कोई टॉयलेट की 4 फीट की खिड़की से फांसी कैसे लगा सकता है। उसने सुसाइड नहीं किया। सब झूठ बोलते हैं, उसे मारा गया। जब पापा थाने में भाई को खाना देने गए, तब मौत के बारे में पता चला। ये कहना है सनी कुमार की बहन जानकी का। जिसकी लाश 30 मार्च को आजमगढ़ के तरवां थाने के टॉयलेट की खिड़की से लटकी मिली थी। जानकी ने बताया कि हमें बिना बताए बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। अगर कोई गड़बड़ नहीं थी तो ज्यादातर पुलिस वाले थाने छोड़कर क्यों भागे थे? सनी की बॉडी मिलने के बाद 18 घंटे तक उपद्रव, आगजनी और पथराव हुआ था। लापरवाही बरतने पर 31 मार्च की रात तरवां थाने के प्रभारी कमलेश कुमार पटेल और शाहिद समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या की FIR दर्ज हुई। सनी की मौत की हकीकत समझने के लिए दैनिक भास्कर ने परिवार के लोगों से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मामा ने पूछा- लड़की के परिवार पर FIR क्यों नहीं?
टीम तरवां थाना क्षेत्र के उमरी पट्टी गांव पहुंची। यहां सनी के मामा चंदन कुमार से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया- 29 मार्च को तरवां थाने की पुलिस ने रात 8 बजे सनी को हिरासत में लिया। उसको ऐसे घर से उठाया गया, जैसे वह यूपी का बड़ा अपराधी हो। हम लोग थाने और अफसरों के ऑफिसों की दौड़ लगाते रहे। उसी रात थाने पहुंचे। कुछ रिश्तेदार SSP ऑफिस गए, कोई सुनवाई नहीं हुई। फिर 30 मार्च को दोबारा पहुंचे, मगर सनी को लेकर कोई कुछ नहीं बता रहा था। हम लोगों ने पुलिस से यहां तक कहा कि चालान कर दीजिए, FIR लिख दीजिए, ताकि हम लोग थाने या कोर्ट से जमानत करवा लें। पुलिस सब कुछ होल्ड किए रही। सीधे 31 मार्च की सुबह हमें पता चला कि अब हमारा बच्चा नहीं रहा। सबने कहा कि वो खुदकुशी कर चुका था। हो सकता है कि ऐसा हुआ हो, मगर मैं पूछता हूं कि उसे क्यों अपनी जान देनी पड़ी। उन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस के खिलाफ मुकदमा लिखा गया, मगर उस लड़की के परिवार के खिलाफ FIR क्यों नहीं हुई। पड़ोसी अर्जुन बोले- पुलिस वालों को सजा हो
इसके बाद हमारी मुलाकात सनी के पड़ोस में रहने वाले अर्जुन कुमार से हुई। उन्होंने कहा- सनी की मौत का सबको दुख है। यही वजह है कि हजारों लोग सड़क पर उतर आए। इस मौत के जिम्मेदार सभी लोगों को सजा होनी चाहिए। यह सब पुलिस की लापरवाही से हुआ। सनी बुरा लड़का नहीं था। जिस लड़की की शिकायत पर सनी को पकड़ा था। उसको भी सामने लाना चाहिए। क्योंकि चर्चा यह है कि लड़की खुद भी सनी से बात करती थी। तब क्या उसके साथ ऐसा सलूक करना चाहिए था। लड़की के परिवार से बातचीत होगी, तब नई कहानी भी सामने आ सकती है। वो लोग भागे हुए हैं, अगर वह दोषी नहीं हैं, तो भागे क्यों? मामले में 4 लापरवाही पढ़िए… लापरवाही 1. लिखापढ़ी नहीं की
पहली लापरवाही तरवां थाने के प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार पटेल से हुई। शिकायत 28 मार्च को हुई थी। थाना प्रभारी ने सनी को 29 मार्च की रात 8 बजे उसके घर से उठाया था। 30 मार्च को उसे थाने में ही रखा। रात में सनी का शव थाने में मिला। आरोप यह भी है कि बिना लिखापढ़ी सनी को थाने में रखा और परिवार से मिलने भी नहीं दिया गया। इस मामले में FIR 30 मार्च की शाम 4.15 बजे लिखी गई। लापरवाही 2. परिजनों को बिना बताए पोस्टमॉर्टम कराया
तरवां थाने के गार्ड ने सुबह 4 बजे देखा कि बाथरूम में सनी की बॉडी फंदे पर लटकी हुई है। उन्होंने थाना प्रभारी को जानकारी दी। उन्होंने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी। बॉडी को पोस्टमॉर्टम हाउस भिजवा दिया। सुबह 6 बजे तक थाने के बाहर भीड़ जुटना शुरू हो गई। परिवार बेटे की हत्या किए जाने का आरोप लगा रहा था। पूरा थाना सस्पेंड करके FIR दर्ज कराने की मांग कर रहा था। लापरवाही 3. भीड़ को इकट्ठा होने दिया
