर 13 नवंबर को मतदान होने जा रहा है. चुनाव आयोग ने देश के विभिन्न राज्यों में खाली सीटों पर होने वाले उपचुनाव के तारीखों की घोषणा मंगलवार को कर दी है. यहां वोटों की गिनती 23 नवंबर को होगी. उसी दिन नतीजों की घोषणा भी हो जाएगी. </p> <p style=”text-align: justify;”><strong>Chhattisgarh Bypoll 2024 Schedule:</strong> छत्तीसगढ़ की एक विधानसभा सीट रायपुर सिटी साउथ पर 13 नवंबर को मतदान होने जा रहा है. चुनाव आयोग ने देश के विभिन्न राज्यों में खाली सीटों पर होने वाले उपचुनाव के तारीखों की घोषणा मंगलवार को कर दी है. यहां वोटों की गिनती 23 नवंबर को होगी. उसी दिन नतीजों की घोषणा भी हो जाएगी. </p> छत्तीसगढ़ Uttarakhand: कार्बेट टाइगर रिजर्व की 48 वर्षों तक सेवा करने वाली हथिनी गोमती का निधन, प्रबंधन ने जताया शोक
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कब्र में सोया क्रूर औरंगजेब, बाहर सियासी बयानबाजी तेज, किसने क्या कहा?
कब्र में सोया क्रूर औरंगजेब, बाहर सियासी बयानबाजी तेज, किसने क्या कहा? <p style=”text-align: justify;”><strong>Aurangzeb Row:</strong> औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद बढ़ गया है. वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रदर्शन रहे हैं. बजरंग दल ने यहां तक कहा है कि अगर शासन की तरफ से कुछ नहीं किया गया तो वे खुद कारसेवा करके कब्र को हटा देंगे. बजरंग दल की मांग को कोई सही तो कोई गलत ठहरा रहा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इसको लेकर ठनी हुई है. वहीं, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बयान जारी कर इस पर सरकार का रुख साफ कर दिया है कि इस मसले पर क्या किया जाएगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>देवेंद्र फडणवीस</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>सीएम फडणवीस ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि देश में छत्रपति शिवाजी महाराज का महिमामंडन होगा ना कि औरंगजेब का. औरंगजेब का महिमामंडन नहीं होने देंगे. ये हमारा दुर्भाग्य है कि जिस अत्याचारी ने हमारे लोगों की हत्या की उसके कब्र का हमें संरक्षण करना पड़ रहा है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>संजय राउत </strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>विपक्षी महाविकास अघाड़ी के घटक दल शिवेसना-यूबीटी की तरफ से संजय राउत ने कहा कि नए-नए हिंदुत्ववादी पैदा हुए हैं. नए-नए मुल्ले हैं उनको इतिहास का क्या पता है. एक बार म्यान निकालो और हटा दो कब्र किसने रोका है. पीएम मोदी को किसी ने तो नहीं रोका है. आंदोलन का नाटक बंद करो. मैं मानता हूं कि यह मराठाओं के शौर्य का स्मारक है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>सुप्रिया सुले</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं है. ये ऐतिहासिक विषय़ है. महाराष्ट्र सरकार से अपील करती हूं कि वह इसमें ना पड़ें. विशेषज्ञों को फैसला लेने दें.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>विजय वडेट्टीवार</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि वीएचपी और बजरंग दल पास करने के लिए और कुछ नहीं बचा है. वे नहीं चाहते कि महाराष्ट्र के लोग शांति से रहें. औरंगजेब 27 साल तक यहां रहे और वे राज्य के लिए कुछ नहीं कर पाए. अब उनकी कब्र को हटाने के बाद उन्हें क्या मिलेगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>रोहित पवार</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>एनसीपी-एसपी नेता रोहित पवार ने दावा किया कि सरकार के पास मुद्दे बचे नहीं हैं. इसके जरिए प्रदेश में किसान की समस्या, आत्महत्या और अन्य समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश हो रही है. हम लोग 200 साल बाद आने वाली पीढ़ी को क्या बताएंगे? क्या इतिहास दिखाएंगे? सत्ताधारी पार्टी इतिहास मिटाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी के कार्यकर्ता कोरटकर और सोलापूरकर का क्या हुआ?