चंपाई सोरेन ने इंदिरा गांधी का जिक्र कर कांग्रेस पर लगाया बड़ा आरोप, ‘झारखंड आंदोलन के समय…’

चंपाई सोरेन ने इंदिरा गांधी का जिक्र कर कांग्रेस पर लगाया बड़ा आरोप, ‘झारखंड आंदोलन के समय…’

<p style=”text-align: justify;”><strong>Jharkhand News:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन शनिवार (29 मार्च) को सरायकेला जिला अंतर्गत सांथाल सारना उमूल पहुंचे. यहां उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला. चंपाई सोरेन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के खिलाफ शुरू से साजिश करने में माहिर रही है. उन्होंने बताया कि साल 1967 में आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव ने संसद में डिलिस्टिंग प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उन्होंने धर्म बदल चुके लोगों को आरक्षण से बाहर करने की बात कही थी.</p>
<p style=”text-align: justify;”>चंपाई सोरेन ने कहा, “उनके प्रस्ताव को तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा संसदीय समिति को भेज दिया गया. इस विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति ने बहुत छानबीन की और 17 नवंबर 1969 को अपनी सिफारिशें दीं. उनमें प्रमुख सिफारिश यह थी कि कोई भी व्यक्ति जिसने आदिवासी परंपराओं का परित्याग कर दिया हो और ईसाई या इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया हो तो वह अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं समझा जाएगा. मतलब धर्म परिवर्तन के बाद उस व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा.”</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>चंपाई सोरेन ने कांग्रेस पर लगाया ये आरोप</strong><br />सोरेन ने कहा, “इसके बाद भी जब साल भर तक कुछ नहीं हुआ तो आदिवासी नेता कार्तिक उरांव ने 322 लोकसभा सदस्य और 26 राज्यसभा सदस्यों के हस्ताक्षरों का एक पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिया. जिसमें यह जोर देकर कहा गया था कि वे विधेयक की सिफारिशों का स्वीकार करें, क्योंकि यह करोड़ों आदिवासियों के अस्तित्व का प्रश्न हैं. लेकिन ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में कांग्रेस सरकार ने विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल दिया.”</p>
<p style=”text-align: justify;”>उन्होंने कहा, “जब हम कहते हैं कि कांग्रेस आदिवासी विरोधी है, तो उसके पीछे ऐसे कई कारण हैं. पहले तो उन्होंने 1961 में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे ‘आदिवासी धर्म कोड’ को जनगणना से हटवाया. उसके बाद झारखंड आंदोलन के समय कई बार आदिवासियों पर गोली चलवाने का दुस्साहस भी कांग्रेस की सरकार ने किया.”</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>आदिवासी संस्कृति का मतलब सिर्फ पूजन पद्धति नहीं- सोरेन</strong><br />सोरेन ने कहा, “आदिवासी संस्कृति का मतलब सिर्फ पूजन पद्धति नहीं बल्कि संपूर्ण जीवनशैली है. जन्म से लेकर शादी-विवाह और मृत्यु तक हमारे समाज की सभी प्रक्रियाओं को मांझी परगना, पाहन, मानकी मुंडा, पड़हा राजा और अन्य पूरा करवाते हैं. जबकि धर्मांतरण के बाद वे लोग सभी प्रक्रियाओं के लिए चर्च में जाते हैं. वहां ‘मरांग बुरु’ या ‘सिंग बोंगा’ की पूजा होती है क्या? हमारी परंपराओं से दूर हटने के बावजूद ये लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं. जबकि सरना आदिवासी समाज के बच्चे इस रेस में पिछड़ते जा रहे हैं.”</p>
<p style=”text-align: justify;”>चंपाई सोरेन ने कहा,”अगर इस धर्मांतरण को नहीं रोका गया तो भविष्य के हमारे सरना स्थलों, जाहेरस्थानों, देशाउली आदि में कौन पूजा करेगा? ऐसे तो हमारी संस्कृति ही खत्म हो जाएगी? हमारा अस्तित्व ही मिट जाएगा. पूर्व नियोजित साजिश के तहत बिल को नहीं लाया गया, ताकि बांग्लादेशी और अन्य मुसलमान आदिवासियों के साथ साजिश कर आदिवासियों के लाभ का फायदा उठा सके यही नहीं इसमें ईसाई धर्म ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है, जिसके पीछे कांग्रेस का सीधा हाथ रहा है.”