पुलिस के अधिकारी समय रहते आकलन नहीं कर पाए कि पुलिस कस्टडी में डेथ के मामले में इतने लोग इकट्ठा हो जाएंगे। एसपी ग्रामीण चिराग जैन, एसपी सिटी शैलेंद्र लाल, 4 क्षेत्राधिकारी, 12 थाने की फोर्स और 2 प्लाटून पीएसी मौके पर थी। मगर इतनी फोर्स भी लोगों को रोक नहीं सकी। लापरवाही 4. हंगामा के 4 घंटे बाद DIG, रात 9.30 बजे पहुंचे SSP
गुस्साए परिजन और शहर के लोग सड़क पर हंगामा करते रहे। पथराव और गाड़ियों में आग लगाई जाती रही, मगर कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। सुबह 6 बजे से लोग जुटे, हंगामा करीब 10 बजे शुरू हुआ। मगर DIG सुनील कुमार सिंह दोपहर 2.15 बजे घटनास्थल पर पहुंचे। जबकि SSP देर रात थाने पहुंचे। ADG पीयूष मोर्डिया भी देर रात थाने पर पहुंचे। बैठक करके स्थिति को समझा। यूपी की सियासत में कैसे छाई पुलिस कस्टडी में मौत 4 दिन से पॉलिटिकल लीडर सनी के घर पहुंच रहे
सनी की मौत के बाद यूपी की सियासत भी गरमा गई। BJP नेताओं ने सनी की लाश को कंधा दिया। वहीं सपा और कांग्रेस के नेता अब 1 करोड़ रुपए का मुआवजा और नौकरी की मांग कर रहे हैं। बसपा के लीडर भी परिवार से मिलने के लिए पहुंचे थे। पढ़िए, कब-कौन मिलने पहुंचा और क्या कहा… 30 मार्च : BJP नेताओं ने कंधा दिया
पुलिस कस्टडी में मौत के बाद सियासत तेज हो गई। घटना के बाद रात में ही BJP के जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह सनी के घर पहुंचे। साथ में BJP कार्यकारिणी सदस्य अखिलेश कुमार मिश्रा उर्फ गुड्डू और बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद थे। उन्होंने बॉडी को कंधा दिया और कहा कि पुलिस वालों पर कार्रवाई होगी। उनके खिलाफ हत्या की FIR दर्ज होगी। 1 मार्च : सपा नेताओं ने कहा- CID जांच करें
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सपा नेताओं का प्रतिनिधि मंडल परिवार से मिलने के लिए भेजा। उमरी पट्टी के घर पर परिवार से नेताओं ने कहा- अब पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इस मामले की जांच CID से होनी चाहिए। पुलिस अपने ही डिपार्टमेंट का सपोर्ट करेगी। ये साफ होना चाहिए कि 4 फीट ऊंची खिड़की से कोई कैसे फांसी लगा लेगा। 2 मार्च : बसपा नेता बोले- 50 लाख का मुआवजा दे सरकार
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा- ये केस वैसा नहीं है, जैसा दिख रहा है, CBI से जांच करानी चाहिए। परिवार को 50 लख रुपए का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देनी चाहिए। देर शाम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी पीड़ित परिजनों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा- रक्षक ही जब भक्षक बनकर बैठे हैं, तब क्या कहा जाए। यूपी में पुलिस वर्दी पहनकर लोगों की हत्या कर रही है, पूरे प्रदेश में जंगल राज है। परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजा मिलना चाहिए। हाई कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराई जानी चाहिए। अब पढ़िए आजमगढ़ बवाल में कब क्या हुआ… 29 मार्च को पुलिस सनी को घर से उठाकर ले गई
लड़की के पिता की शिकायत के अगले दिन यानी 29 मार्च की रात 8 बजे पुलिस ने सनी को घर से उठाया। 30 मार्च को भी युवक को थाने पर ही रखा गया। परिजनों का आरोप है कि हमसे मिलने भी नहीं दिया। 31 मार्च की सुबह टॉयलेट में करीब 4 फीट ऊपर लगी खिड़की से फंदे पर लटका सनी का शव मिला। सुबह 6 बजे – भीड़ ने थाने का घेराव किया
सनी की मौत की सूचना मिलते ही घरवाले थाने पहुंच गए, लेकिन वहां उन्हें शव नहीं मिला। दरअसल, पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था। इसके बाद 31 मार्च की सुबह 6 बजे ही ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर दिया। हालांकि, पुलिस ने बाद में ग्रामीणों को वहां से हटा दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने आजमगढ़-चिरैयाकोट और वाराणसी रोड को जाम कर दिया। दोपहर 1 बजे – पुलिस पर पथराव, इंस्पेक्टर का पैर टूटा