</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मुरलीधर मोहोल</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने शिवसेना यूबीटी के बयान पर कहा कि मुझे लगता है कि यूबीटी का हिंदू शब्द से कोई नाता ही नहीं है. जिन लोगों के साथ वह बैठे हैं जिन्होंने वर्षों से सावरकर जी का अपमान किया. आज की तारीख में औरंगजेब और मुगल सम्राट की बात यूबीटी वाले करेंगे तो महाराष्ट्र की जनता उसका जवाब देगी. मोहोल ने कहा कि बजरंगदल और वीएचपी की मांग बिलकुल सही है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>रामदास अठावले </strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, ”संभाजी नगर में उस व्यक्ति का कब्र है जिसने संभाजी महाराज की हत्या की थी. सीएम फडणवीस इस संबंध में निर्णय लेंगे. कानून-व्यवस्था की स्थिति ना बिगड़े और निर्णय लेना चाहिए. हिंदू संगठनों की मांग पर विचार होना चाहिए.”</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मिलिंद देवड़ा</strong></p>
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<p style=”text-align: justify;”>शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने औरंगजेब की कब्र का नाम लिए बिना उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों और दलों का एक ही मकसद है, शिवाजी का अपमान करना. हम ये बर्दाश्त नहीं करेंगे.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>नरेश म्हस्के </strong><br />शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेता राजनीति कर रहे हैं. उन्हें अल्पसंख्यकों का वोट चाहिए. उद्धव ठाकरे औरंगजेब के मकबरे का समर्थन कर रहे हैं. उन्हें अब स्पष्ट करना चाहिए कि वह औरंगजेब के मकबरे का समर्थन करते हैं, क्या उन्होंने पहले बाबरी ढांचे का भी समर्थन किया था?</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>संजय सिरसाट</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>संभाजी महाराज के गार्जियन मिनिस्टर संजय सिरसाट ने कहा कि यह अतिक्रमण है. ऐसी कब्रें देखी होंगी जो किले के पास थीं उसको हटा गया है. यह औरंगजेब की निजी संपत्ति नहीं है. लोगों को कब्र से तकलीफ आती है तो हटाई जानी चाहिए. विपक्षी पार्टी के दिमाग पर असर हो रहा है आपको कब्र चाहिए घर पर ले जाइए. शिवाजी महाराज का इतिहास औरंगजेब के कारण है क्या, यह बात कहना ही बेवकूफी है. फिर तो शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने औरंगजेब का भी पुतला लगा देना चाहिए. विलेन से इतिहास नहीं रचा जाता.</p>
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बाघों के शिकार को लेकर WCCB का बड़ा अलर्ट, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बढ़ी चौकसी
बाघों के शिकार को लेकर WCCB का बड़ा अलर्ट, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बढ़ी चौकसी <p style=”text-align: justify;”><strong>Corbett Tiger Reserve:</strong> देशभर में बाघों की सुरक्षा को लेकर वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुए बाघ के शिकार के बाद उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को भी अलर्ट पर रखा गया है. WCCB ने चेतावनी दी है कि शिकारियों के कई बड़े गिरोह सक्रिय हैं, जो बाघों का शिकार करने की ताक में हैं. इसके बाद से कॉर्बेट प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वनकर्मियों