<p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड सरकार की नई आबकारी नीति के तहत राज्य में राजस्व संग्रहण ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्राप्ति के साथ कुल आबकारी राजस्व 4360 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. सरकार की “न्यूनतम उपभोग, अधिकतम राजस्व” नीति के तहत अवैध शराब पर सख्त कार्रवाई की गई, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी हुई है. साथ ही, मदिरा उद्योग को प्रोत्साहित कर राज्य में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को भी बल दिया गया है</p>
<p style=”text-align: justify;”>नई आबकारी नीति के तहत उत्तराखंड में स्थापित मदिरा निर्माण उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. प्रत्यक्ष रूप से इन उद्योगों में 80% स्थानीय निवासियों को रोजगार मिल रहा है, जबकि परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला और सहायक सेवाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सरकार की इस नीति से उत्तराखंड उपभोक्ता से उत्पादक और निर्यातक राज्य बनने की ओर अग्रसर है. खासतौर पर पावर एल्कोहॉल (एथेनॉल) के क्षेत्र में ऊधम सिंह नगर में दो नए प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे राज्य का औद्योगिक विकास तेज होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इसके अलावा, डिस्टलरी, बॉटलिंग प्लांट, वाइनरी और ब्रूवरी उद्योगों में निवेश बढ़ने से हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, चंपावत और बागेश्वर जैसे जिलों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड में निर्मित मदिरा की मांग न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है. अब तक राज्य से लगभग 12 लाख पेटियाँ अमेरिका, इटली, अफ्रीका और घाना जैसे देशों में निर्यात की जा चुकी हैं. इससे उत्तराखंड को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का लाभ मिला है और “मेड इन उत्तराखंड” ब्रांड की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड आबकारी विभाग ने अवैध शराब के कारोबार पर कड़ी कार्रवाई की है, जिससे राज्य को राजस्व का अधिकतम लाभ मिला है. साथ ही, विभाग ने सरल अनुज्ञापन प्रक्रियाओं को अपनाकर मदिरा उद्योगों को निवेश के लिए आकर्षित किया है. इससे न केवल प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि स्थायी आर्थिक प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह नीति राज्य के मूल निवासियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ती रहेगी. इस नीति के माध्यम से उत्तराखंड ने न केवल आर्थिक दृष्टि से मजबूती हासिल की है, बल्कि राज्य में निवेश के नए द्वार भी खोले हैं.</p> <p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड सरकार की नई आबकारी नीति के तहत राज्य में राजस्व संग्रहण ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्राप्ति के साथ कुल आबकारी राजस्व 4360 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. सरकार की “न्यूनतम उपभोग, अधिकतम राजस्व” नीति के तहत अवैध शराब पर सख्त कार्रवाई की गई, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी हुई है. साथ ही, मदिरा उद्योग को प्रोत्साहित कर राज्य में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को भी बल दिया गया है</p>
<p style=”text-align: justify;”>नई आबकारी नीति के तहत उत्तराखंड में स्थापित मदिरा निर्माण उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. प्रत्यक्ष रूप से इन उद्योगों में 80% स्थानीय निवासियों को रोजगार मिल रहा है, जबकि परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला और सहायक सेवाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सरकार की इस नीति से उत्तराखंड उपभोक्ता से उत्पादक और निर्यातक राज्य बनने की ओर अग्रसर है. खासतौर पर पावर एल्कोहॉल (एथेनॉल) के क्षेत्र में ऊधम सिंह नगर में दो नए प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे राज्य का औद्योगिक विकास तेज होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इसके अलावा, डिस्टलरी, बॉटलिंग प्लांट, वाइनरी और ब्रूवरी उद्योगों में निवेश बढ़ने से हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, चंपावत और बागेश्वर जैसे जिलों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड में निर्मित मदिरा की मांग न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है. अब तक राज्य से लगभग 12 लाख पेटियाँ अमेरिका, इटली, अफ्रीका और घाना जैसे देशों में निर्यात की जा चुकी हैं. इससे उत्तराखंड को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का लाभ मिला है और “मेड इन उत्तराखंड” ब्रांड की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड आबकारी विभाग ने अवैध शराब के कारोबार पर कड़ी कार्रवाई की है, जिससे राज्य को राजस्व का अधिकतम लाभ मिला है. साथ ही, विभाग ने सरल अनुज्ञापन प्रक्रियाओं को अपनाकर मदिरा उद्योगों को निवेश के लिए आकर्षित किया है. इससे न केवल प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि स्थायी आर्थिक प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह नीति राज्य के मूल निवासियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ती रहेगी. इस नीति के माध्यम से उत्तराखंड ने न केवल आर्थिक दृष्टि से मजबूती हासिल की है, बल्कि राज्य में निवेश के नए द्वार भी खोले हैं.</p> उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड धारा 370 और तीन तलाक का जिक्र करते हुए वक्फ बिल को लेकर जीतन राम मांझी ने किया बड़ा दावा, जानें क्या कहा
उत्तराखंड की नई आबकारी नीति से राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि, राज्य ने कमाई विदेशी मुद्रा