गुस्साई भीड़ ने दोपहर 1 बजे पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया। गाड़ियां तोड़ दीं। इसके बाद पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को पीटा। इसमें मॉनिटरिंग सेल के इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार मौर्य का पैर टूट गया। गंभीर हालत में उन्हें पीजीआई भेजा गया। 2 बजे – 12 थानों की फोर्स बुलाई, DIG भी पहुंचे
बवाल की सूचना पर DIG सुनील कुमार सिंह पहुंचे। 12 थाने की फोर्स बुलाई गई। पुलिस ने तरवां थाने के दो किमी एरिया में दुकानों को बंद करा दिया। लोगों से अपील की गई कि वे घरों में ही रहें और बेवजह बाहर न निकलें। दो ड्रोन से पुलिस ने पूरे एरिया की निगरानी शुरू की। शाम 6 बजे – पुलिस शव लेकर युवक के घर पहुंची
पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस की गाड़ियों से सनी की लाश घर लाई गई। यहां फिर चीख-पुकार के बीच प्रदर्शन जोर पकड़ने लगा। लड़की के घर के सामने अंतिम संस्कार की मांग पर अड़े परिवार वालों को पुलिस अफसर मना नहीं पा रहे थे। लड़के के घरवालों का कहना था कि बेटे का शव जिस बाथरूम में लटका मिला, उसका दरवाजा खुला था। गले में पैजामे के नाड़े से फंदा लगा था। गार्ड ने ये सब देखा। इसके बाद पुलिस ने हम लोगों को बिना बताए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। लड़की का पिता जो टीचर है, उसने पुलिस को घूस देकर लड़के की हत्या कराई है। बेटे को पुलिस वालों ने मारकर लटकाया है। रात 10 बजे – ADG थाने पहुंचे
SP हेमराज मीणा रात 9:30 बजे तरवां थाने पहुंचे। SP के पहुंचने के करीब 20 मिनट बाद ADG पीयूष मोर्डिया भी पहुंच गए। करीब 2 घंटे अफसरों ने थाने में मीटिंग की। इसके बाद उन्होंने परिजनों से बातचीत की। उन्होंने सख्त एक्शन लेने का भरोसा दिया। इसके बाद घरवाले अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। रात 12 बजे – शव को दफनाया, जिलाध्यक्ष ने दिया कंधा
पुलिस ने आनन-फानन में जेसीबी बुलाई। भाजपा जिला अध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह और भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अखिलेश मिश्रा गुड़ू ने सनी को कंधा दिया। 12 बजे के बाद शव को बाग में दफनाया गया। SSP हेमराज मीणा ने तरवां थाना प्रभारी कमलेश पटेल, एक दरोगा और एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया है। ……………….. यह भी पढ़ें आजमगढ़ में बवाल, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर बरसाईं लाठियां: थाने में लटका मिला था दलित का शव, परिजन बोले- लड़की के घर के सामने बॉडी जलाएंगे आजमगढ़ में दलित युवक की थाने में मौत के बाद बवाल हो गया। गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। गाड़ियां तोड़ दीं। बेकाबू भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। पुलिसकर्मियों ने भी ईंट-पत्थर फेंककर लोगों को खदेड़ा। इसमें मॉनिटरिंग सेल के इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार मौर्य का पैर टूट गया। गंभीर हालत में पीजीआई भेजा गया। पढ़िए पूरी खबर… कोई टॉयलेट की 4 फीट की खिड़की से फांसी कैसे लगा सकता है। उसने सुसाइड नहीं किया। सब झूठ बोलते हैं, उसे मारा गया। जब पापा थाने में भाई को खाना देने गए, तब मौत के बारे में पता चला। ये कहना है सनी कुमार की बहन जानकी का। जिसकी लाश 30 मार्च को आजमगढ़ के तरवां थाने के टॉयलेट की खिड़की से लटकी मिली थी। जानकी ने बताया कि हमें बिना बताए बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। अगर कोई गड़बड़ नहीं थी तो ज्यादातर पुलिस वाले थाने छोड़कर क्यों भागे थे? सनी की बॉडी मिलने के बाद 18 घंटे तक उपद्रव, आगजनी और पथराव हुआ था। लापरवाही बरतने पर 31 मार्च की रात तरवां थाने के प्रभारी कमलेश कुमार पटेल और शाहिद समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या की FIR दर्ज हुई। सनी की मौत की हकीकत समझने के लिए दैनिक भास्कर ने परिवार के लोगों से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मामा ने पूछा- लड़की के परिवार पर FIR क्यों नहीं?