की पैदल गश्त तेज कर दी गई है, ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और साथ ही हाथियों और सैटेलाइट तकनीक की मदद से जंगल के हर हिस्से पर नजर रखी जा रही है. कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक व्यस्क बाघ का शिकार किया गया था. यह घटना सामने आने के बाद WCCB ने पूरे देश में बाघों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी किया है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>भारत सरकार को बाघों के शिकार को लेकर मिली जानकारी<br /></strong>WCCB के मुताबिक, मध्य भारत के टाइगर रिजर्व सबसे ज्यादा खतरे में हैं. खासतौर पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में बाघों के शिकार की आशंका जताई गई है. यहां शिकारियों के संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जो बेहद शातिर तरीके से बाघों का शिकार करते हैं और उनके अंगों की तस्करी करते हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि टाइगर पोचिंग (बाघों के अवैध शिकार) से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां भारत सरकार द्वारा साझा की गई हैं. इनमें शिकारियों की मूवमेंट और संभावित शिकार के इलाकों के बारे में जानकारी दी गई है. चूंकि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है और यहां करीब 250 से ज्यादा बाघ हैं, इसलिए इसे भी अलर्ट पर रखा गया है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>सेटेलाइट तकनीक से गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है<br /></strong>कॉर्बेट प्रशासन ने शिकारियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए गश्त बढ़ा दी है. ड्रोन कैमरों से जंगल के संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही है. हाथियों के जरिए दूर-दराज के इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है. सैटेलाइट तकनीक की मदद से भी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>WCCB ने अपनी रिपोर्ट में बावरिया गिरोह का जिक्र किया है, जो देश में वन्यजीवों के अवैध शिकार में सबसे आगे है. यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से बाघों और अन्य वन्यजीवों का शिकार करता है और उनके अंगों की तस्करी करता है. बाघ सिर्फ भारत की राष्ट्रीय धरोहर ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. अगर बाघों की संख्या कम होती है, तो इसका असर पूरे जंगल के इकोसिस्टम पर पड़ता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>पहले भी कई बार हो चुका है बाघों का शिकार<br /></strong>WCCB ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है, ग्रामीण और जंगली इलाकों में कुछ विशेष शिकारी समुदाय सक्रिय हैं, जो बाघों के शिकार और तस्करी में लिप्त हैं. ये शिकारी बेहद शातिर होते हैं और कुछ ही घंटों में बाघ का मांस आपस में बांटकर सबूत मिटा देते हैं. बाघ की खाल और अन्य अंगों को विदेशों में तस्करी कर देते हैं. </p>
<p style=”text-align: justify;”>यह पहली बार नहीं है जब बाघों के शिकार को लेकर अलर्ट जारी किया गया हो. बीती 5 जनवरी को भी एक बाघिन का शिकार किया गया था. इसके बाद जांच में खुलासा हुआ कि उस बाघिन के बॉडी पार्ट्स असम के रास्ते म्यांमार तक तस्करी कर दिए गए थे. यही वजह है कि WCCB ने अब पूरे देश में बाघों की सुरक्षा को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong> वन्यजीवों की चेन पर पड़ेगा प्रभाव<br /></strong>टाइगर रिजर्व के संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है सैटेलाइट से शिकारियों की मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है. जंगल के