&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><iframe class=”vidfyVideo” style=”border: 0px;” src=”https://www.youtube.com/embed/qpbVphHKKA8?si=YGKXv_QbL9KIEnjb” width=”631″ height=”381″ scrolling=”no”></iframe></p> <p style=”text-align: justify;”><strong>Jharkhand News:</strong> झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन शनिवार (29 मार्च) को सरायकेला जिला अंतर्गत सांथाल सारना उमूल पहुंचे. यहां उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला. चंपाई सोरेन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के खिलाफ शुरू से साजिश करने में माहिर रही है. उन्होंने बताया कि साल 1967 में आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव ने संसद में डिलिस्टिंग प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उन्होंने धर्म बदल चुके लोगों को आरक्षण से बाहर करने की बात कही थी.</p>
<p style=”text-align: justify;”>चंपाई सोरेन ने कहा, “उनके प्रस्ताव को तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा संसदीय समिति को भेज दिया गया. इस विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति ने बहुत छानबीन की और 17 नवंबर 1969 को अपनी सिफारिशें दीं. उनमें प्रमुख सिफारिश यह थी कि कोई भी व्यक्ति जिसने आदिवासी परंपराओं का परित्याग कर दिया हो और ईसाई या इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया हो तो वह अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं समझा जाएगा. मतलब धर्म परिवर्तन के बाद उस व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा.”</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>चंपाई सोरेन ने कांग्रेस पर लगाया ये आरोप</strong><br />सोरेन ने कहा, “इसके बाद भी जब साल भर तक कुछ नहीं हुआ तो आदिवासी नेता कार्तिक उरांव ने 322 लोकसभा सदस्य और 26 राज्यसभा सदस्यों के हस्ताक्षरों का एक पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिया. जिसमें यह जोर देकर कहा गया था कि वे विधेयक की सिफारिशों का स्वीकार करें, क्योंकि यह करोड़ों आदिवासियों के अस्तित्व का प्रश्न हैं. लेकिन ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में कांग्रेस सरकार ने विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल दिया.”</p>
<p style=”text-align: justify;”>उन्होंने कहा, “जब हम कहते हैं कि कांग्रेस आदिवासी विरोधी है, तो उसके पीछे ऐसे कई कारण हैं. पहले तो उन्होंने 1961 में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे ‘आदिवासी धर्म कोड’ को जनगणना से हटवाया. उसके बाद झारखंड आंदोलन के समय कई बार आदिवासियों पर गोली चलवाने का दुस्साहस भी कांग्रेस की सरकार ने किया.”</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>आदिवासी संस्कृति का मतलब सिर्फ पूजन पद्धति नहीं- सोरेन</strong><br />सोरेन ने कहा, “आदिवासी संस्कृति का मतलब सिर्फ पूजन पद्धति नहीं बल्कि संपूर्ण जीवनशैली है. जन्म से लेकर शादी-विवाह और मृत्यु तक हमारे समाज की सभी प्रक्रियाओं को मांझी परगना, पाहन, मानकी मुंडा, पड़हा राजा और अन्य पूरा करवाते हैं. जबकि धर्मांतरण के बाद वे लोग सभी प्रक्रियाओं के लिए चर्च में जाते हैं. वहां ‘मरांग बुरु’ या ‘सिंग बोंगा’ की पूजा होती है क्या? हमारी परंपराओं से दूर हटने के बावजूद ये लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं. जबकि सरना आदिवासी समाज के बच्चे इस रेस में पिछड़ते जा रहे हैं.”</p>
<p style=”text-align: justify;”>चंपाई सोरेन ने कहा,”अगर इस धर्मांतरण को नहीं रोका गया तो भविष्य के हमारे सरना स्थलों, जाहेरस्थानों, देशाउली आदि में कौन पूजा करेगा? ऐसे तो हमारी संस्कृति ही खत्म हो जाएगी? हमारा अस्तित्व ही मिट जाएगा. पूर्व नियोजित साजिश के तहत बिल को नहीं लाया गया, ताकि बांग्लादेशी और अन्य मुसलमान आदिवासियों के साथ साजिश कर आदिवासियों के लाभ का फायदा उठा सके यही नहीं इसमें ईसाई धर्म ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है, जिसके पीछे कांग्रेस का सीधा हाथ रहा है.”&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><iframe class=”vidfyVideo” style=”border: 0px;” src=”https://www.youtube.com/embed/qpbVphHKKA8?si=YGKXv_QbL9KIEnjb” width=”631″ height=”381″ scrolling=”no”></iframe></p>  झारखंड हिमाचल के शक्तिपीठों में दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, देखें तस्वीरें