टीम तरवां थाना क्षेत्र के उमरी पट्टी गांव पहुंची। यहां सनी के मामा चंदन कुमार से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया- 29 मार्च को तरवां थाने की पुलिस ने रात 8 बजे सनी को हिरासत में लिया। उसको ऐसे घर से उठाया गया, जैसे वह यूपी का बड़ा अपराधी हो। हम लोग थाने और अफसरों के ऑफिसों की दौड़ लगाते रहे। उसी रात थाने पहुंचे। कुछ रिश्तेदार SSP ऑफिस गए, कोई सुनवाई नहीं हुई। फिर 30 मार्च को दोबारा पहुंचे, मगर सनी को लेकर कोई कुछ नहीं बता रहा था। हम लोगों ने पुलिस से यहां तक कहा कि चालान कर दीजिए, FIR लिख दीजिए, ताकि हम लोग थाने या कोर्ट से जमानत करवा लें। पुलिस सब कुछ होल्ड किए रही। सीधे 31 मार्च की सुबह हमें पता चला कि अब हमारा बच्चा नहीं रहा। सबने कहा कि वो खुदकुशी कर चुका था। हो सकता है कि ऐसा हुआ हो, मगर मैं पूछता हूं कि उसे क्यों अपनी जान देनी पड़ी। उन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस के खिलाफ मुकदमा लिखा गया, मगर उस लड़की के परिवार के खिलाफ FIR क्यों नहीं हुई। पड़ोसी अर्जुन बोले- पुलिस वालों को सजा हो
इसके बाद हमारी मुलाकात सनी के पड़ोस में रहने वाले अर्जुन कुमार से हुई। उन्होंने कहा- सनी की मौत का सबको दुख है। यही वजह है कि हजारों लोग सड़क पर उतर आए। इस मौत के जिम्मेदार सभी लोगों को सजा होनी चाहिए। यह सब पुलिस की लापरवाही से हुआ। सनी बुरा लड़का नहीं था। जिस लड़की की शिकायत पर सनी को पकड़ा था। उसको भी सामने लाना चाहिए। क्योंकि चर्चा यह है कि लड़की खुद भी सनी से बात करती थी। तब क्या उसके साथ ऐसा सलूक करना चाहिए था। लड़की के परिवार से बातचीत होगी, तब नई कहानी भी सामने आ सकती है। वो लोग भागे हुए हैं, अगर वह दोषी नहीं हैं, तो भागे क्यों? मामले में 4 लापरवाही पढ़िए… लापरवाही 1. लिखापढ़ी नहीं की
पहली लापरवाही तरवां थाने के प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार पटेल से हुई। शिकायत 28 मार्च को हुई थी। थाना प्रभारी ने सनी को 29 मार्च की रात 8 बजे उसके घर से उठाया था। 30 मार्च को उसे थाने में ही रखा। रात में सनी का शव थाने में मिला। आरोप यह भी है कि बिना लिखापढ़ी सनी को थाने में रखा और परिवार से मिलने भी नहीं दिया गया। इस मामले में FIR 30 मार्च की शाम 4.15 बजे लिखी गई। लापरवाही 2. परिजनों को बिना बताए पोस्टमॉर्टम कराया
तरवां थाने के गार्ड ने सुबह 4 बजे देखा कि बाथरूम में सनी की बॉडी फंदे पर लटकी हुई है। उन्होंने थाना प्रभारी को जानकारी दी। उन्होंने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी। बॉडी को पोस्टमॉर्टम हाउस भिजवा दिया। सुबह 6 बजे तक थाने के बाहर भीड़ जुटना शुरू हो गई। परिवार बेटे की हत्या किए जाने का आरोप लगा रहा था। पूरा थाना सस्पेंड करके FIR दर्ज कराने की मांग कर रहा था। लापरवाही 3. भीड़ को इकट्ठा होने दिया
पुलिस के अधिकारी समय रहते आकलन नहीं कर पाए कि पुलिस कस्टडी में डेथ के मामले में इतने लोग इकट्ठा हो जाएंगे। एसपी ग्रामीण चिराग जैन, एसपी सिटी शैलेंद्र लाल, 4 क्षेत्राधिकारी, 12 थाने की फोर्स और 2 प्लाटून पीएसी मौके पर थी। मगर इतनी फोर्स भी लोगों को रोक नहीं सकी। लापरवाही 4. हंगामा के 4 घंटे बाद DIG, रात 9.30 बजे पहुंचे SSP