अंदरूनी हिस्सों में वनकर्मियों की पैदल गश्त बढ़ा दी गई है. हाथियों के जरिए ऐसे इलाकों की निगरानी की जा रही है, जहां वाहनों से पहुंचना मुश्किल है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>बाघों की संख्या में कमी होने से वन्यजीवों की चेन बिगड़ सकती है. इससे शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे जंगलों पर दबाव बढ़ेगा. अंततः इसका असर पर्यावरण और मानव जीवन पर भी पड़ेगा. बाघों के शिकार और तस्करी को रोकने के लिए सरकार और वन विभाग सख्त कदम उठा रहे हैं. WCCB के अलर्ट के बाद कॉर्बेट टाइगर रिजर्व समेत देशभर के टाइगर रिजर्व में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>शिकारियों की हर गतिविधि पर ड्रोन, सैटेलाइट और पैदल गश्त के जरिए नजर रखी जा रही है. सरकार और वन विभाग की यह कोशिश है कि भारत में बाघों की संख्या बढ़ाई जाए और उन्हें शिकारियों के चंगुल से बचाया जाए. भारत सरकार और राज्य सरकारें बाघों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठा रही हैं. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व समेत सभी टाइगर रिजर्व में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. वन विभाग के कर्मियों को 24×7 निगरानी के आदेश दिए गए हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>यह भी पढ़ें- <strong><a href=”https://www.abplive.com/states/up-uk/acharya-satyendra-das-chief-priest-of-shri-ram-janmabhoomi-has-passed-away-2882583″>राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का निधन</a></strong></p>

संत प्रेमानंद महाराज हुए AI का शिकार:उनकी आवाज की नकल की गई, जालसाज अपना प्रचार-प्रसार कर रहे, सतर्क रहने की दी सलाह
संत प्रेमानंद महाराज हुए AI का शिकार:उनकी आवाज की नकल की गई, जालसाज अपना प्रचार-प्रसार कर रहे, सतर्क रहने की दी सलाह वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज AI का शिकार हो गए हैं। कुछ अराजक तत्व उनकी आवाज की नकल करके अपना प्रचार-प्रसार का वीडियो बना रहे हैं और मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं प्रेमानंद महाराज के इंस्टाग्राम आईडी भजनमार्ग ऑफिशियल पर एक पोस्ट कर ऐसे लोगों से बचने की सलाह दी गई है। बता दें प्रेमानंद महाराज के देश और विदेशों में लाखों फालोवर हैं। उनके सोशल मीडिया पर आने वाले वीडियो को लाखों व्यू मिलते हैं। उनके आश्रम में कई बड़े सेलिब्रिटी आकर माथा टेकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिकायत आने के बाद प्रेमानंद महाराज के इंस्टाग्राम आईडी भजनमार्ग ऑफिशियल से किए पोस्ट में लिखा था कि सभी लोगों को सूचित किया जाता है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग कर पूज्य महाराज जी की आवाज की नकल कर कुछ अराजक तत्व अपने उत्पाद का प्रचार-प्रसार वीडियो एडवर्टाइजमेंट के जरिए कर रहे हैं, जिससे लोग भ्रमित होकर उनके सामान को खरीद रहे हैं। कृपया आप सभी सतर्क और सावधान रहें और ऐसी किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी में ना फंसे। अब प्रेमानंद महाराज के बारे में पढ़िए…. 13 साल की उम्र में प्रेमानंद जी महाराज ने घर छोड़ दिया था
कानपुर जिले का नरवल तहसील का अखरी गांव। ये जगह है, जहां प्रेमानंद महाराज का जन्म और पालन-पोषण हुआ। यहीं से निकलकर वो इस देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी में बस गए। उनके बड़े भाई गणेश दत्त पांडे बताते हैं- मेरे पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। हम 3 भाई हैं, प्रेमानंद मंझले हैं। वो बताते हैं कि प्रेमानंद हमेशा से प्रेमानंद महाराज नहीं थे। बचपन में मां-पिता ने बड़े प्यार से उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे रखा था। हर पीढ़ी में कोई न कोई एक बड़ा साधु-संत निकला
