Mayawati: अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं कर पा रही बसपा सुप्रीमो मायावती, बार-बार बदल रहीं फैसले

Mayawati: अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं कर पा रही बसपा सुप्रीमो मायावती, बार-बार बदल रहीं फैसले

<p style=”text-align: justify;”><strong>Mayawati News:</strong> बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के संगठन को नए सिरे मज़बूत करने में जुटी हुई है. पिछले कुछ समय में उन्होंने कई अहम बदलाव भी किए हैं. कानपुर की बात करें तो यहां बसपा सुप्रीमो कार्यकर्ताओं से असंतुष्ट दिखाई दे रही है. तीन महीने में मायावती ने ज़िलाध्यक्ष बदलकर अब कुलदीप गौतम को जिम्मेदारी दी है. आलम ये है कि 19 महीनों में यहां सात बार जिलाध्यक्षों को बदला जा चुका है.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>एक समय था जब बहुजन समाज पार्टी कानपुर की सीसामऊ क्षेत्र में मज़बूत हुआ करती थी लेकिन इस सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. जिसके बाद मायावती ने 15 दिन के अंदर राजकुमार कप्तान को जिलाध्यक्ष पद से हटाकर जय प्रकाश गौतम को 21 दिसंबर 2024 को जिलाध्यक्ष बना दिया था. उन्हें ये जिम्मेदारी दोबारा दी गई थी लेकिन, तीन महीने में उन्हें फिर से हटा दिया गया.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>19 महीने में बदले 7 जिलाध्यक्ष</strong><br />सीसामऊ उपचुनाव में बसपा ने जातीय समीकरण को साधते हुए वीरेंद्र शुक्ला को प्रत्याशी बनाया था, इस क्षेत्र में 40 मलिन बस्तियां आती है. बसपा को उम्मीद ती कि वोटरों के सहारे यहां पार्टी को ई कमाल कर सकती हैं लेकिन जब नतीजे आए तो बसपा के लिए वो बेहद चौंकाने वाले थे. पार्टी के उम्मीदवार यहां अपनी ज़मानत भी नहीं बचता सके. उन्हें सिर्फ 1327 वोट ही मिल पाएंगे. इन नतीजों से पार्टी के अंदर असंतोष देखने को मिला जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने संगठन में बदलाव की मांग की.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>पिछले 19 महीनों की बात करें, बसपा मुखिया मायावती ने साल 2023 में रामेश्वर चौधरी को हटाकर जय प्रकाश गौतम को ज़िलाध्यक्ष बनाया था, लेकिन तीन महीने बाद ही अक्टूबर 2023 को उन्हें हटा दिया गया, जिसके बाद बीपी अंबेडकर को ये जिम्मेदारी सौंपी गई. लेकिन बीपी अंबेडकर 20 दिन भी अपने पद पर ठीक से टिक नहीं सके और 16 दिन बाद ही नवंबर 2023 में उन्हें हटा दिया गया और रमाशंकर कुरील को ज़िलाध्यक्ष बनाया गया.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>रमाशंकर पर मायावती का भरोसा ज्यादा दिन नहीं टिका और दो महीने में ही उन्हें भी पद से हटा दिया जिसके बाद फरवरी 2024 में राजकुमार कप्तान को ज़िलाध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने 11 महीने तक ये पद संभाला, जिसके बाद उपचुनाव से ठीक 15 दिन पहले जय प्रकाश गौतम को फिर से ज़िलाध्यक्ष बना दिया, लेकिन इस बार भी वो तीन महीने से ज्यादा समय पूरा नहीं कर सके और अब मायावती ने कुलदीप गौतम पर भरोसा जताया है. मायावती के बार-बार बदलते फैसलों की वजह से कार्यकर्ताओं में भी असमंज की स्थिति पैदा हो रही है.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><a href=”https://www.abplive.com/states/up-uk/allahabad-high-court-bar-association-announced-to-indefinite-strike-against-justice-yashwant-verma-2911344″><strong>कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा का विरोध तेज, आज से बेमियादी हड़ताल पर गए HC के वकील</strong></a></p> <p style=”text-align: justify;”><strong>Mayawati News:</strong> बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के संगठन को नए सिरे मज़बूत करने में जुटी हुई है. पिछले कुछ समय में उन्होंने कई अहम बदलाव भी किए हैं. कानपुर की बात करें तो यहां बसपा सुप्रीमो कार्यकर्ताओं से असंतुष्ट दिखाई दे रही है. तीन महीने में मायावती ने ज़िलाध्यक्ष बदलकर अब कुलदीप गौतम को जिम्मेदारी दी है. आलम ये है कि 19 महीनों में यहां सात बार जिलाध्यक्षों को बदला जा चुका है.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>एक समय था जब बहुजन समाज पार्टी कानपुर की सीसामऊ क्षेत्र में मज़बूत हुआ करती थी लेकिन इस सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. जिसके बाद मायावती ने 15 दिन के अंदर राजकुमार कप्तान को जिलाध्यक्ष पद से हटाकर जय प्रकाश गौतम को 21 दिसंबर 2024 को जिलाध्यक्ष बना दिया था. उन्हें ये जिम्मेदारी दोबारा दी गई थी लेकिन, तीन महीने में उन्हें फिर से हटा दिया गया.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>19 महीने में बदले 7 जिलाध्यक्ष</strong><br />सीसामऊ उपचुनाव में बसपा ने जातीय समीकरण को साधते हुए वीरेंद्र शुक्ला को प्रत्याशी बनाया था, इस क्षेत्र में 40 मलिन बस्तियां आती है. बसपा को उम्मीद ती कि वोटरों के सहारे यहां पार्टी को ई कमाल कर सकती हैं लेकिन जब नतीजे आए तो बसपा के लिए वो बेहद चौंकाने वाले थे. पार्टी के उम्मीदवार यहां अपनी ज़मानत भी नहीं बचता सके. उन्हें सिर्फ 1327 वोट ही मिल पाएंगे. इन नतीजों से पार्टी के अंदर असंतोष देखने को मिला जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने संगठन में बदलाव की मांग की.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>पिछले 19 महीनों की बात करें, बसपा मुखिया मायावती ने साल 2023 में रामेश्वर चौधरी को हटाकर जय प्रकाश गौतम को ज़िलाध्यक्ष बनाया था, लेकिन तीन महीने बाद ही अक्टूबर 2023 को उन्हें हटा दिया गया, जिसके बाद बीपी अंबेडकर को ये जिम्मेदारी सौंपी गई. लेकिन बीपी अंबेडकर 20 दिन भी अपने पद पर ठीक से टिक नहीं सके और 16 दिन बाद ही नवंबर 2023 में उन्हें हटा दिया गया और रमाशंकर कुरील को ज़िलाध्यक्ष बनाया गया.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”>रमाशंकर पर मायावती का भरोसा ज्यादा दिन नहीं टिका और दो महीने में ही उन्हें भी पद से हटा दिया जिसके बाद फरवरी 2024 में राजकुमार कप्तान को ज़िलाध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने 11 महीने तक ये पद संभाला, जिसके बाद उपचुनाव से ठीक 15 दिन पहले जय प्रकाश गौतम को फिर से ज़िलाध्यक्ष बना दिया, लेकिन इस बार भी वो तीन महीने से ज्यादा समय पूरा नहीं कर सके और अब मायावती ने कुलदीप गौतम पर भरोसा जताया है. मायावती के बार-बार बदलते फैसलों की वजह से कार्यकर्ताओं में भी असमंज की स्थिति पैदा हो रही है.&nbsp;</p>
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