गुस्साए परिजन और शहर के लोग सड़क पर हंगामा करते रहे। पथराव और गाड़ियों में आग लगाई जाती रही, मगर कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। सुबह 6 बजे से लोग जुटे, हंगामा करीब 10 बजे शुरू हुआ। मगर DIG सुनील कुमार सिंह दोपहर 2.15 बजे घटनास्थल पर पहुंचे। जबकि SSP देर रात थाने पहुंचे। ADG पीयूष मोर्डिया भी देर रात थाने पर पहुंचे। बैठक करके स्थिति को समझा। यूपी की सियासत में कैसे छाई पुलिस कस्टडी में मौत 4 दिन से पॉलिटिकल लीडर सनी के घर पहुंच रहे
सनी की मौत के बाद यूपी की सियासत भी गरमा गई। BJP नेताओं ने सनी की लाश को कंधा दिया। वहीं सपा और कांग्रेस के नेता अब 1 करोड़ रुपए का मुआवजा और नौकरी की मांग कर रहे हैं। बसपा के लीडर भी परिवार से मिलने के लिए पहुंचे थे। पढ़िए, कब-कौन मिलने पहुंचा और क्या कहा… 30 मार्च : BJP नेताओं ने कंधा दिया
पुलिस कस्टडी में मौत के बाद सियासत तेज हो गई। घटना के बाद रात में ही BJP के जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह सनी के घर पहुंचे। साथ में BJP कार्यकारिणी सदस्य अखिलेश कुमार मिश्रा उर्फ गुड्डू और बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद थे। उन्होंने बॉडी को कंधा दिया और कहा कि पुलिस वालों पर कार्रवाई होगी। उनके खिलाफ हत्या की FIR दर्ज होगी। 1 मार्च : सपा नेताओं ने कहा- CID जांच करें
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सपा नेताओं का प्रतिनिधि मंडल परिवार से मिलने के लिए भेजा। उमरी पट्टी के घर पर परिवार से नेताओं ने कहा- अब पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इस मामले की जांच CID से होनी चाहिए। पुलिस अपने ही डिपार्टमेंट का सपोर्ट करेगी। ये साफ होना चाहिए कि 4 फीट ऊंची खिड़की से कोई कैसे फांसी लगा लेगा। 2 मार्च : बसपा नेता बोले- 50 लाख का मुआवजा दे सरकार
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा- ये केस वैसा नहीं है, जैसा दिख रहा है, CBI से जांच करानी चाहिए। परिवार को 50 लख रुपए का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देनी चाहिए। देर शाम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी पीड़ित परिजनों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा- रक्षक ही जब भक्षक बनकर बैठे हैं, तब क्या कहा जाए। यूपी में पुलिस वर्दी पहनकर लोगों की हत्या कर रही है, पूरे प्रदेश में जंगल राज है। परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजा मिलना चाहिए। हाई कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराई जानी चाहिए। अब पढ़िए आजमगढ़ बवाल में कब क्या हुआ… 29 मार्च को पुलिस सनी को घर से उठाकर ले गई
लड़की के पिता की शिकायत के अगले दिन यानी 29 मार्च की रात 8 बजे पुलिस ने सनी को घर से उठाया। 30 मार्च को भी युवक को थाने पर ही रखा गया। परिजनों का आरोप है कि हमसे मिलने भी नहीं दिया। 31 मार्च की सुबह टॉयलेट में करीब 4 फीट ऊपर लगी खिड़की से फंदे पर लटका सनी का शव मिला। सुबह 6 बजे – भीड़ ने थाने का घेराव किया
सनी की मौत की सूचना मिलते ही घरवाले थाने पहुंच गए, लेकिन वहां उन्हें शव नहीं मिला। दरअसल, पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था। इसके बाद 31 मार्च की सुबह 6 बजे ही ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर दिया। हालांकि, पुलिस ने बाद में ग्रामीणों को वहां से हटा दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने आजमगढ़-चिरैयाकोट और वाराणसी रोड को जाम कर दिया। दोपहर 1 बजे – पुलिस पर पथराव, इंस्पेक्टर का पैर टूटा