गणेश पांडे बताते हैं- हमारे पिताजी पुरोहित का काम करते थे। मेरे घर की हर पीढ़ी में कोई न कोई बड़ा साधु-संत होकर निकलता है। पीढ़ी दर पीढ़ी अध्यात्म की ओर झुकाव होने के चलते अनिरुद्ध भी बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। बचपन में पूरा परिवार रोजाना एक साथ बैठकर पूजा-पाठ करता था। अनिरुद्ध यह सब बड़े ध्यान से सभी देखा-सुना करता था। शिव मंदिर में चबूतरा बनाने से रोका, तो घर छोड़ दिया
बचपन में अनिरुद्ध ने अपनी सखा टोली के साथ शिव मंदिर के लिए एक चबूतरा बनाना चाहा। इसका निर्माण भी शुरू करवाया, लेकिन कुछ लोगों ने रोक दिया। इससे वह मायूस हो गए। उनका मन इस कदर टूटा कि घर छोड़ने का फैसला कर लिया। एक दिन देर रात खाना खाया और रोज की तरह छत पर बने कच्चे कमरे में जाकर सो गए। अगली सुबह जब बड़े भाई ने जगाने के लिए आवाज लगाई, कमरे से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने ऊपर जाकर देखा तो अनिरुद्ध कमरे में नहीं थे। खोजबीन शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि वो सरसौल में नंदेश्वर मंदिर पर रुके हैं। घरवालों ने उन्हें घर लाने का हर जतन किया, लेकिन अनिरुद्ध नहीं माने। फिर कुछ दिनों बाद बची-खुची मोह माया भी छोड़कर वह सरसौल से भी चले गए। नंदेश्वर से महराजपुर, कानपुर और फिर काशी पहुंचे
आज जिन प्रेमानंद महाराज के भक्तों में आम आदमी से लेकर सेलिब्रिटी तक शुमार हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई सिर्फ 8वीं कक्षा तक हुई है। 9वीं में भास्करानंद विद्यालय में एडमिशन दिलाया गया था, लेकिन 4 महीने में ही स्कूल छोड़ दिया। प्रेमानंद जी के वृंदावन पहुंचने की कहानी
प्रेमानंद महाराज के संन्यासी बनने के बाद वृंदावन आने की कहानी बेहद रोचक है। एक दिन प्रेमानंद महाराज से मिलने एक संत आए। उन्होंने कहा- श्री हनुमत धाम विश्वविद्यालय में श्रीराम शर्मा दिन में श्री चैतन्य लीला और रात में रासलीला मंच का आयोजन कर रहे हैं। इसमें आप आमंत्रित हैं। पहले तो प्रेमानंद महाराज ने अपरिचित साधु से वहां आने के लिए मना कर दिया। लेकिन साधु ने उनसे आयोजन में शामिल होने के लिए काफी आग्रह किया। इस पर प्रेमानंद महाराज ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। प्रेमानंद महाराज जब चैतन्य लीला और रासलीला देखने गए, तो उन्हें बहुत पसंद आई। यह आयोजन करीब एक महीने तक चला। चैतन्य लीला और रासलीला समाप्त होने के बाद प्रेमानंद महाराज को आयोजन देखने की व्याकुलता होने लगी। वह उसी साधु के पास गए, जो उन्हें आमंत्रित करने आए थे। उनसे मिलकर महाराज ने कहा- मुझे भी अपने साथ ले चलें। मैं रासलीला को देखूंगा और इसके बदले आपकी सेवा करूंगा। इस पर साधु ने कहा, आप वृंदावन आ जाएं। वहां हर रोज आपको रासलीला देखने को मिलेगी। इसके बाद प्रेमानंद महाराज वृंदावन आ गए। यहां खुद को राधा रानी और श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। साथ ही भगवद प्राप्ति में लग गए। इसके बाद महाराज संन्यास मार्ग से भक्ति मार्ग में आ गए। फिलहाल वह वृंदावन के मधुकरी में रहते हैं। ये खबर भी पढ़ें… जन्मोत्सव पर राधा रानी ने पहने 50 लाख के गहने:11 क्विंटल पंचामृत से हुआ अभिषेक, वृंदावन-बरसाना पहुंचे 15 लाख श्रद्धालु ब्रज में राधाष्टमी मनाई जा रही है। श्रीकृष्ण जन्म उत्सव के 15 दिन बाद ब्रज में बड़ा उत्सव हो रहा है। वृंदावन और बरसाना, दोनों जगह करीब 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे हैं। बरसाना में राधा रानी का ब्रह्म मुहूर्त में 11 क्विंटल पंचामृत से अभिषेक किया गया। पढ़ें पूरी खबर