गुस्साई भीड़ ने दोपहर 1 बजे पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया। गाड़ियां तोड़ दीं। इसके बाद पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को पीटा। इसमें मॉनिटरिंग सेल के इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार मौर्य का पैर टूट गया। गंभीर हालत में उन्हें पीजीआई भेजा गया। 2 बजे – 12 थानों की फोर्स बुलाई, DIG भी पहुंचे
बवाल की सूचना पर DIG सुनील कुमार सिंह पहुंचे। 12 थाने की फोर्स बुलाई गई। पुलिस ने तरवां थाने के दो किमी एरिया में दुकानों को बंद करा दिया। लोगों से अपील की गई कि वे घरों में ही रहें और बेवजह बाहर न निकलें। दो ड्रोन से पुलिस ने पूरे एरिया की निगरानी शुरू की। शाम 6 बजे – पुलिस शव लेकर युवक के घर पहुंची
पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस की गाड़ियों से सनी की लाश घर लाई गई। यहां फिर चीख-पुकार के बीच प्रदर्शन जोर पकड़ने लगा। लड़की के घर के सामने अंतिम संस्कार की मांग पर अड़े परिवार वालों को पुलिस अफसर मना नहीं पा रहे थे। लड़के के घरवालों का कहना था कि बेटे का शव जिस बाथरूम में लटका मिला, उसका दरवाजा खुला था। गले में पैजामे के नाड़े से फंदा लगा था। गार्ड ने ये सब देखा। इसके बाद पुलिस ने हम लोगों को बिना बताए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। लड़की का पिता जो टीचर है, उसने पुलिस को घूस देकर लड़के की हत्या कराई है। बेटे को पुलिस वालों ने मारकर लटकाया है। रात 10 बजे – ADG थाने पहुंचे
SP हेमराज मीणा रात 9:30 बजे तरवां थाने पहुंचे। SP के पहुंचने के करीब 20 मिनट बाद ADG पीयूष मोर्डिया भी पहुंच गए। करीब 2 घंटे अफसरों ने थाने में मीटिंग की। इसके बाद उन्होंने परिजनों से बातचीत की। उन्होंने सख्त एक्शन लेने का भरोसा दिया। इसके बाद घरवाले अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। रात 12 बजे – शव को दफनाया, जिलाध्यक्ष ने दिया कंधा
पुलिस ने आनन-फानन में जेसीबी बुलाई। भाजपा जिला अध्यक्ष ध्रुव कुमार सिंह और भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अखिलेश मिश्रा गुड़ू ने सनी को कंधा दिया। 12 बजे के बाद शव को बाग में दफनाया गया। SSP हेमराज मीणा ने तरवां थाना प्रभारी कमलेश पटेल, एक दरोगा और एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया है। ……………….. यह भी पढ़ें आजमगढ़ में बवाल, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर बरसाईं लाठियां: थाने में लटका मिला था दलित का शव, परिजन बोले- लड़की के घर के सामने बॉडी जलाएंगे आजमगढ़ में दलित युवक की थाने में मौत के बाद बवाल हो गया। गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। गाड़ियां तोड़ दीं। बेकाबू भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। पुलिसकर्मियों ने भी ईंट-पत्थर फेंककर लोगों को खदेड़ा। इसमें मॉनिटरिंग सेल के इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार मौर्य का पैर टूट गया। गंभीर हालत में पीजीआई भेजा गया। पढ़िए पूरी खबर… उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर
आजमगढ़ में बहन बोली- भाई को पुलिस ने मारकर लटकाया:थाने के टॉयलेट की खिड़की से कोई फांसी लगा सकता है, पुलिस वाले भागे क्यों?
